प्रेगनेंसी का 8वां महीना, फिर भी लगाई सबसे तेज दौड़
जहां एक ओर गर्भवती औरतों को आठ महीने में हिलने में भी मुसीबत होती है, वहीं इस औरत ने प्रेग्नेंसी के आठवें महीने में दौड़ कर अजूबा ही कर दिखाया है।
डेली मेल में छपी खबर के मुताबिक अमेरिका में रहने वाली 34 साल की एलीशिया मौनटैनो प्रेगनेंसी के आठवें महीने में हैं। लेकिन फिर भी रेस को लेकर उनका जोश और जीतने का जज्बा इतना ज्यादा था कि उन्हें अपनी प्रेगनेंसी को इस बीच नहीं आने दिया।
हम सभी जानते हैं कि 800 मीटर का मतलब किसी बड़ी सी फील्ड का लगभग चार चक्कर के बराबर होता है।
एलीशिया के पेट में आठ महीने का बच्चा पल रहा है और उन्होंने तब भी 800 मीटर दौड़ को 2 मिनट 32 सेकंड में पार कर एक रिकॉर्ड कायम कर दिया है।
इसके लिए उन्होंने ट्रेनर्स और डॉक्टरों के पूरे निरीक्षण में ही रोज प्रैक्टिस की और उनकी इजाजत से ही 800 मीटर की दौड़ लगाई। था बड़ा चैलेंज
जब अपने आठवें महीने में हर महिला आराम कर रही होती है, उस भारी वक्त में एलिशिया धूप में दौड़ती रहती थी।
ये यकीनन अपने आप में एक बड़ी बात है। वो प्रेग्नेंट होते हुए भी दौड़ लगाने वाली पहली ओलंपियन बन गई हैं।
जब उन्होंने दौड़ खत्म की तो पूरी पब्लिक ने खड़े होकर उन्हें स्टैंडिंग ओवेशन दिया और उनके इस कदम के लिए उनकी तारीफें की।
मैं बारम्बार सेल्यूट करता हूं बहन को और इसकी मेहनत और जज्बे को

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3 سنوات - ترجم

● लाला रामदेव बीड़ी तो बनाओ रे

आरोग्यम बीड़ी

तंबाकू व निकोटिन मुक्त हर्बल बीड़ी(?)

आज मैं गूगल पर खोज तो कुछ और रहा था पर मुझे तंबाकू व निकोटिन रहित(?) आरोग्यम बीड़ी का यह विज्ञापन दिखायी दे गया। इस विज्ञापन में अमेजन का हवाला भी दिया हुआ है।

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1 पैकट की कीमत 499 रु + 85 रु ढुलाई

तो भाई लोगो मैंने भी एक पैकट भेजने के लिये amazon को बोल दिया है।

वैसे मैंने यह ऑडर cash on delivery किया है।

अब उसने भेज दिया तो ठीक और न भेजा तो अपना क्या जाता है।

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3 سنوات - ترجم

● तेरा साथ है तो ❤️
करम फूट गये मेरे।
कैसा लीचड़ और मूँजी खसम मिला है!
यह निकम्मा AC या First Class ना सही पर 2 सीटें General Sleeper Coach में तो रिजर्व करवा सकता था।
लगेज के नाम पर बोरे में सामान ना कि 5-6 हजार रु वाला VIP सूटकेस।
इसे साड़ी कहूँ या धोती कहूँ; यह भी दिलवायी तो 360 रु वाली ही दिलवायी।
पर नहीं जी...
रेल की जनरल डिब्बे में सोने के लिये सीट ना मिली तो दो सीटों के बीच में सामान से भरा बोरा रख कर ही शाही पलंग बना लिया।
पति ऐसे निश्चिंत हुआ पड़ा है कि जैसे उसे गरीबी, बेरोजगारी, आरक्षण, अभाव इत्यादि से कुछ मतलब ही ना हो।
ऊपर की सीट के पाइप से टंगी झोली में पड़ा बच्चा दौड़ती रेल के हिचकोलों से झूलते हुए दुनिया से बेखबर होकर मस्ती से सो रहा है।
और पत्नी!
उसका तो कहना ही क्या।
पूरा पलंग न मिला तो पैरों को मोड़ कर और पति के सीने को तकिया बना कर ऐसे निश्चिंत पड़ी है जैसे कि उसका पति तीनों लोकों का स्वामी हो और वह उसके अंक में समा गयी हो।
हीरे जड़ित सोने का पलंग और उस पर बिछे मखमली गद्दे पर कोई महारानी भी इतनी चैन की नींद नहीं सो पाती होगी।
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तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है
अंधेरों से भी मिल रही रौशनी है
तेरा साथ है तो...
■ दाम्पत्य जीवन का प्यार, समर्पण और विश्वास भरा स्वर्ग ❤️
(यह फोटो एक पोस्ट से उठायी गयी है)

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