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*यह गेट बिहार के गया के क़रीब गहलौर गाँव का है। इसका नाम"दशरथ मांझी द्वार" है। सही सुना आपने! एक निहायत ग़रीब, मज़दूर और तथाकथित* *सामाजिक पृष्ठभूमि में पिछड़े हुए व्यक्ति का ऐसा सम्मान! इसकी वजह है गेट के ठीक सामने सड़क के दोनों ओर फैला विशाल पहाड़। पहले यह सड़क नहीं थी, पहाड़ था। बाबा दशरथ मांझी ने केवल एक हथौड़ा और छेनी लेकर अकेले ही 360 फुट लंबी 30 फुट चौड़ी और 25 फुट ऊँचे पहाड़ को काट के एक सड़क बना डाली।*
*इसीलिए इन्हें "माउंटेन मैन" कहा जाता है।चूंकि उनकी पत्नी की मौत बिना इलाज के पहाड़ की वजह से हॉस्पिटल का रास्ता लंबा होने की वजह से हो गई तो उन्होंने परहित के लिए क्षेनी और हथौड़ा लेकर अकेले ही विशालकाय पहाड़ को काट डाला।जब एक निहायत अनपढ़!!इतना महान कार्य कर सकता है तो आप पढ़े लिखे होकर शतकवीर एमडीआरटी क्यों नही बन सकते ?? एलआइसी ने चैलेंज दिया है धरती के स्वर्ग श्री नगर चलने का!!क्या आप स्वीकार करते है??फिर देर किस बात की?अपनी एलआईसी की योजनाओं को लेकर खट खटा दे कस्टमर के द्वार!!आपका शुभाकांक्षी संजय यादव*