जो कार्य राम मंदिर ट्रस्ट को करना चाहिये था, वो कार्य राजपुत समाज कर रहा है, ट्रस्ट की जिम्मेवारी बनती है लेकिन ट्रस्ट ही जब विरोधियों के हाथ में हैं तो कौन क्या करेगा...??

राजस्थान के झुंझुनू जिले के खेतड़ी के क्षत्रिय समाज के सुरेंद्र सिंह फौजी और अनेकों क्षत्रिय लोगों के तरफ से अयोध्या के निकट बसे राममंदिर के लिए 500 वर्षो तक संघर्ष करने वाले 115 सूर्यवंशी गांवों के लिए ( "पगड़ी" ) भेजे हैं सम्मान स्वरूप..।।

यही भावना होना चाहिए समाज के व्यक्ति कहीं के भी हो अपने समाज के लिए दिल धड़कना चाहिए...!
ये सिर्फ पगड़ी नहीं एक भावनात्मक रूप से प्रेम आ रहा है, उनकी इस 500 साल की तपस्या में सब सबको योगदान देना चाहिए...!!

image

कर्नल जेम्स टॉड ने लिखा है कि "यदि स्त्री के प्रति पुरुष की भक्ति और उसके सम्मान को कसौटी माना जाए, तो एक राजपूत का स्थान सबसे श्रेष्ठ माना जाएगा...!"
वह स्त्री के प्रति किए गए असम्मान को कभी सहन नहीं कर सकता और यदि इस प्रकार का संयोग उपस्थित हो जाए, तो वह अपने प्राणों का बलिदान देना अपना कर्तव्य समझता है, जिन उदाहरणों से इस प्रकार का निर्णय करना पड़ता है, उससे राजपूतों का सम्पूर्ण इतिहास ओतप्रोत है...!!

image
2 سنوات - ترجم - Facebook

https://www.facebook.com/Pahad....idilse123/videos/142

भारत का अजेय धर्मरक्षक: गौतमीपुत्र सातकर्णी
उसके घोड़े समुद्र का पानी पीते थे, अर्थात वह समुद्रों का भी स्वामी था, वह पूरी धरती ही नही, समुद्र पर भी राज करता था। क्षत्रप शक विदेशी राजा नेहपान के हाथों उसके पिता की हत्या हुई, वह बालक इतना शिशु था, की राजपाठ भी माता गौतमी ने संभाला...
लेकिन उस वीरमाता ने अपने पुत्र को योग्य बनाया, ताकि वह बड़ा होकर अपने पिता के हत्यारे से प्रतिशोध ले सकें। ऐसा ही हुआ... उस वीरपुत्र का नाम था सातकर्णी...
राजा बनने के बाद 16 वर्ष तक चुपचाप शांति से राजपाठ चलाते हुए अपनी सैनिक शक्ति बढ़ाता रहा, पहला आक्रमण पूना पर किया, उसके अगले वर्ष तो सारे महाराष्ट्र को ही उन्होंने अपने नियंत्रण में ले लिया।
अब बारी थी कच्छ भरूच के विदेशी शक शासक नेहपान की। 2 वर्ष तक सातकर्णी नेहपान को घेरकर बैठा रहा, 2 वर्ष के कड़े संघर्ष के बाद नेहपान का वध कर अपने पिता की हत्या का प्रतिशोध लिया।
सातकर्णी इतना महान राजा था की इतिहास के लेखों में उन्हें "पोरजन निविसेस सम दुःख सुखस" लिखा मिलता है।
अर्थात सातकर्णी ऐसा राजा था, जिसका स्वयं का कोई सुख दुख नही था, इस सन्यासी प्रवृत्ति के राजा के लिए प्रजा का सुख ही स्वयं का सुख, और प्रजा का दुख ही, स्वयं का दुःख था।
सनातन धर्मशास्त्रों में जो कर प्रणाली है, उसी प्रणाली के हिसाब से सातकर्णी जनता से टैक्स वसूलते थे। बड़े से बड़े शत्रु को भी प्राणदंड देने में सातकर्णी को रुचि नही थी, क्षमा ही सातकर्णी का स्वभाव था।
सातकर्णी के घोड़ो ने तीनों समुद्रों का जलपान किया था। इतिहास में त्रिसमुद्रतोयपीतवाहन का जिक्र सातकर्णी की शक्ति के सम्बंध में आया है।
धर्म शास्त्रों में 4 समुद्रों की चर्चा होती है, उसी आधार पर देखें, तो विश्व की 75% भूमि का राजा अकेला सातकर्णी था।
उस समय मान्यता थी कि विधवा स्त्री शुभ नही मानी जाती, लेकिन सातकर्णी ने कहा की माँ सदैव शुभ होती है, मेरे नाम से पूर्व आज से मेरी माँ का नाम लगेगा, आज से मुझे गौतमी देवी के पुत्र "गौतमीपुत्र सातकर्णी" के नाम से जाना जाएं।
गौतमीपुत्र सातकर्णी का समयकाल ईसा के 100 से 200 साल बाद का माना जाता है।

image
2 سنوات - ترجم - Facebook

https://www.facebook.com/TheCi....tyNewsLDH/videos/725

2 سنوات - ترجم

मालूम हैं आपको
मगर मानेंगे नहीं
स्त्री शरीर की सुंदरता के ढिंढोरे पीटने वाले, नारी सुंदरता क्या है ?
नारी गुणों से पूजनीय हैं।
वंदनीय हैं।
कल जब सारा देश देख रहा था कि उनके पास वो सब हैं फिर भी क्या नहीं हैं जो इस बच्ची के पास हैं।
तो वह हैं इनकी योग्यता।
योग्यता किसी भी पहचान की मोहताज नहीं होती।
अक्सर कमी का ढिंढोरा पीटने वाले इनसे सीखे , दोनों हाथ न होने के बाद भी बेटी ने अर्जुन अवॉर्ड पाया है।
ये हैं भारत की बेटी।
वसुदेव कुटुम्बकम की बेटी।
पैरा तीरंदाज शीतल देवी 💐💐
अनन्त उपलब्धियां तुम्हें प्राप्त हो देवी 💐

image
2 سنوات - ترجم - Facebook

https://www.facebook.com/INDun....ravelled/videos/1543

2 سنوات - ترجم - Facebook

https://www.facebook.com/News1....8Gujarati/videos/754

image

image