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अगर मैं सरकार में होता और मेरे पास इतनी पॉवर होती कि मैं तय कर पाता कि भारत रत्न किसे मिलना चाहिए तो खान सर पटना वाले और विकास दिवकीर्ति दृष्टि वाले को संयुक्त रूप से भारत रत्न देने की सिफ़ारिश करता। और इसी प्रकार पद्म विभूषण, पद्म श्री इत्यादि भी शिक्षा से जुड़े लोगों को देने पर जोर रखता।
यह बाकि अन्य कारणों से नहीं क्योंकि कमी , आलोचना, विरोध या अस्वीकार हेतु कुछ खोट, कुछ बात, कुछ विचारधाराएं सबकी निकल आयेगी लेकिन वर्तमान समय जहां देशभर में अनपढ़, कुपढ़, अंधभक्ति और धार्मिक वर्चस्व का दौर चल रहा वहां ये लोग बड़े व्यापक रूप में अपनी तर्क आधारित शिक्षा की अलख जगाए हुए हैं।
यह एक ऐसी राह है जिसकी आज सबसे अधिक आवश्यकता है। इसलिए भारत रत्न जैसा सम्मान किसी क्रिकेटर, बॉलीवुड सेलेब्रिटी इत्यादि जो शराब, गुटखा, सट्टा इत्यादि का ऐड करते हैं उनको देने की बजाय या नेताओं जैसे जुमलेबाजों को देकर सम्मान घटाने से अच्छा है ऐसे किन्हीं काबिल और वाजिब लोगों को मिले। आप इसपर क्या सोचते हैं?
अगर मैं सरकार में होता और मेरे पास इतनी पॉवर होती कि मैं तय कर पाता कि भारत रत्न किसे मिलना चाहिए तो खान सर पटना वाले और विकास दिवकीर्ति दृष्टि वाले को संयुक्त रूप से भारत रत्न देने की सिफ़ारिश करता। और इसी प्रकार पद्म विभूषण, पद्म श्री इत्यादि भी शिक्षा से जुड़े लोगों को देने पर जोर रखता।
यह बाकि अन्य कारणों से नहीं क्योंकि कमी , आलोचना, विरोध या अस्वीकार हेतु कुछ खोट, कुछ बात, कुछ विचारधाराएं सबकी निकल आयेगी लेकिन वर्तमान समय जहां देशभर में अनपढ़, कुपढ़, अंधभक्ति और धार्मिक वर्चस्व का दौर चल रहा वहां ये लोग बड़े व्यापक रूप में अपनी तर्क आधारित शिक्षा की अलख जगाए हुए हैं।
यह एक ऐसी राह है जिसकी आज सबसे अधिक आवश्यकता है। इसलिए भारत रत्न जैसा सम्मान किसी क्रिकेटर, बॉलीवुड सेलेब्रिटी इत्यादि जो शराब, गुटखा, सट्टा इत्यादि का ऐड करते हैं उनको देने की बजाय या नेताओं जैसे जुमलेबाजों को देकर सम्मान घटाने से अच्छा है ऐसे किन्हीं काबिल और वाजिब लोगों को मिले। आप इसपर क्या सोचते हैं?
अगर मैं सरकार में होता और मेरे पास इतनी पॉवर होती कि मैं तय कर पाता कि भारत रत्न किसे मिलना चाहिए तो खान सर पटना वाले और विकास दिवकीर्ति दृष्टि वाले को संयुक्त रूप से भारत रत्न देने की सिफ़ारिश करता। और इसी प्रकार पद्म विभूषण, पद्म श्री इत्यादि भी शिक्षा से जुड़े लोगों को देने पर जोर रखता।
यह बाकि अन्य कारणों से नहीं क्योंकि कमी , आलोचना, विरोध या अस्वीकार हेतु कुछ खोट, कुछ बात, कुछ विचारधाराएं सबकी निकल आयेगी लेकिन वर्तमान समय जहां देशभर में अनपढ़, कुपढ़, अंधभक्ति और धार्मिक वर्चस्व का दौर चल रहा वहां ये लोग बड़े व्यापक रूप में अपनी तर्क आधारित शिक्षा की अलख जगाए हुए हैं।
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