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मेरे साथ पढ़ने वाला एक मित्र अचानक से दुबई चला गया और लौट के आया 5 साल बाद हालाकि फेसबुक पर लगभग रोज बात होती रहती थी
फिर भी 5 साल बाद जब वह वापस आया तो हम सभी मित्र मंडली ने उससे पूछा
और बताओ कैसी है अरब की जिंदगी, उसने जो जवाब दिया उसी के भाषा और लहजे में आपके सामने रख रहा हूं
पांच साल हो गये थे सऊदी में काम करते हुए पहला एक साल कर्ज़ उतारना दूसरा तीसरे साल की कमाई बहनों की शादियों की भेंट चढ़ गया । चौथे साल कुछ बचत करके आने की सोचा तो अब्बा की तबियत खराब हो गई फिर नहीं आ सका और अब्बा गुज़र भी गये बूढ़ी अम्मा घर पर अकेली थी लेकिन कोई बचत नहीं तो हिम्मत भी नहीं पड़ रही थी ।
पांच साल सऊदी में रहने के बाद खाली हाथ घर जाऊं लेकिन अम्मा की ज़िद और बहनों ने भी कहा भैया आ जाओ हमें कुछ नहीं चाइये बस आ जाओ.
कहा तो हिम्मत बढ़ी।कुछ उधार बारी करके टिकट लेके वापस आगया की कोई बड़ी ज़िम्मेदारी तो है नहीं अब यहीं कुछ कर लेंगे ।
आने के दूसरे दिन बहन से मिलने गया बहन भी अब बच्चों वाली हो चुकी थी आते वक्त भांजों के हाथ पर सौ रूपया रख कर वापस हुवा ।
दूसरी बहन के यहाँ पहुंचने पर पास के पैसे भी खत्म हो चुके थे लेकिन उसे ये उम्मीद थी ये बहन जो कुछ ज़्यादा नज़दीक है कुछ नहीं बोलेगी ।
वहां से वापसी होने पर भांजे के हाथ पर कुछ नहीं रख पाया घर पहुंचने पर अम्मा ने बताया की इक बहन का फोन आया था बोली भाई पांच साल बाद सऊदी से आया था मेरे बच्चों के हाथों पर सौ रूपल्ली रख के गया इतना तो हम फकीरों को दे देते हैं।
दूसरी बहन बोली की पांच साल बाद सऊदी से आया था अगर बच्चों के हाथ पर 10 रुपये भी रख देता तो बच्चें कहते मामू आये थे.
लेकिन मेरी नाक कटा दी ससुराल में खाली हाथ चले गये। मैं अब वहां खड़ा अपने पिछले 5 सालों की कमाई का हिसाब लगा रहा था।
ये सिर्फ एक आदमी की बात नही है बल्कि पैसे कमाने वाले ज्यादातर आदमियों का यही हाल है
आप पैसे कमा रहे हो तो आप को सब कुछ मिलेगा मान सम्मान लेकिन किसी कारण वश आज आप नही कमा रहे तो अब किया मिट्टी में मिल जाता है