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योगी से भोगी बनाया इस संसार ने,
गर्भ में प्रभु का नाम लेने वाले शिशु को मम्मी पापा कहलाना सिखाया इस संसार ने।
गर्भ में था तब शिशु परम् ज्योति के दर्शन करें, आया संसार मे आया तो नकली तेल का दीपक जलाकर भरमाया संसार ने।
गर्भ में अमृत पीता था बाहर आया तो नकली शहद चटाया संसार ने।
गर्भ में रहकर सुनता था ब्रह्म नाद बाहर आया तो थाली बजाकर छल किया संसार ने।
इतने धोखे किये संसार ने शिशु(जीव) से, ये सब देख रोया शिशु और रोकर गुरुदेव बुलाया जी ।
भटका दिया मार्ग इस संसार ने आकर मुझे बचाओ गुरुदेव जी
बन्धन में बाधा इस संसार ने आकर मुझे छुड़ाओ जी।
बड़ा हुआ शिशु, धरा यौवन में पैर अन्य सांसारिक रिश्ते हो गए वृद्ध फिर भी दया ना आई संसार को, कर विवाह उसका बांध दिया माया में।
प्रकट हुए पुण्य कर्मों का फल आये धरा पर शिव बनके गुरुदेव।
काट कर्मो के बन्धन गुरुदेव ने संसार के छल से बचाया जी।
चला जीव परम तत्वधारी संग भोगी से योगी बनाया गुरदेव ने।