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जीवन का प्रत्येक पल अनमोल है उसे जीने के लिए हमारी प्रसन्नता हमारे स्वभाव में प्राकृतिक रूप से ही प्रदर्शित होती रहनी चाहिए कब कौन सा क्षण मृत्यु या कोई भीषण दुख आकर हमसे उसके अधिकार अनुरूप मांग ले यह हमें कभी ज्ञात नहीं होता,

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सभी देवतागण तो जाग ही गए हैं क्योंकि आज संस्कार का विवाह हैं अपनी संस्कृति से , इस शुभ अवसर पर परिवार हमारा अपनी परंपराओं को सहेजने और उसे सुचारू करने हेतु तत्पर है।
बैर भाजी आंवरे देव उठे सांवरे 🚩🌍

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जलने वाले जलते चले , और चलने वाले चलते चले।
क्यों होड़ में बैठे सिंहासन हाथ मलने वाले मलते चले।।
✍️धरतीपुत्र 🚩
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बहरों के कानों में आज–कल शोर उतर जाता है।
जो नहीं कर पा रहे चोरी उन्हें चोर नज़र आता है।।
अंधों को चोर भी रिश्वत का कौर नज़र आता है।
जो कल तक था आज भी वही दौर नज़र आता है!!
रजनीश दुबे "धरतीपुत्र"

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