गर्मी से निजात पाने के लिए तमाम जतन किए जा रहे, इन्वर्टर लगाकर बड़े एसी गाड़ियों में चलाए जा रहे है। ये सब एक बार के लिए ठीक है, पर पेड़ लगाने के प्रयास नहीं हो रहे है। जब तक बड़े स्तर पर वृक्षारोपण नहीं होगा ये समस्या साल दर साल बढ़ती ही जाएगी।
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What a shot😱😱

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What a shot😱😱

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हर्षल पटेल की बेहतरीन गेंदबाजी
दूसरी बार 'पर्पल कैप' पर कब्जा कर लिया

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-य़ह जो जुते पहन कर खुद की आरती उतरवा रहे है, यह उत्तराखंड सरकार मे मंत्री है!

इस पार्टी मे सारे भगवान बने है..!

पीओके के मुसलमान भारत में मिलने के लिए.. भारत पाकिस्तान युद्ध में भारतीय सेना को तन मन धन से समर्थन देने की सौगंध खा रहे हैं👇🔥,,जो 70 साल मे संभव नहीं था वो अब सहज़ता से हो रहा है 💖💖
दूसरी तरफ भारत में पल रहे कुछ गद्दार भारत का खाकर पाकिस्तान के लिए भौंकते है👇😡

2 سنوات - ترجم

लीजिए पेश है एक और सच्चाई।
जवाहरलाल नेहरू अभिनेत्री नरगिस के मामा थे।

नरगिस की नानी दिलीपा, मंगल पाण्डेय के ननिहाल के राजेन्द्र पाण्डेय की बेटी थीं।
उनकी शादी 1880 में बलिया में हुई थी लेकिन शादी के एक हफ़्ते के अंदर ही उनके पति गुज़र गए थे।
दिलीपा की उम्र उस वक़्त सिर्फ़ 13 साल थी। उस ज़माने में विधवाओं की ज़िंदगी बेहद तक़लीफ़ों भरी होती थी।
ज़िंदगी से निराश होकर दिलीपा एक रोज़ आत्महत्या के इरादे से गंगा की तरफ़ चल पड़ीं, लेकिन रात में रास्ता भटककर मियांजान नाम के एक सारंगीवादक के झोंपड़े में पहुँच गयीं जो तवायफ़ों के कोठों पर सारंगी बजाता था...
मियांजान के परिवार में उसकी बीवी और एक बेटी मलिका थे... वो मलिका को भी तवायफ़ बनाना चाहता था...
दिलीपा को मियांजान ने अपने घर में शरण दी...
और फिर मलिका के साथ साथ दिलीपा भी धीरे धीरे तवायफ़ों वाले तमाम तौर तरीक़े सीख गयीं...
और एक रोज़ चिलबिला की मशहूर तवायफ़ रोशनजान के कोठे पर बैठ गयीं...
रोशनजान के कोठे पर उस ज़माने के नामी वक़ील मोतीलाल नेहरू का आना जाना रहता था...
जिनकी पत्नी पहले बच्चे के जन्म के समय गुज़र गयी थी...
दिलीपा के सम्बन्ध मोतीलाल नेहरू से बन गए...
इस बात का पता चलते ही मोतीलाल के घरवालों ने उनकी दूसरी शादी लाहौर की स्वरूप रानी से करा दी जिनकी उम्र उस वक़्त 15 साल थी...
इसके बावजूद मोतीलाल ने दिलीपा के साथ सम्बन्ध बनाए रखे...
इधर दिलीपा का एक बेटा हुआ जिसका नाम मंज़ूर अली रखा गया...
उधर कुछ ही दिनों बाद 14 नवम्बर 1889 को स्वरूपरानी ने जवाहरलाल नेहरू को जन्म दिया...
साल 1900 में स्वरूप रानी ने विजयलक्ष्मी पंडित को जन्म दिया...
और 1901 में दिलीपा से "जद्दनबाई" पैदा हुईं...
"अभिनेत्री नरगिस" इन्हीं जद्दनबाई की बेटी थीं...
मंज़ूर अली आगे चलकर मंज़ूर अली सोख़्त के नाम से बहुत बड़े मज़दूर नेता बने...
और साल 1924 में उन्होंने यह कहकर देशभर में सनसनी फैला दी कि...
मैं मोतीलाल नेहरू का बेटा और जवाहरलाल नेहरू का बड़ा भाई हूँ...
उधर एक रोज़ लखनऊ नवाब के बुलावे पर जद्दनबाई मुजरा करने लखनऊ गयीं... तो दिलीपा भी उनके साथ थी...
जवाहरलाल नेहरू काँग्रेस के किसी काम से उन दिनों लखनऊ में थे...
उन्हें पता चला तो वो उन दोनों से मिलने चले आए...
दिलीपा जवाहरलाल नेहरू से लिपट गयीं.और रो रोकर मोतीलाल नेहरू का हालचाल पूछने लगीं...
मुजरा ख़त्म हुआ तो जद्दनबाई ने जवाहरलाल नेहरू को राखी बाँधी...
साल 1931 में मोतीलाल नेहरू ग़ुज़रे तो दिलीपा ने अपनी चूड़ियाँ तोड़ डालीं...
और उसके बाद से वो विधवा की तरह रहने लगीं...
गुजरात के वरिष्ठ लेखक रजनीकुमार पंड्या जी की क़िताब ‘आप की परछाईयां’ से साभार।

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