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Case 1..पहले मैं बहुत ही नाटे कद का था फिर मेने #होरलिक्स और #बूस्ट मिल्क पाऊडर का विज्ञापन देख कर उसे पीना शुरू किया, अब मैं बैठे बैठे ही खड़े ऊँट की चुम्मी ले लेता हूं।🤣
Case 2. एक बारात मे अचानक से शार्ट सर्किट होने से अधेरा छा जाता है, बाराती और घराती दोनों परेशान फिर किसी ने #orbit_chwingum चबाकर दाँत दिखाए तो LED लाइट से अधिक प्रकाश हुआ, फिर क्या सेकड़ो लोगो को खम्बो के ऊपर मुँह मे orbit chwingum देकर खड़ा कर दिया और बारात मे पहले जैसा प्रकाश छा गया 🤣🤣
Case 3.एक व्यक्ति घंटो से मछलिया पकड़ने का प्रयत्न कर रहा था, पर उसके कांटे मे कोई मछली फस ही नहीं रही थी, तभी एक दूसरा व्यक्ति आता है, अपनी एक छड़ी पर 5-6 जगह #फेविक्विक की 5-6 बूँदे रखी पानी मे छड़ी को डाला और 2 सेकंड मे 5-6 मछलीया उसकी छड़ी मे चिपक गई, पहला व्यक्ति फुल अचम्भे मे 🤣🤣🤣
Case 4.पहले भारत मे कमर दर्द होना आम बात थी, लेकिन जैसे ही लोगो ने moove लगाना शुरू किया, कमर दर्द भारत छोड़कर चला गया 🤣🤣🤣🤣
Case 5.पहले मै स्वयं को साँवला समझता था, फिर मेने #फेयरहैंडसम क्रीम लगाना आरम्भ किया, अब मुझे देखकर लोगो की आंखे बंद होने लगती है इतना गोरा हो गया हूँ 🤣🤣🤣🤣🤣
उपरोक्त उदाहरण केवल कुछ एक उदाहरण है, जिनको देखकर मिया लार्ड को कुछ भ्रामक नहीं लगा परन्तु जैसे ही #बाबा_रामदेव ने कहा के अश्वगंधा को दूध के साथ लेने से वजन बढ़ाया जा सकता है, एलोवेरा, गिलोय का जूस बेहतरीन इम्युनिटी बूस्टर है आदि , बात भ्रामक लगने लगी
माननीयों को इनसे कोई प्रॉब्लम नही बस बाबा रामदेव और #पतंजलि से है, भारतीय चिकित्सा पद्धति से है, #योग से है #आयुर्वेद से है 🤷♂️
अरे अपनी कोई इज्जत नहीं तो कम से कम भारतीय न्याय प्रणाली की इज्जत का तो ख्याल रख लेते,
विदेशी ड्रग माफियाओ के इतना भी क्या प्रेम जो जनता व राष्ट्र के हित अहित को भूले पड़े हो
जज साहब जिस दिन से बिज्ञापन बनने आरम्भ हुए है 99% भ्रामक ही होते है, आपकी आँखे अब खुली है क्या,🤔
वो भी बाबा के #भगवे चोले की चमक से या विदेशी सिक्कों की खनक से.......?
ये सवाल इसलिए खड़ा होता है, के न्याय का मतलब होता है सबको समान देखना लेकिन आपके इस कृत्य मे पक्षपात दिख रहा है,
भगवान राम के लिये केवट कि अभिव्यक्ति सबसे सुंदर थी।
नाथ आज मैं काह न पावा।
राम इस तरह से व्याप्त है।
सगुण, निर्गुण, द्वैत , अद्वैत सभी में राम है।
जब भी ज्ञानियों के लिये यह दुष्कर हुआ कि वह कैसे ईश्वर को परिभाषित करें, तो उन्होंने राम कह दिया।
भक्त जब भी अपने भाव में विव्हल हुये तो राम कह दिया।
राम इतने सरल , सुगम है कि सब ने उन्हें अपना लिया।
किसी ने कहा मेरे राम,
किसी ने कहा हे राम,
किसी ने कहा सबके राम,
किसी ने कहा अपने अपने राम,
किसी ने कहा राम ही ब्रह्म है।
जब धर्म को लेकर धर्म का संकट खड़ा हुआ।
जब जीवन मूल्यों के प्रति वाद विवाद हुआ।
जब भी शास्त्रों में मतैक्य पैदा हुये।
तब 'राम ' ही मानदंड बनकर समाधान दिये।
योगेश्वर भगवान कृष्ण युद्धभूमि धर्मज्ञ लोगों के बीच कहते है, क्या मर्यादापुरुषोत्तम भगवान राम ने ऐसा नहीं किया था।
युधिष्ठिर, अपने भाईयों से कहते है। भगवान राम भी तो वन को गये थे।
आम्रपाली, भगवान बुद्ध से कहती है कि मर्यादापुरुषोत्तम राम ने अहिल्या का उद्धार नहीं किया था।
वह कौन है, इस पवित्र भूमि पर पैदा हुआ महात्मा, साधु, ऋषि, कवि जिन्होंने राम कि महिमा का वर्णन न किया हो।
