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महारानी पद्मिनी,
अपने समय की इस बेहद खूबसूरत चित्तौड़ गढ की महारानी को पाने के लिये दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने सन 1303 मैं मेवाड़ पर हमला किया।छह माह की घेरेबंदी के बाद मेवाड़ के राणा रतन सिंह मारे गये और अपनी आबरू बचाने के लिये महारानी पद्मिनी ने 1100 अन्य क्षत्राणीयों के साथ जलती चिता मैं जल कर जान दे दी।ये उस समय की दर्दनाक घटना थी जो इतिहास के पन्नों मैं दर्ज है और ये चित्तौड़ गढ का किला उस वीभत्स घटना का चश्म दीद गवाह है जो आज भी चीख चीख कर कह रहा है देखो उनकी दरिंदगी और अब तो कुछ सबक लो। मुगलों की कुटिलता और राजपूतों और उनकी बहादुर राजपूत्नियों के शौर्य और त्याग की अनुपम मिसाल है ये जौहर की घटना।
महारानी पद्मिनी,
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अपने समय की इस बेहद खूबसूरत चित्तौड़ गढ की महारानी को पाने के लिये दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने सन 1303 मैं मेवाड़ पर हमला किया।छह माह की घेरेबंदी के बाद मेवाड़ के राणा रतन सिंह मारे गये और अपनी आबरू बचाने के लिये महारानी पद्मिनी ने 1100 अन्य क्षत्राणीयों के साथ जलती चिता मैं जल कर जान दे दी।ये उस समय की दर्दनाक घटना थी जो इतिहास के पन्नों मैं दर्ज है और ये चित्तौड़ गढ का किला उस वीभत्स घटना का चश्म दीद गवाह है जो आज भी चीख चीख कर कह रहा है देखो उनकी दरिंदगी और अब तो कुछ सबक लो। मुगलों की कुटिलता और राजपूतों और उनकी बहादुर राजपूत्नियों के शौर्य और त्याग की अनुपम मिसाल है ये जौहर की घटना।
