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भारत में चीनी एजेंट राहुल गांधी ने चूँकि फ़िलिस्तान का समर्थन कर दिया है इसका स्पष्ट मतलब है कि चीन कहीं न कहीं इज़राइल पर हुए आतंकी हमले में शामिल है।
अब सूचना आ रही है कि जहां हमास को राकेट ईरान द्वारा प्राप्त हुआ वहीं Israel की आयरन डोम तकनीक को उस आतंकी हमले के समय हैक करने में चीन ने मदद की जिस कारण सायरन बजने के बावजूद भी कई मिनट तक सिस्टम सक्रिय ही नहीं हो पाया।
चीन ने 2012 में इज़राइल से इस अति गोपनीय तकनीक की कुछ फाइल चोरी कर ली थी इस कारण चीन के पास आयरन डोम तक पहुँच है। कुछ महीने पहले चीन ने जब कुछ एक मिनट के लिए इसे हैक किया तो इज़रायल को लगा था कि यह उसको नीचा दिखाने की एक सामान्य कोशिश भर थी। जबकि अब पता चल रहा है कि चीन ने हमास से बातचीत करके उसको विश्वास दिलाने के लिए उसे हैक किया था।
हमास दो साल से यह दिखाने की कोशिश कर रहा था कि अब वह युद्ध नहीं करना चाहता बल्कि गाजा में आर्थिक सुधार चाहता है बदले में इज़राइल ने गाजा के लोगों के लिए अपनी सीमा पर परमिट शुरू कर दिया था जहां गाजा के लोग दैनिक मज़दूरी के लिए वहाँ आते थे। इज़राइल में दैनिक मज़दूरी गाजा की तुलना में दस गुना है। इसी प्रकार इज़राइल को कन्फ्यूज करने के लिए फ़िलिस्तान ने जान बूझकर कुछ समय पहले पश्चिमी बॉर्डर पर हिंसा बढ़ा दी ताकि इज़राइल का फोकस शिफ्ट हो जाये। इज़राइल ने अपनी सेना का मोब्लाइज़ेशन दक्षिण से पश्चिम में कर लिया। जिस कारण गाजा की सीमा पर सैनिक कम हो गए।
गाजा के भीतर हमास के बड़े कमांडरों पर यह आरोप लगना शुरू हो गया था की वह अपनी लाइफ अरब में इंजॉय करते हैं जबकि गाजा के लोगों को इधर मरने के लिए छोड़ दिया है। हमास के ख़िलाफ़ गाजा में पनप रहे इस आक्रोश से हमास के बड़े नेता समेत ईरान और फ़िलिस्तान दोनों चिंतित थे क्यूँकि इस आक्रोश के बढ़ने से इज़राइल के प्रति गाजा के लोगों में दुश्मनी कम हो सकती थी।
इसलिए इस दबाव से निकलने के लिए और यह दिखाने के लिए कि हमास गाजा के स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ रहा है न कि क़ब्ज़ा करके इंजॉय कर रहा है, हमास ने इज़राइल पर हमले का विकल्प चुना। इज़रायल की ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद के कई लोग ख़ुद हमास के केडर में शामिल हैं लेकिन इस बार इस हमले की जानकारी हमास के टॉप लीडर में अपने केडर को दी ही नहीं। ये अपने लड़ाकों को मैदान में बुलाकर ट्रेनिंग तो देते थे पर उनसे यह नहीं बताते थे कि आख़िर उन्हें किस मिशन के लिए तैयार किया जा रहा है। ख़ुद हमास के कई लीडर इस बात से हैरान थे कि जब कुछ करना ही नहीं है तो यह इतनी ट्रेनिंग क्यों दी जा रही है। इस प्रकार के टॉप लेवल की गोपनीयता के कारण मोसाद इस घटना की तैयारी को ब्रेक करने में विफल रहा और हमास के साथ मिलकर गाजा के आर्थिक स्थिति को ठीक करने के प्रयासों को आगे बढ़ाता रहा।
हमास ने इस बार अपनी रणनीति और बदल दी और वह अपने आप को ऑफिस से शिफ्ट करके स्कूल और मस्जिदों में शिफ्ट कर लिया।
