म्यूजिक के अलावा गुलशन कुमार अपनी उदारता के लिए भी जाने जाते हैं। उन्होंने वैष्णो देवी में एक भंडारे की स्थापना की जो आज भी तीर्थयात्रियों के लिए भोजन उपलब्ध कराता है
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म्यूजिक के अलावा गुलशन कुमार अपनी उदारता के लिए भी जाने जाते हैं। उन्होंने वैष्णो देवी में एक भंडारे की स्थापना की जो आज भी तीर्थयात्रियों के लिए भोजन उपलब्ध कराता है
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इस छात्रा का नाम "मिश्क़ात नूर" है। मिश्क़ात नूर यूपी हाई स्कूल की सेकंड टॉपर हैं। जिन्होंने (587/60 अंक हासिल किया है। मिश्क़ात नूर कहती हैं कि उनके नम्बर और आ सकते थे, एक ग़लती की वजह से 2 नम्बर कम हो गए।
मिश्क़ात नूर अपनी शुरुआती तालीम मदरसे में हासिल की हैं। मिश्क़ात के अध्यापकों को यक़ीन था कि वो टॉप करेंगी। उनके नाम का मतलब है "चिराग़ का नूर"..अल्लाह करे इस चिराग़ की रोशनी सारी दुनिया में फैले।
बहन मिश्क़ात नूर को मुबारकबाद।
यूपी बोर्ड 12वीं के इम्तिहान में ग़ाज़ियाबाद ज़िला टॉपर अमान सैफ़ी ने 95.60% अंकों के साथ ज़िला टॉप किया और उसके साथ ही पूरे प्रदेश में 10वां स्थान हासिल किया।
ये टॉपर स्टुडेंट उसी डासना का रहने वाला है जहां पिछले साल किसी मंदिर में एक मुस्लिम बच्चे को पानी पीने की वजह से मारा गया था।
अमान सैफी के अलावा ज़िला गाज़ियाबाद से 12वीं की टॉप 10 टॉपर्स लिस्ट में...
रिहान तीसरा मक़ाम, अरमान 9वां और मुहम्मद आसिफ़ ख़ान ने 10वां मक़ाम हासिल किया है।
इन स्टूडेंट्स को बहुत बहुत मुबारकबाद और इनके इलावह टॉप 10 टॉपर्स के उन सारे स्टूडेंट्स को भी मुबारकबाद जिनका नाम छूट गया है।
यह तस्वीर सऊदी अरब की आर्मी ऑफ़िसर ख़ातून की है जो सूडान में चल रही ख़ानाजंगी में फंसे लोगों को बा-हिफ़ाज़त सऊदी अरब (जेद्दाह) लाए जाने के दौरान ली गयी है। सोशल मीडिया पर वायरल इस तस्वीर में दावा किया गया कि आर्मी ऑफ़िसर की गोद में जो बच्चा है वो हिंदुस्तानी है जिसे बा-हिफ़ाज़त सऊदी अरब (जेद्दाह आर्मी बेस) लाया गया है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में बच्चे को पाकिस्तानी बताया जा रहा है। बच्चा कहीं का भी हो तस्वीर बेहद ख़ूबसूरत है। सूडान में हालात बहुत बदतरीन है। तख़्त के लिए सूडान के दो इदारे आमने सामने हैं और इस ख़ानाजंगी में वहां की ग़रीब अवाम पिस रही है। अल्लाह वहां की अवाम की हिफ़ाज़त फ़रमाए।
पिछले कई रोज़ से यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। बिना किसी तहक़ीक़ के लाइक कॉमेंट की भूक में जज़्बात से लबरेज़ कैप्शन लिखकर धड़ल्ले से लोग पोस्ट कर रहे हैं। जबकि हक़ीक़त फैलाए जा रहे प्रोपेगेंड से बिल्कुल मुख़्तलिफ़ है। यह तस्वीर न पाकिस्तान की है और न ही इस तस्वीर से ज़िना (रेप) जैसी कोई कहानी जुड़ी है। यह तस्वीर तेलंगाना (हैदराबाद) के क़ब्रिस्तान की है जो दरब जंग कॉलोनी के क़रीब में मौजूद है। यह क़ब्र एक सत्तर साला ज़ईफ़ ख़ातून की है जिनकी तदफ़ीन के तक़रीबन दो महीने बाद उनके बेटे ने क़ब्र पर ग्रील लगवा दी थी।
क़ब्रिस्तान के क़रीब मौजूद मस्जिद-ए-सालार के मुअज्जिन मुख़्तार साहब का कहना है। यह तस्वीर तक़रीबन दो साल पुरानी है। यह क़ब्र क़ब्रिस्तान के गेट के बिल्कुल सामने थी। जिस भी परिवार के लोग क़ब्रिस्तान में अपनों को दफ़्न करते हैं वो सालों साल उनकी क़ब्र पर फ़ातिहा पढ़ने आते हैं। वो नहीं चाहते उनके अपनों की क़ब्र की पहचान ख़त्म हो या उनके अपनों की क़ब्र पर दुबारह कोई क़ब्र खुदे। यही वजह थी कि उस सत्तर साल की बूढ़ी ख़ातून का बेटा अपनी वालिदा की क़ब्र की पहचान को बरक़रार रखने के लिए क़ब्र पर ग्रील लगवा दिया था ताकि दुबारह उसकी वालिदा की क़ब्र पर कोई दूसरी क़ब्र न खुदे।
झूठी और मनगढ़ंत स्टोरी बनाकर पोस्ट करने वाले मान नहीं सकते हैं। न इनसे सब्र होता है और न ही यह लोग तहक़ीक़ करने या हक़ीक़त जानने की कोशिश करते हैं। इन लंपटों की वजह से यह ख़बर नेशनल मीडिया में चल रही है। इस दअवे के साथ कि पाकिस्तान में ख़्वातीन की लाश से इस्मत-दरी के डर से क़ब्र पर ग्रील लगाया जा रहा है। इस्लामोफोबिक मीडिया के साथ साथ इस्लामोफोबिक कोढ़ की मरीज़ पूरी एक लॉबी काम पर लग गई है।