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प्रज्ञानानंदा और वैशाली रमेशबाबू के लिए 2023 एक विशेष वर्ष था! चेन्नई, 🇮🇳 भारत के भाई-बहनों ने इतिहास रचा, जो एक साथ #fidecandidates और FIDE महिला उम्मीदवारों के लिए अर्हता प्राप्त करने वाले पहले भाई-बहनों के रूप में, क्रमशः! 🔥
🥈 प्रज्ञानानंदा ने #fideworldcup में एक असाधारण प्रदर्शन के साथ 🇨🇦 टोरंटो के लिए अपना टिकट अर्जित किया, जहां उन्होंने रजत पदक जीता।
🥇 वैशाली ने कुछ महीनों बाद महिला उम्मीदवारों के लिए अपना स्थान हासिल किया #fidegrandswiss जीतकर। #funfact: उसने अपना स्थान सुरक्षित कर लिया एक राउंड के साथ बाकी है।
लेकिन यह सब नहीं है!
💥 2023 में, वैशाली ने एक ग्रैंडमास्टर आदर्श के लिए सभी आवश्यकताओं को पूरा किया, एक प्रभावशाली 113 क्लासिकल गेम खेले, 56 रेटिंग अंक प्राप्त किए, और अब विश्व महिला रैंकिंग में #14 स्थान पर है! #womeninchess
🔝 प्रज्ञानानंदा ने 85 खेल खेले, 59 रेटिंग अंक प्राप्त किए, और, 2743 की रेटिंग के साथ, दुनिया में #13 है और विश्व के शीर्ष जूनियर खिलाड़ियों के रूप में विंसेंट कीमर के साथ बंधे हैं।

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पुरू और सिकंदर (अलेक्जेंडर) विदेशी इतिहासकार की कलम से।।।।
सिकन्दर ने नहीं महाराजा पुरु ने सिकन्दर को हराया था...

सिकंदर अपने पिता की मृत्यु के पश्चात् अपने सौतेले व चचेरे भाइयों को कत्ल करने के बाद मेसेडोनिया के सिंहासन पर बैठा था। अपनी महत्वाकांक्षा के कारण वह विश्व विजय को निकला। अपने आसपास के विद्रोहियों का दमन करके उसने ईरान पर आक्रमण किया, ईरान को जीतने के बाद गोर्दियास को जीता। गोर्दियास को विजय के बाद टायर को नष्ट कर डाला। बेबीलोन को विजय कर पूरे राज्य में आग लगवा दी। बाद में अफगानिस्तान के क्षेत्र को रोंद्ता हुआ सिन्धु नदी तक चढ़ आया।

सिकंदर को अपनी जीतों से घमंड होने लगा था। वह अपने को ईश्वर का अवतार मानने लगा, तथा अपने को पूजा का अधिकारी समझने लगा। परंतु भारत में उसका वो मान मर्दन हुआ जो कि उसकी मृत्यु का कारण बना।

सिन्धु को पार करने के बाद भारत के तीन छोटे छोटे राज्य थे।
१. तक्षशिला जहाँ का राजा अम्भी था,
२. पोरस,
३. अम्भिसार जो कि कश्मीर के चारो और फैला हुआ था। अम्भी का पुरु से पुराना बैर था, इसलिए उसने सिकंदर से हाथ मिला लिया।

अम्भिसार ने भी तटस्थ रहकर सिकंदर की राह छोड़ दी, परंतु पुरु ने सिकंदर से दो दो हाथ करने का निर्णय कर लिया।
आगे के युद्ध का वर्णन में यूरोपीय इतिहासकारों के अनुसार।
सिकंदर ने आम्भी की साहयता से सिन्धु पर एक स्थायी पुल का निर्माण कर लिया।

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कहते हैं कि वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप मुश्किल से मुश्किल परिस्थिति में भी अपने चेहरे पर उस तनाव को नहीं आने देते थे, लेकिन चेतक ने जब उनकी गोद में सिर रखकर प्राण त्यागे, तो महाराणा एक बालक की भांति रोने लगे थे

ये मित्रता ऐसी थी जो स्वाभिमान और स्वतंत्रता के लिए सर्वस्व न्योछावर कर गई

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1582 ई. में विजयादशमी के पवित्र दिन 'मेवाड़ का मैराथन' कहे जाने वाले दिवेर के युद्ध में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप ने अकबर के सेनापति सुल्तान खां को परास्त कर ऐतिहासिक विजय प्राप्त की थी
पेंटिंग में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप द्वारा सुल्तान खां के हाथी का कुम्भ फोड़ते हुए दिखाया गया है
जब सुल्तान खां ने घोड़े पर बैठकर युद्ध लड़ना प्रारंभ किया तो कुंवर अमरसिंह के भाले के भीषण प्रहार ने उसे घोड़े समेत मौत के घाट उतार दिया
इस विजय का परिणाम ऐसा रहा कि एक ही वर्ष में मेवाड़ी बहादुरों ने 36 मुगल थाने उखाड़ फेंके
दिवेर विजय की स्मृति के लिए दिवेर (राजसमन्द) में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप का भव्य स्मारक स्थित है
पोस्ट लेखक :- तनवीर सिंह सारंगदेवोत

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