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कोई भी रिश्ता जन्म से खूबसूरत नहीं होता हमें उसको खूबसूरत बनाना पड़ता है।

हम इस दुनिया में आए हैं तो एक बड़ी जिम्मेदारी हमारी यह भी है कि..... हम अपनी जिंदगी बेहतर बनाने के साथ-साथ

दूसरों की जिंदगी की बेहतरी के लिए भी थोड़ा काम करें...❤️

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केरल में 140 विधानसभा सीटों पर मतदान जारी है. इस बीच केरल के त्रिशूर जिले के वानियामपारा से मतदान के दिन एक दुखद घटना सामने आई है. यहां एक 62 वर्षीय बुजुर्ग व्यक्ति की वोट डालने के तुरंत बाद तबीयत बिगड़ गई और बाद में उनकी मौत हो गई. जानकारी के मुताबिक, विनोदन करीब एक घंटे से अधिक समय तक कतार में खड़े रहे. मतदान केंद्र से बाहर निकलते ही वे अचानक बेहोश होकर गिर पड़े. उन्हें नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

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Kartik Aaryan Overtakes SRK, Ranveer & Hrithik to Become India’s 3rd Most Followed Actor!😍💥
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लुधियाना में थाना डिवीजन नंबर-6 के तत्कालीन प्रभारी विवादों में आ गए हैं। चिकन शॉप के मालिक ने उन पर थाने में थर्ड डिग्री देने के आरोप लगाए हैं। उसने बताया कि एसएचओ अपने जूनियर मुलाजिमों के साथ दुकान पर आए और उसे थाने ले गए। वहां ले जाकर उसे नंगा कर प्राइवेट पार्ट में करंट लगाया। चिकन शॉप मालिक ने कहा कि थाने में सभी ने मिलकर उसको जमकर पीटा। यहां तक कि उसके सिर से पगड़ी तक उतार दी। फिर कई बार घसीटा गया। इसके बाद बड़ी मुश्किल से उसके परिजन आए और उन्होंने उसकी जमानत करवाई अब हालात ये हैं कि वह पांच दिन से बिस्तर पर पड़ा है और एक आंख से धुंधला दिख रहा है। परिवार के कहने पर उसने एसएचओ के खिलाफ सीनियर अधिकारियों के साथ-साथ पंजाब ह्यूमन राइट कमीशन को लिखित में शिकायत दी है। शिकायत मिलने के बाद अधिकारियों ने एसएचओ को लाइन हाजिर कर दिया है और इस मामले की जांच शुरू कर दी।

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फोन उनकी उंगलियों को "महसूस" करता है। वास्तव में, आपका स्मार्टफोन आपके स्पर्श को नहीं, बल्कि आपके भीतर बहने वाली बिजली (Electricity) को पहचानता है। पुराने समय के टचस्क्रीन (जो एटीएम या रेलवे स्टेशनों पर होते थे) दबाव पर काम करते थे, लेकिन आधुनिक फोन की स्क्रीन 'कैपेसिटिव' (Capacitive) तकनीक पर आधारित है।

यहाँ आपकी उंगलियों और स्क्रीन के बीच होने वाले उस 'इलेक्ट्रिक खेल' को विस्तार से समझाया गया है:

1. स्क्रीन के नीचे का 'बिजली का जाल'
हार्ड ग्लास की ऊपरी परत के ठीक नीचे तारों का एक बेहद बारीक और पारदर्शी जाल बिछा होता है।

इलेक्ट्रिक फील्ड: जब फोन ऑन होता है, तो इस जाल में लगातार बिजली दौड़ती है, जिससे स्क्रीन के ऊपर एक स्थिर इलेक्ट्रिक फील्ड (विद्युत क्षेत्र) बन जाता है।

इंसानी शरीर का रोल: हमारा शरीर 70% पानी और आयनों से बना है, जो बिजली के बहुत अच्छे सुचालक (Conductors) होते हैं।

2. 'कैपेसिटेंस' (Capacitance) में बदलाव
जैसे ही आप स्क्रीन को अपनी उंगली से छूते हैं, आपके शरीर की बिजली स्क्रीन के उस खास बिंदु (Point) से कुछ इलेक्ट्रॉन्स को अपनी ओर खींच लेती है।

डिस्टरबेंस: इससे उस जगह पर इलेक्ट्रिक फील्ड की ताकत अचानक गिर जाती है।

पहचान: फोन के सेंसर तुरंत जान लेते हैं कि किस 'X और Y' कोऑर्डिनेट पर बिजली कम हुई है। वे इस डेटा को प्रोसेसर के पास भेजते हैं, और फोन को पता चल जाता है कि आपने कहाँ क्लिक किया है।

3. दस्ताने या लकड़ी से क्यों नहीं चलता?
आपने गौर किया होगा कि साधारण दस्ताने पहनकर या पेंसिल की नोक से फोन चलाने पर वह काम नहीं करता:

इन्सुलेटर (Insulator): रबर, कपड़ा या लकड़ी बिजली के सुचालक नहीं होते। वे उंगली और स्क्रीन के बीच एक दीवार बन जाते हैं, जिससे शरीर का करंट स्क्रीन तक नहीं पहुँच पाता और इलेक्ट्रिक फील्ड में कोई बदलाव नहीं होता।

विशेष दस्ताने: मोबाइल के लिए आने वाले खास दस्तानों की उंगलियों में चांदी या तांबे के धागे बुने होते हैं, जो बिजली को स्क्रीन तक पहुँचाने का रास्ता बनाते हैं।

4. गीले हाथों से समस्या क्यों होती है?
जब स्क्रीन पर पानी की बूंदें गिर जाती हैं, तो टचस्क्रीन 'पागल' जैसा व्यवहार करने लगती है:

भ्रमित सेंसर: पानी भी बिजली का सुचालक है। स्क्रीन को लगता है कि पानी की हर बूंद एक 'उंगली' है। जब बहुत सारे बिंदुओं पर एक साथ बिजली का बदलाव होता है, तो फोन का प्रोसेसर भ्रमित हो जाता है कि असली क्लिक कहाँ हुआ है

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कर्नाटक में लैंग्वेज को लेकर चल रही बहस के बीच एक दिलचस्प बात निकलकर सामने आई है. ‘हिंदी थोपने’ की चर्चा अपनी जगह है, लेकिन स्कूलों के आंकड़े कुछ और कहानी कहते दिख रहे हैं. इस शैक्षणिक सत्र में राज्य बोर्ड के करीब 93 प्रतिशत स्टूडेंट्स ने तीसरी भाषा के रूप में हिंदी को चुना है. रिपोर्ट्स के मुताबिक इस साल लगभग 8.1 लाख छात्रों ने तीसरी भाषा का चयन किया. इनमें से 7.5 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने सामान्य पाठ्यक्रम के तहत हिंदी को चुना. इसके अलावा आदर्श विद्यालयों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के जरिए 4,778 छात्रों ने हिंदी पढ़ी. इस तरह कुल मिलाकर करीब 7.6 लाख छात्र हिंदी सीख रहे हैं.

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