एक नेता की कहानी जिसने न केवल लड़ाई बल्कि दिलों पर विजय प्राप्त की! 💫
#mainatalhoon अब स्ट्रीमिंग, केवल #zee5 पर
Ontdekken postsOntdek boeiende inhoud en diverse perspectieven op onze Ontdek-pagina. Ontdek nieuwe ideeën en voer zinvolle gesprekken
एक नेता की कहानी जिसने न केवल लड़ाई बल्कि दिलों पर विजय प्राप्त की! 💫
#mainatalhoon अब स्ट्रीमिंग, केवल #zee5 पर
भारत के राजचिह्न की खोज
भारत के राजचिह्न की खोज फ्रेडरिक आॅस्कर ओरटेल ( 1862 - 1942 ) ने की थी। वे जर्मनी में हनोवर के थे।
ओरटेल सिविल इंजीनियर थे। तब बनारस में पोस्टिंग थी। उस समय सारनाथ खुदाई का केंद्र बना हुआ था।
ओरटेल को 1903 में सारनाथ की खुदाई करने की अनुमति मिली। कड़ाके की ठंड में दिसंबर 1904 में उन्होंने खुदाई शुरू की।
साल 1905 के मार्च महीने की वह 15 तारीख थी। धमेख स्तूप के निकट मिट्टी में गड़ा हुआ उन्हें सिंह चतुर्मुख का वह टुकड़ा मिला, जो आज भारत का राजचिह्न है।
तब ओरटेल सुपरिटेंडिंग इंजीनियर थे। साल 1921 में चीफ इंजीनियर से रिटायर होकर वे यूनाइटेड किंगडम चले गए।
वे यूनाइटेड किंगडम के टेडिंगटन में रहने लगे। उन्होंने अपने घर का नाम " सारनाथ " रखा था, जो उनके सारनाथ से प्रेम को दर्शाता है।
भारत के राजचिह्न की खोज
भारत के राजचिह्न की खोज फ्रेडरिक आॅस्कर ओरटेल ( 1862 - 1942 ) ने की थी। वे जर्मनी में हनोवर के थे।
ओरटेल सिविल इंजीनियर थे। तब बनारस में पोस्टिंग थी। उस समय सारनाथ खुदाई का केंद्र बना हुआ था।
ओरटेल को 1903 में सारनाथ की खुदाई करने की अनुमति मिली। कड़ाके की ठंड में दिसंबर 1904 में उन्होंने खुदाई शुरू की।
साल 1905 के मार्च महीने की वह 15 तारीख थी। धमेख स्तूप के निकट मिट्टी में गड़ा हुआ उन्हें सिंह चतुर्मुख का वह टुकड़ा मिला, जो आज भारत का राजचिह्न है।
तब ओरटेल सुपरिटेंडिंग इंजीनियर थे। साल 1921 में चीफ इंजीनियर से रिटायर होकर वे यूनाइटेड किंगडम चले गए।
वे यूनाइटेड किंगडम के टेडिंगटन में रहने लगे। उन्होंने अपने घर का नाम " सारनाथ " रखा था, जो उनके सारनाथ से प्रेम को दर्शाता है।
भारत के राजचिह्न की खोज
भारत के राजचिह्न की खोज फ्रेडरिक आॅस्कर ओरटेल ( 1862 - 1942 ) ने की थी। वे जर्मनी में हनोवर के थे।
ओरटेल सिविल इंजीनियर थे। तब बनारस में पोस्टिंग थी। उस समय सारनाथ खुदाई का केंद्र बना हुआ था।
ओरटेल को 1903 में सारनाथ की खुदाई करने की अनुमति मिली। कड़ाके की ठंड में दिसंबर 1904 में उन्होंने खुदाई शुरू की।
साल 1905 के मार्च महीने की वह 15 तारीख थी। धमेख स्तूप के निकट मिट्टी में गड़ा हुआ उन्हें सिंह चतुर्मुख का वह टुकड़ा मिला, जो आज भारत का राजचिह्न है।
तब ओरटेल सुपरिटेंडिंग इंजीनियर थे। साल 1921 में चीफ इंजीनियर से रिटायर होकर वे यूनाइटेड किंगडम चले गए।
वे यूनाइटेड किंगडम के टेडिंगटन में रहने लगे। उन्होंने अपने घर का नाम " सारनाथ " रखा था, जो उनके सारनाथ से प्रेम को दर्शाता है।

मुकेश अंबानी की होने वाली छोटी बहू राधिका ना सिर्फ बेहद खूबसूरत है वह बल्कि प्रतिभाशाली भी है। इसका नजारा लोगों को तब देखने को मिला है जब प्री वेडिंग सेरेमनी के पहले राधिका ने भरतनाट्यम डांस से सब का मन मोह लिया था। इस मौके पर अपनी बहू के नृत्य को देखकर नीता अंबानी भी भाव विभोर हो उठी थी। यही वजह थी कि नीता अंबानी ने अपनी बहू को गले लगा लिया था जिसे देखकर लोग राधिका की खूब तारीफ करते नजर आए थे।