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मां ने अपने बॉयफ्रेंड से बेटी की शादी कराई, फिर दोनों ने मिल मार डाला.....
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टाटा समूह के पहले चेयरमैन एवं देश में औद्योगिक क्रांति की गति के संवाहक, सर दोराबजी टाटा जी की पुण्यतिथि पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि।
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नैनीताल के पास स्थित कैंची धाम आश्रम में हर साल 15 जून को स्थापना दिवस मनाया जाता है। इसी दिन आश्रम में हनुमान जी व अन्य मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा की गई थी। इस अवसर पर यहाँ एक विशाल भंडारे (भोज) का आयोजन होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
इस धाम की स्थापना नीम करौली बाबा ने की थी। इस दिन से उनका एक प्रसिद्ध किस्सा जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, एक बार आश्रम के भंडारे के दौरान भोजन बनाने के लिए घी कम पड़ गया था। तब बाबा के निर्देश पर आयोजक पास बहती शिप्रा नदी से जल भरकर लाए। बताया जाता है कि बाबा के स्पर्श से वह जल घी में बदल गया, जिससे बिना किसी रुकावट के भक्तों के लिए भोजन तैयार हो सका।
नीम करौली बाबा ने 10 सितंबर 1973 को महासमाधि ले ली थी। इसके बाद 1974 में उनके भक्तों ने कैंची धाम में उनके मंदिर का निर्माण कर मूर्ति स्थापित की। आज भी 15 जून के दिन हजारों लोग यहाँ प्रसाद ग्रहण करने आते हैं।
गुजरात के चराड़ा गांव में 13 अगस्त 1929 को जन्मे संत प्रह्लाद जानी का दावा था कि उन्होंने 76 सालों तक न कुछ खाया और न ही पानी पिया। 'चुनरीवाले माताजी' के नाम से मशहूर संत के अनुसार, बचपन में देवी महामाया के वरदान के कारण उनके तालु से निकलने वाले दिव्य रस से उन्हें बिना खाए-पीए ऊर्जा मिलती थी।
उनके इस दावे की सच्चाई जानने के लिए वर्ष 2010 में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की एक टीम ने उन पर अध्ययन किया था। उन्हें 15 दिनों तक 24 घंटे सीसीटीवी की निगरानी वाले एक विशेष कमरे में रखा गया। परीक्षण के दौरान उन्होंने न तो कुछ खाया और न ही पानी पिया, फिर भी उनका स्वास्थ्य बिल्कुल सामान्य मिला। इस परिणाम ने वैज्ञानिकों को भी आश्चर्यचकित कर दिया था। DRDO का मकसद यह जानना था कि क्या मानव शरीर कम संसाधनों में लंबे समय तक जीवित रह सकता है, ताकि कठिन परिस्थितियों में इसका उपयोग सैनिकों के लिए किया जा सके।
26 मई 2020 को 90 वर्ष की आयु में गुजरात में संत प्रह्लाद जानी का निधन हो गया।