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मेवाड़ के सामन्त रावत रतनसिंह चुंडावत अपनी रानी सहल के साथ थे महल मे टहल रहे थे , कि तभी महाराणा राजसिंह का संदेश आया कि औरंगज़ेब की सेना से युद्ध होने जा रहा है, शीघ्र प्रस्थान करो।
रावत रतनसिंह चुंडावत महल के द्वार से बाहर निकलने ही वाले थे कि तभी उन्होंने एक सेवक को रानी के पास भेजकर कहलवाया कि अपनी यादगिरी के रूप में अपनी कोई निशानी भेज़ देवे,,
हाडी रानी ने अपना सिर काटकर भिजवा दिया ताकि युद्ध करते समय उनका मन विचलित न हो। रावत चुंडावत ने हाडी रानी के सिर को अपने गले में बांधा और रणभूमि में मुगल सैन्य को परास्त किया।
और कुछ लोग बोलते है आजादी चरखे से आयी है
जबकी आजादी क़े लिए राजपुत योद्धाओ ने अपने शिश कटवाए है
अपने प्राणो का बलिदान दिया है
जय राजपुताना,, 🚩
सागर के आंसू रोई थी चम्बल की धार भी,
इससे बड़ी कथा नहीं मिलेगी प्यार की
चुण्डा को जंग जीत का आशीष दे दिया,
थाली में काट क्षत्राणी ने शीश दे दिया😥