image

image

image

image

image

image

image

image

image
3 jr - Vertalen

भस्म उड़ा कर मिट्टी की, सर हाथी के चढ़ जाता था।
राणा प्रताप तेरा घोड़ा भी रजपूती धर्म निभाता था ।।

चेतक की हस्ति मिटा सकें अकबर तेरी औकात नहीं।
मेरे ह्रदय में राणा धड़कता है जिसका तुमको आभास नही ।।

रामप्रसाद से हाथी ने जीवन को अर्पित कर डाला ।
सौगंध वीर महाराणा की एक कण भी मुख में नही डाला।

रोइ थी हल्दी घाटी मंजर रक्त विलीन था।
दिल्ली की गद्दी कंपि है जिसपर अकबर आसीन था।।

चीख पड़ी है हल्दी घाटी चेतक अध बेहोश है।
अखंड सौर्य ले उड़ा है चेतक मृत्यु तक ख़ामोश है।।

हरण करे तलवार प्राण जिन्हें बरन करे म्रत्यु रानी।
लाखों जाने अर्पित हैं चेतक को छोड़ दे महारानी।।

image