ईरान, चीन और रुस यह तीनों इस बात से परेशान चल रहे हैं कि मिडिल ईस्ट के सभी बड़े देश अमेरिका के प्रयासों से इज़राइल के साथ अपने संबंध मज़बूत कर रहे हैं। इसलिए ईरान और चीन ने प्रत्यक्ष तौर पर इस युद्ध में हिस्सा लिया है। एक ने आक्रमण में सहयोग किया जबकि दूसरे ने इज़राइली डिफेंस को कमजोर किया। इसराइल जैसे जैसे गाजा पर हमले तीव्र करेगा वैसे वैसे अरब देशों पर ईरान और तुर्की मिलकर दबाव बनायेंगे कि वह इस्लाम के ख़िलाफ़ खड़े हैं और इज़राइल को अपने दुश्मन से आगे बढ़कर फिर से संपूर्ण इस्लाम का दुश्मन घोषित करेंगे। इस नीति को अरब देशों ने अमेरिका के आह्वान पर कुछ समय पहले ही समाप्त करने की घोषणा की थी। हालाँकि अभी तक अरब देशों ने इज़रायल के बारे में कोई बड़ी नकारात्मक टिप्पणी नहीं की है और न ही इज़राइल ने पीस एकॉर्ड को अपनी तरफ़ से वापस लिया है। हालाँकि चीन ने परसों मिसइनफार्मेशन वार शुरू किया था जहां उनके एजेंटों और फैक्टचेकरों ने यह कहना शुरू कर दिया कि जेरूसलम पोस्ट ने बताया है की इज़राइल पीस एकार्ड से अब इनकार कर रहा है जबकि जेरूसलम पोस्ट में ऐसी कोई खबर ही नहीं छपी थी।
अमेरिका ने अपने जंगी बेड़ों को समुद्र में तैनात कर दिया है और फाइटर जेट की संख्या भी बढ़ाने का निर्णय लिया है। वह पुरानी ग़लतियों को दोहराना नहीं चाहता जहां देरी से मदद के कारण उसके अपने मित्र पर बाक़ी अग़ल बग़ल के देशों ने मौक़ा पाकर हमला करके स्थिति को कमजोर कर दिया था।
इस पूरे मामले में भारत पाकिस्तान कहीं नहीं हैं। ये दोनों आवश्यकता से अधिक ख़ुशी मनाते हैं किसी पक्ष में तो ये बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना वाला हाल होगा।
सीपेक में चीन और पाकिस्तान दोस्त हैं और चाबहार प्रोजेक्ट में भारत और ईरान दोस्त हैं। रुस और इज़राइल जहां एक दूसरे के ख़िलाफ़ खड़े हैं वहीं भारत और रुस के अपने संबंध हैं और वह फ़ायदेमंद है। इज़राइल और अमेरिका भी भारत के मित्र हैं। ऐसे में भारत को केवल एक देश से कोई लेना देना नहीं है और वह है फ़िलिस्तान। इसलिए भारत सरकार इस मामले में इज़राइल के साथ खड़ा रहेगा, लेकिन बाक़ी देशों पर अनावश्यक टिप्पणी भी नहीं करेगा। विदेश नीति पूर्ण रूप से अपने देश के हितों के रक्षा के लिए होनी चाहिए। बाक़ी चीन के हितों की रक्षा तो राहुल गाँधी नामक उनका एजेंट तो कर ही रहा है।

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🚨 Israel Palestine War
Israel Women Soldiers 🇮🇱🇮🇱
दुनिया के नक्शे में एक डॉट के बराबर दिखने वाला एक देश है।
तीन इज़राइल मिलकर राजस्थान के बराबर भी नही होते, फिर भी इज़राइल धार्मिक रूप से इतना कट्टर देश है कि वहां रविवार को नाक साफ करने पर न केवल जुर्माना लग जाता है बल्कि जेल भी हो सकती है, बावजूद इसके आज उसके पास रूस, अमेरिका और चीन के बाद दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वायुसेना है...
इज़राइल दुनिया के उन 9 देशों में शामिल है जिनके पास खुद का सेटेलाइट सिस्टम है, जिसकी सहायता से वो ड्रोन चलाता है, अपनी सेटेलाइट टेक्नोलॉजी इज़राइल किसी देश के साथ साझा नही करता,
इज़राइल दुनिया का एकमात्र देश है जो एंटी_बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम से पूरी तरह लैस है। इज़राइल की ओर आने वाली हर मिसाइल न सिर्फ रास्ते मे मार गिराई जाती है बल्कि एक मिनट के भीतर मिसाइल दागने वाली जगह की पहचान कर इज़राइल जवाबी मिसाइल दाग कर सब कुछ तहस नहस कर देता है...
