image

3 yrs - Translate

इतिहासकार गौरीशंकर हीराचंद ओझा अपनी पुस्तक राजपूताने के इतिहास में लिखते हैं : महाराणा प्रताप का साथ तोमर, प्रतिहारों और सोलंकी राजपूतों ने भी दिया।
हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप जी की सेना में लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए कल्याण प्रतिहार, नागभट्ट प्रतिहार और मिहिरभोज प्रतिहार के वंशज हल्दीघाटी में विद्यमान रहे और अपनी प्राचीन सैन्य परंपरा का वहन किया

image

image

image

image

imageimage
3 yrs - Translate

मेवाड़ के महाराणा उदयसिंह जी द्वारा बसाई गई झीलों की नगरी - उदयपुर

image
3 yrs - Translate

7 पीढ़ियों तक लगातार बलिदान देने वाले बड़ी सादरी का झाला वंश, ऐसे अनेकों बलिदानी पुरुष इतिहास के पन्नों में खो गए, जिनकी वजह से आज ये सभ्यता जीवित है, उन सभी को नमन वंदन।
खानवा में राणा सांगा के साथ सर्वोच्च बलिदान देने वाले झाला अज्जाजी, 1535 में बहादुर शाह के समय बलिदान देने वाले सिहा जी झाला, 1568 में अकबर के समय त्याग करने वाले सुरतान जी झाला कि परंपरा में जन्मे महाराणा प्रताप के लिए हल्दीघाटी में त्याग करने वाले झाला मन्ना जी के बलिदान दिवस पर शत शत नमन।

image

image