डॉ राममनोहर लोहिया कहते थे कि राम के आदर्श के बिना भारत जीवित नहीं रह सकता है।
अटल विहारी वाजपेयी संसद में अपने भाषण के अंत मे कहते है कि भगवान राम ने कहा था मैं मृत्यु को स्वीकार कर लूँगा, लेकिन अपकृति स्वीकार नहीं कर सकता।
हम अपने दोषों, कमियों के साथ उस छत्रछाया में सुरक्षित रहते है। जो मर्यादापुरुषोत्तम द्वारा बनी है।
एक चाय कि दुकान पर बैठा झाड़ू लगाने वाला व्यक्ति कह रहा था।
जब कोई अन्य धर्म का व्यक्ति कहता है।तुम बोलते तो राम राम हो लेकिन राम जैसी मर्यादा भी है।
मैं भावुक हो जाता हूँ कि हमारे राम ऐसे ही कि उनकी प्रंशसा अन्य धर्म के लोग भी करते है। क्या ज्ञानी, क्या अनपढ़ राम सबके एक जैसे है।
उच्चतम न्यायालय राममंदिर कि सुनवाई के आरंभ में कहता है कि आप सभी पक्ष जब अपने तर्क रखें तो ध्यान रखें कि भगवान राम कि मर्यादा पर आँच न आये। यह भारत के लोगों कि भावनाओं पर आघात होगा।
हम अपने श्रेष्ठतम प्रयास को भी कहते है।
यह मेरा गिलहरी जैसा प्रयास है। अर्थात यह राम के चरणों में समर्पित है।।
पिताजी जब भी कभी किसी से क्रोध में होते थे। तो कहते थे ' श्री ' हीन हो गया है।
बहुत बार सुनने पर एक बार जब शांति से बैठे थे। मैंने पूछा श्री का अर्थ क्या होता है ?
बोले व्यक्तित्व के जो श्रेष्ठतम गुण होते हैं। वह सभी श्री में समाहित होते है। ऋग्वेद में सबसे पहले यह शब्द प्रयुक्त हुआ है।
इसका अर्थ होता है कि वह शक्ति जिससे अपना और इस जगत का विकास किया जाता है।
मैं जब अपनी लैब खोला तो बहुत से लोगों ने बहुत नाम सुझाये। लेकिन पिताजी कि व्याख्या स्मृति हो आई।
फिर मैंने ' श्री ' पैथोलॉजी रखा।।
धर्म क्या है !
महाभारत काल में सबसे सम्मानित व्यक्तियों में हस्तिनापुर के महामंत्री महात्मा विदुर जी थे। वह एक महान राजनीतिज्ञ, नीतिज्ञ, धर्मज्ञ थे। वह भारत के किसी भी राज्यसभा में चले जाते थे। तो उस राज्यसभा के लिये सम्मान की बात होती थी।
धर्म कि व्याख्या ऋषियों, शास्त्रों बार बार कि गई है। लेकिन जो व्याख्या महात्मा विदुर ने किया है। वह बहुत ही प्रभावित करती है।
आइये उस प्रसंग पर चलते हैं। जब महाभारत युद्ध हो चुका है। धृतराष्ट्र के सौ पुत्र मारे जा चुके है। उनसे मिलने बहुत दिनों बाद विदुर जी आते हैं।
लंबे सवांद के बीच में धृतराष्ट्र ने एक बार बोल दिया। मेरे सौ पुत्र मारे गये। क्या यही धर्म है ?
महात्मा विदुर के भाव में करुणा, दुख कि जगह विवेक और ज्ञान ने ले लिया।
इसे ध्यान से पढ़िये, विचार करिये।
वह बोले- हे राजन! आप धर्म कि बात न करिये। जब धर्म आपकी राज्यसभा में न्याय के लिये खड़ा था। आपने धक्के मारकर बाहर कर दिया।
धर्म वह तोता नही है। जिसे अपने हितों के लिये पिजड़े में बंद कर दिया जाय। जो हम कहें वही बोले।
हे राजेन्द्र! धर्म का विस्तार त्रिलोक को समेटे हुये है! उससे भी बाहर है।
वृक्षों की रक्षा से पवन को शुद्ध रखना भी धर्म है राजन,
जलाशयों के जल को पवित्र रखना भी धर्म है राजन,
नदियों के प्रवाह को निर्वाध बनाये रखना धर्म है राजन,
अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठावान होना धर्म है राजन,
अन्याय, अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष करना भी धर्म है राजन।
अतः हे नरेश इस युद्ध में आपके विरुद्ध युद्ध करना भी धर्म हैं।
अब भी आपके पास आत्मा बची है। धर्म कि छत्रछाया में आ जाइये।।
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मेरा प्रश्न है।
इसमें से कौन से धर्म का पालन लोग करते हैं ! धूप अगरबत्ती , लाउडस्पीकर ही धर्म बन गया है।।