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बुल्ले सही ही कहते हैं कि लड़की में दिमाग 1/3 ही होता है। कभी कभी तो तुलिसदास जी का ढोल गंवार दोहा भी मुझे सही लगता है हालांकि कहते हैं उसका वो मतलब नही था।
अब आपके पोस्ट से ही ले लीजिए। टैटू या मेहंदी वालों ने इनका चुइया बनाया होता है कि हम प्रोफेशनल हैं जैसे डॉक्टर होते हैं तो हमारे सामने कपड़े उतार दो। कल को पोर्न बनाने वालों के पास जाएंगी कि वो भी प्रोफेशनल है, दिल से थोड़े होता है।
साथ ही नंगा होना इज़ कूल तोभांडवुड नामक वामपन्थी कोठा सीखा ही चुका है। अब तो नंगे होने में चार चांद जो लग रहे हैं।
बाकी फेमिनिस्ट लड़की का वीडियो पकड़कर बैठ जाएंगी कि औरत को ऐसा कैसे बोला लेकिन पोस्ट का मर्म नही समझेंगी।
आज सबसे दुख की बात ये है कि गाड़ी, बंगले की तरह औरत को भी नुमाइश (show off) की चीज बना दिया गया है और औरत खुशी खुशी बन भी रही है। जो मुंह मारने वाले मर्द हैं उन्हें औरत के सम्मान की कोई वैल्यू नही लेकिन जो बेचारे संस्कारी हैं उन्हें इस तरह मोहल्लों और देश की आंखे सेकाने वाली मिल गयी तो उनका क्या होगा, ऊपर से कानून भी उनके साथ नही है।
आज भी बहुसंख्यक जनता संस्कारी है इस देश में लेकिन ये छिनार और भड़वे दिन रात बढ़ ही रहे हैं जो मेरी चिंता का विषय रहता है।