नागरिकता को लेकर इज़राइल की स्पष्ट नीति है कि दुनिया के किसी भी हिस्से में रहने वाले यहूदी को इज़राइल अपना नागरिक मानता है। हाँ, यहूदी होने के लिए माँ और पिता दोनों का यहूदी होना अनिवार्य है। हैरानी की बात तो यह है कि जिस कौम की धार्मिक किताब दुनिया भर की धार्मिक किताबों में सबसे ज्यादा खून खराबे का आदेश देती है, वो कौम नोबल पुरस्कारों में डंका पीट देती है..
आखिर ऐसा क्या है यहूदियों में जो न केवल आज दुनिया में अपनी सैन्य शक्ति से वो पूरी दुनिया मे अपनी ताकत का लोहा मनवाते है। इज़राइल की महिलाएं जिनके लिए आर्मी ट्रेनिग अनिवार्य है, उनकी सोच सिर्फ यहूदी बच्चे पैदा करना नही होती, वो फोकस करती है एक योद्धा, एक बिजनेसमैन, एक कामयाब और जहीन इंसान पैदा करने पर और ये सोच सिर्फ उसकी नही पूरे इज़राइल राष्ट्र की होती है...
एक कामयाब इंसान पैदा करने की शुरुवात वो उसी वक्त से कर देती है जब उन्हें गर्भ ठहरने का आभास होता है। प्रेग्नेंसी के दौरान यहूदी औरतें अपने लाइफ पार्टनर के साथ गणित के सवाल हल करती है। इसे मेंटल मैथ टेकनिक बोला जाता है, जिसमे सवालो को बोल बोल के हल किया जाता है।
गर्भावस्था के दौरान उनका ज्यादातर वक्त गीत संगीत के बीच एक रिलैक्स इनवायरमेंट में बीतता है...
दुनिया भर में सिगरेट के सभी बड़े ब्राण्ड भले ही इज़राइली कम्पनियो के हो लेकिन आप किसी गर्भवती महिला के घर के आसपास भी सिगरेट नही पी सकते।
उनका मानना है कि सिगरेट होने वाले बच्चे के DNA और जीन्स को खराब कर सकती है। बच्चों को जंक फूड देने की सख्ती से मनाही होती है। उन्हें कार्टून, फुटबाल के बजाय तीरंदाज़ी और शूटिंग जैसे खेल खिलाए और सिखाए जाते है।
उनका मानना है कि तीरंदाज़ी और शूटिंग जैसे खेल बच्चों में सही फैसले लेने की सलाहियत पैदा करते है। स्कूल में भर्ती करने से पहले ही माँ बाप बच्चों को प्रैक्टिकली कारोबारी मैथ सिखाते हैं...
बच्चों को धार्मिक या अन्य विषयों से इतर साइंस पढ़ने के लिए ज्यादा प्रेरित किया जाता है। पढ़ाई के आखिरी सालों में डिग्री कालेजो में कारोबार स्टडी के लिए उनके ग्रुप बना कर उन्हें टास्क दिए जाते है और सिर्फ उसी ग्रुप के बच्चे पास किए जाते है जो कम से कम 10000_डॉलर का मुनाफा कमाने में सफल हो जाए। इससे कम मुनाफे वालो को डिग्री नही दी जाती...
न्यूयार्क में इनका एक सोशल सेट-अप सेंटर है, जो यहूदियों को बिज़नेस के लिए बिना ब्याज के लोन प्रोवाइड कराते है, मेडिकल साइंस के स्टूडेंट को नौकरी करने के बजाय प्राइवेट प्रैक्टिस के लिए सेटअप उपलब्ध कराया जाता है, इसीलिए पूरी दुनिया मे यहूदी डॉक्टर्स आपको नौकरी में रेयर ही मिलेंगे.. इज़राइल के नागरिक नौकरी नही करते बल्कि दुनियां के लोगो को नौकरी देते है..
इज़राइल सिर्फ एक देश एक कौम नही, ये एक इंफ्रास्ट्रक्चर एक सोच है, जो नस्ल दर नस्ल आगे बढ़ाई जाती है। दुनियां को इनसे सीखने की जरूरत है..
सोचिए और सीखिए कैसे एक छोटी सी कम्युनिटी धार्मिक रूप से कट्टर होते हुए भी पूरी दुनिया पर छाई है.. खासकर हमारे जैसे देश को इस बारे में सोचने की बहुत जरूरत है हम कैसे उस रास्ते पर चल सकते है..

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