imageimage

image
3 سنوات - ترجم

विश्वभर में हिमाचल प्रदेश अपने सौंदर्य के लिए जाना जाता है. बर्फ से ढके पहाड़ और यहां की संपन्न संस्कृति प्रदेश की पहचान है. इसके अलावा हिमाचल प्रदेश एक अन्य कारण से भी प्रसिद्ध है और वह है यहां के भव्य और दिव्य मंदिर. विश्वभर में हिमाचल प्रदेश की पहचान देवभूमि के रूप में है. देवभूमि हिमाचल में ऐसे हजारों मंदिर हैं, जो अपने आप में रहस्य को समेटे हुए हैं. एक ऐसा ही रहस्यमयी शिव मंदिर चंबा का दवात महादेव मंदिर है. चंबा से में दवात नामक स्थान पर बना यह शिव मंदिर सभी शिव भक्तों की आस्था का केंद्र है. भगवान शिव के इस मंदिर पर भक्तों की अटूट आस्था है. कहा जाता है कि इस मंदिर को पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान बनाया था. अज्ञातवास के दौरान पांडव हिमालय के इस भाग में आए थे|

image
3 سنوات - ترجم

हिमाचल प्रदेश के मण्डी की रिवालसर झील की तस्वीर 1910 और 2023 की ....

image

image

हिमाचल प्रदेश के मण्डी की रिवालसर झील की तस्वीर 1910 और 2023 की ....

image

image

झलकारी बाई का जन्म 22 नवम्बर 1830 को झांसी के पास के भोजला गाँव में एक निर्धन कोली परिवार में हुआ था। झलकारी बाई के पिता का नाम सदोवर सिंह और माता का नाम जमुना देवी था। जब झलकारी बाई बहुत छोटी थीं तब उनकी माँ की मृत्यु के हो गयी थी, और उसके पिता ने उन्हें एक लड़के की तरह पाला था। उन्हें घुड़सवारी और हथियारों का प्रयोग करने में प्रशिक्षित किया गया था। उन दिनों की सामाजिक परिस्थितियों के कारण उन्हें कोई औपचारिक शिक्षा तो प्राप्त नहीं हो पाई, लेकिन उन्होनें खुद को एक अच्छे योद्धा के रूप में विकसित किया था। झलकारी बचपन से ही बहुत साहसी और दृढ़ प्रतिज्ञ बालिका थी। झलकारी घर के काम के अलावा पशुओं का रख-रखाव और जंगल से लकड़ी इकट्ठा करने का काम भी करती थीं। एक बार जंगल में उसकी मुठभेड़ एक तेंदुए से हो गयी थी और झलकारी ने अपनी कुल्हाड़ी से उस तेंदुआ को मार डाला था। एक अन्य अवसर पर जब डकैतों के एक गिरोह ने गाँव के एक व्यवसायी पर हमला किया तब झलकारी ने अपनी बहादुरी से उन्हें पीछे हटने को मजबूर कर दिया था।[3] उसकी इस बहादुरी से खुश होकर गाँव वालों ने उसका विवाह रानी लक्ष्मीबाई की सेना के एक सैनिक पूरन सिंह कोली से करवा दिया, पूरन भी बहुत बहादुर था और पूरी सेना उसकी बहादुरी का लोहा मानती थी। एक बार गौरी पूजा के अवसर पर झलकारी गाँव की अन्य महिलाओं के साथ महारानी को सम्मान देने झाँसी के किले में गयीं, वहाँ रानी लक्ष्मीबाई उन्हें देख कर अवाक रह गयी क्योंकि झलकारी बिल्कुल रानी लक्ष्मीबाई की तरह दिखतीं थीं (दोनो के रूप में आलौकिक समानता थी)। अन्य औरतों से झलकारी की बहादुरी के किस्से सुनकर रानी लक्ष्मीबाई बहुत प्रभावित हुईं। रानी ने झलकारी को दुर्गा सेना में शामिल करने का आदेश दिया। झलकारी ने यहाँ अन्य महिलाओं के साथ बंदूक चलाना, तोप चलाना और तलवारबाजी की प्रशिक्षण लिया। यह वह समय था जब झांसी की सेना को किसी भी ब्रिटिश दुस्साहस का सामना करने के लिए मजबूत बनाया जा रहा था।

image

image

वैधानिक चेतावनी 👻 यह गारंटी सिर्फ अदानी अंबानी को दी जा रही है।आम भारतीय जनता पर यह लागू नहीं होती।😆🤫🤫

image