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कोई भी साधक अपने इष्ट के निरंतर नाम जप से यहीं अनुभूति का आभास करता है
१- शरीर में हल्कापन और मन में उत्साह होता है ।
२- शरीर में से एक विशेष प्रकार की सुगन्ध आने लगती है ।
३- त्वचा पर चिकनाई और कोमलता का अंश बढ़ जाता है ।
४- तामसिक आहार-विहार से घृणा बढ़ जाती है और सात्त्विक दिशा में मन लगने लगता है ।
५- स्वार्थ का कम और परमार्थ का अधिक ध्यान रहता है ।
६- नेत्रों में तेज झलकने लगता है ।
७- किसी व्यक्ति या कार्य के विषय में वह जरा भी विचार करता है, तो उसके सम्बन्ध में बहुत-सी ऐसी बातें स्वयमेव प्रतिभासित होती हैं, जो परीक्षा करने पर ठीक निकलती हैं।
८- दूसरों के मन के भाव जान लेने में देर नहीं लगती ।
९ - भविष्य में घटित होने वाली बातों का पूर्वाभास मिलने लगता है ।
१० - शाप या आशीर्वाद सफल होने लगते हैं। अपनी गुप्त शक्तियों से वह दूसरों का बहुत कुछ लाभ या बुरा कर सकता है।
धर्म, ज्ञान और न्याय की त्रिवेणी, प्रयागराज में आज भारत गणराज्य के मुख्य न्यायाधीश मा. न्यायमूर्ति डॉ. डी.वाई. चंद्रचूड़ जी के कर-कमलों से डॉ. राजेन्द्र प्रसाद राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय का विधिवत शुभारंभ हुआ।
उत्तर प्रदेश के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है।
आप सभी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं!
धर्म, ज्ञान और न्याय की त्रिवेणी, प्रयागराज में आज भारत गणराज्य के मुख्य न्यायाधीश मा. न्यायमूर्ति डॉ. डी.वाई. चंद्रचूड़ जी के कर-कमलों से डॉ. राजेन्द्र प्रसाद राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय का विधिवत शुभारंभ हुआ।
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