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श्री दरबार साहिब में माथा टेक कर सुखबीर बादल ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस, पंजाबियों से की अपील
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तमिलनाडु के तंजावुर में 53 साल साथ बिताने वाले बुजुर्ग दंपति की एक ही दिन में मौत हो गई। पति रंगराज सुबह 5 बजे निधन हो गए, जबकि पत्नी मरगथम उनके प्रति प्रेम और सदमे में दोपहर 2 बजे चल बसीं। दोनों का शव श्मशान घाट में एक-दूसरे के बगल में अंतिम संस्कार किया गया।
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भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है।
श्रीलंका के खिलाफ खेले गए महिला T20 इंटरनेशनल मुकाबले में स्मृति मंधाना ने 25 रन की पारी खेलते हुए T20I क्रिकेट में 4000 रन पूरे कर लिए।
इसके साथ ही वह महिला T20 इंटरनेशनल क्रिकेट में भारत की ओर से 4000 रन बनाने वाली पहली बल्लेबाज़ बन गईं और दुनिया की केवल दूसरी खिलाड़ी बनीं, जिन्होंने यह ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया।
हैदराबाद के सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन रोड पर मनोहर टॉकीज़ की पुरानी गली से गुज़रते ही एक नज़ारा सबका ध्यान खींच लेता है। एक छोटी- सी दुकान के सामने लोगों की लंबी लाइन लगी होती है। दुकान के बाहर एक पोस्टर है— 'करुणा किचन'।
इस लाइन में ज़्यादातर वे लोग होते हैं जो ओडिशा, बिहार, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना के अलग-अलग ज़िलों से रोज़गार की तलाश में यहाँ आए हैं। दुकान के अंदर, एक छोटी सी रसोई में, जॉर्ज राकेश बाबू लोगों को बाँटने के लिए कई थालियाँ तैयार करते हैं।
बिहार के पटना जिले की रहने वालीं सौम्या लता कुमारी महज़ 9वीं क्लास में थी, जब उसकी शादी के लिए रिश्ता आया। दादा-दादी, रिश्तेदार सहित आस-पड़ोस को लोगों ने सलाह दी, "अच्छा रिश्ता है, शादी कर दो। बाद में उम्र ढल जाएगी तो जल्दी से लड़का भी नहीं मिलेगा।"
लेकिन, उसके पिता का सपना कुछ और था। वह चाहते थे कि उनकी बेटी प्रशासनिक अफसर बने। फैसला बेटी पर छोड़ दिया। बेटी ने जवाब दिया, "अफसर बनूंगी" बस फिर क्या था, पिता बेटी के भविष्य के लिए सबके खिलाफ़ खड़े हो गए और उनकी शादी नहीं होने दी।
पिता की 14 साल की तपस्या आखिर पूरी हुई। आज यही बेटी बिहार सरकार में ऑफिसर है। पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ी सौम्या लता शुरुआत से ही पढ़ाई में काफी तेज थी।
गांव में ही एक छोटी सी किराना की दुकान चलाने वाले पिता ने बेटी की प्रतिभा को पहचाना और शुरू से ही कुछ बड़ा करने की सीख दी। सौम्या लता की पढ़ाई ठीक से हो सके, इसके लिए उन्होंने अपनी पैतृक ज़मीन का एक हिस्सा भी बेच दिया।
बेटी ने भी पिता के सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत की और स्कूल में हर क्लास में टॉप किया। जियोग्राफी से BA ऑनर्स करने के बाद सौम्या लता ने बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन की तैयारी शुरू कर दी।
2016 में उनका ग्रेजुएशन पूरा हुआ और 2017 में उन्होंने पहली बार BPSC की परीक्षा दी। प्रीलिम्स में वह पास भी हो गईं, लेकिन तय तारीख तक उम्र सीमा कम होने की वजह से आगे नहीं बढ़ पाईं।
सौम्या लता के लिए हार मानने का वक्त नहीं था, उन्होंने अगले साल फिर से परीक्षा दी। इस तरह, 5 बार उन्होंने असफलता का सामना किया लेकिन निराश नहीं हुईं। आखिरकार, 2021 में सौम्या ने BPSC एग्जाम क्लियर कर लिया और ब्लॉक पंचायती राज ऑफिसर के तौर पर उनका बिहार सरकार में अपॉइंटमेंट हुआ।
सौम्या की कहानी केवल उनकी सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि ये उन अनगिनत बेटियों के लिए उम्मीद की कहानी है, जो गाँव में रहकर बड़े सपने देखती हैं और उन्हें पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत कर रही हैं।