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"बर्मा नहीं है जो निकल जाएंगे 35 करोड हैं हलक में अटक जाएंगे, मोदी, शाह सुधर जाओ या गुजर जाओ"
बुरा लग रहा है क्या बैनर पढ कर?
सही तो लिखा है इन मजहबी कीटाणुओं ने। ये हमें भविष्य का आईना ही तो दिखा रहे हैं। यही तो समझा रहे हैं कि अभी आबादी कम है तब भी हलक में अटक रहे हैं।
जिस दिन आबादी बढ़ जाएगी, उस दिन से काफिरों का कत्लेआम करेंगे, उनकी बहन बेटियों के साथ बला त्कार करेंगे। यही तो समझा रहे हैं कि तुम फ्री के चक्कर में हमारी समर्थित सरकार को चुनते रहो और फिर एक दिन तुम्हारी जमीन मकान सब हमारे होगें,
बस थोड़ा आबादी तो बढने दो..
और कौन सी नई बात लिखी है बैनर पर। इतिहास गवाह रहा है। लेकिन दोगले हिंदू कभी नहीं सुधरोगे।
दोगलों को फ्री की दो रोटियाँ डालो और वो पीछे पुछ हिलाते हुए आओगे। बस थोड़ी सी आबादी तो बढने दो।
यह सुप्रीम कोर्ट की जज बेला त्रिवेदी हैं।
आज झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की याचिका पर जिस बेंच को सुनवाई करनी है, उसमें बेला त्रिवेदी भी हैं।
जस्टिस बेला त्रिवेदी गुजरात की मोदी सरकार में लॉ सेक्रेटरी भी रह चुकी हैं।
उमर खालिद की जमानत का मामला भी बेला त्रिवेदी की ही बेंच में है, जो कल 13वीं बार एडजर्न हुआ है।
राजनीतिक रूप से संवेदनशील सभी केस कैसे बेला त्रिवेदी की ही बेंच को जाते हैं इस पर भी सवाल उठने लगे हैं।
पोस्ट क्रेडिट: प्रशांत टंडन