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प्रदेश के 5 जिलों में इंटरनेट सेवा बंद
जिसका बच्चों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है: सीएम मान

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केंद्र और किसानों के बीच चौथे राउंड की बैठक में शामिल हुए सीएम भगवंत मान
पंजाब के प्रतिनिधि के तौर पर कई मुद्दों को केंद्र के सामने रखा गया

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केंद्र और किसानों के बीच चौथे राउंड की बैठक में शामिल हुए सीएम भगवंत मान
पंजाब के प्रतिनिधि के तौर पर कई मुद्दों को केंद्र के सामने रखा गया

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केंद्र और किसानों के बीच चौथे राउंड की बैठक में शामिल हुए सीएम भगवंत मान
पंजाब के प्रतिनिधि के तौर पर कई मुद्दों को केंद्र के सामने रखा गया

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अपने जीवन में सभी 500 मुकाबलों में अपराजित दारा सिंह की दुर्लभ तस्वीर

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कोटा राजस्थान से भारतीय मुक्केबाज अरुंधति चौधरी (dagolia) को स्ट्रैंड्जा इंटरनेशनल फाइनल में जगह बनाने के लिए हार्दिक बधाई!

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जाट की छोरी हरमिलन कौर बैंस को एशियाई चैंपियन बनने के लिए बधाईयां, एशियाई indoor एथलेटिक्स में 1500 मीटर रेस में आपने गोल्ड मैडल जीतकर देश का नाम ऊंचा किया है ऐसा करने वाली आप देश की #पहली खिलाड़ी है

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भक्तों की दादी अम्मा 😂😂😂 #msp #kisan #likefollowshare

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इंतजार खत्म! जानें कब रिलीज होगी 'आश्रम 4'

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18 साल की उम्र में लाहौर जितने वाले महाराजा रणजीत सिंह जी की कहानी-
जब भी देश के इतिहास में महान राजाओं के बारे में बात होगी तो शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह का नाम इसमें जरूर आएगा।
महाराजा रणजीत सिंह ने 10 साल की उम्र में पहला युद्ध लड़ा था वहीं 18 साल की उम्र में लाहौर को जीत लिया था।
40 वर्षों तक के अपने शासन में उन्‍होंने अंग्रेजों को अपने साम्राज्य के आसपास भी नहीं फटकने दिया, इसके बाद 1802 में उन्होंने अमृतसर को अपने साम्राज्य में मिला लिया और 1807 में उन्होंने अफगानी शासक कुतुबुद्दीन को हराकर कसूर पर कब्जा किया
रणजीत सिंह ने अपनी सेना के साथ आक्रमण कर 1818 में मुल्तान और 1819 में कश्मीर पर कब्जा कर उसे भी सिख साम्राज्य का हिस्सा बन गया। महाराजा रणजीत ने अफगानों के खिलाफ कई लड़ाइयां लड़ीं और उन्हें पश्चिमी पंजाब की ओर खदेड़ दिया। अब पेशावर समेत पश्तून क्षेत्र पर उन्हीं का अधिकार हो गया। यह पहला मौका था जब पश्तूनों पर किसी गैर-मुस्लिम ने राज किया। अफगानों और सिखों के बीच 1813 और 1837 के बीच कई युद्ध हुए। 1837 में जमरुद का युद्ध उनके बीच आखिरी भिड़ंत थी। इस भिड़ंत में रणजीत सिंह के एक बेहतरीन सिपाहसालार हरि सिंह नलवा मारे गए थे।
दशकों तक शासन के बाद रणजीत सिंह का 1839 को निधन हो गया, लेकिन उनकी वीर गाथाएं आज भी लोगों को प्रेरित करती हैं।

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