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९९.९९% जीव ..जीव ही पैदा होते है और जीव के तरह मर भी जाते है .., कुछ लोग मनुष्य बन पाते है और उसमें से कुछ मनुष्य से भगवान बन जाते है जिनकी संख्या बहुत ही कम होती है। श्रीमद्भगवद्गीता श्री हरि योगेश्वर के द्वारा प्रत्येक जीव के लिये प्रसाद है, जीव से भगवान तक की यात्रा का साधन है। मै अपने अनुभव से कहूँ तो यह अमृत है, इसका एक बूंद भी हम ले पाये तो यह जीवन सार्थक है।
आज गीता जयंती है, भारत के प्रधानमंत्री महोदय ने भी इस पर सभी देशवासियों को शुभकामनाएं दी है, लेकिन सूबह से मै देख रहा हूँ कि इस पटल पर आज के इस महत्त्वपूर्ण दिवस को लेकर भयंकर उदासीनता है ..यह अपने आप में बहुत बड़ा अशुभ संकेत भी है कि लोग गीता को लेकर इतने उदासीन क्यों है, जबकि मै देखता हूँ कि यहां दिनरात राम नाम के जयकारे लगाने वाले, विश्वगुरु बनने की कामना वाले भरे पड़े है, क्या बिना गीता के यह सबकुछ संभव है..?
कभी नहीं ।।।
मै बहुत से धर्म गुरुओं , संप्रदायों के महापुरुषों आज के विद्वानों को यहां वहां सुनते रहता हूँ ..वो सब जो कुछ भी बोलते है, कहते है, उपदेश करते है ..वो सब गीता मे है या कहेंं वो गीता को ही भजते रहते है।
और मै गीता पर क्या कहूँ ..मै वैसे भी अनपढ़ अज्ञानी हूँ , लेकिन माता पिता के आशीर्वाद से सौभाग्यशाली हूँ कि भगवान योगेश्वर की अनन्य कृपा गीता माँ के रुप में सदैव बनी रहती है और इस युद्ध में श्री योगेश्वर ही हमारे सारथी है।
आप सबको भी भले ही आप किसी भी मत संप्रदाय के है ,श्रीमद्भगवद्गीता का वाचन अवश्य करना चाहिए, और और कही गई बातों पर चींतन मनन करते रहना चाहिए ताकि वो आपके अनुभव में उतर जाये और आप यह महसूस कर सकें कि यह जीवन कितना मूल्यवान और आनंद से भरा हूआ है, और अपने बच्चों को भी पढ़ाते रहे ताकि वो जीवन का मूल्य , जीवन युद्ध शुरु होने से पहले ही समझ जाये, उनको बोध होने की संभावना उपलब्ध हो जाये, एक माता पिता के रुप में इससे बड़ा हम अपने बच्चों के लिये कुछ भी नहीं कर सकते.।।।
आप सबको प्रबोधिनी एकादशी "गीता जयंती" की अनंत शुभकामनाएं , श्रीहरि आप सबके सारथी रहें ऐसी मै श्रीहरि से प्रार्थना करता हूँ 🙏🙏
(मित्रगण पुछते रहते है कि किसका भाष्य पढ़े, तो मेरा निज अनुभव है कि परमपूज्य स्वामी रामसुखदासजी का भाष्य साधक संजीवनी और उसी का छोटा संस्करण गीता प्रबोधिनी सबसे उत्तम् है, इसे आप गीता प्रेस मंगवा भी सकते है, यह पुस्तक और गीता प्रेस के और भी ग्रंथ अब गीताप्रेस के एक ऐप गीता सेवा पर भी उपलब्ध है)
जय श्रीहरि 💐💐
९९.९९% जीव ..जीव ही पैदा होते है और जीव के तरह मर भी जाते है .., कुछ लोग मनुष्य बन पाते है और उसमें से कुछ मनुष्य से भगवान बन जाते है जिनकी संख्या बहुत ही कम होती है। श्रीमद्भगवद्गीता श्री हरि योगेश्वर के द्वारा प्रत्येक जीव के लिये प्रसाद है, जीव से भगवान तक की यात्रा का साधन है। मै अपने अनुभव से कहूँ तो यह अमृत है, इसका एक बूंद भी हम ले पाये तो यह जीवन सार्थक है।
आज गीता जयंती है, भारत के प्रधानमंत्री महोदय ने भी इस पर सभी देशवासियों को शुभकामनाएं दी है, लेकिन सूबह से मै देख रहा हूँ कि इस पटल पर आज के इस महत्त्वपूर्ण दिवस को लेकर भयंकर उदासीनता है ..यह अपने आप में बहुत बड़ा अशुभ संकेत भी है कि लोग गीता को लेकर इतने उदासीन क्यों है, जबकि मै देखता हूँ कि यहां दिनरात राम नाम के जयकारे लगाने वाले, विश्वगुरु बनने की कामना वाले भरे पड़े है, क्या बिना गीता के यह सबकुछ संभव है..?
कभी नहीं ।।।
मै बहुत से धर्म गुरुओं , संप्रदायों के महापुरुषों आज के विद्वानों को यहां वहां सुनते रहता हूँ ..वो सब जो कुछ भी बोलते है, कहते है, उपदेश करते है ..वो सब गीता मे है या कहेंं वो गीता को ही भजते रहते है।
और मै गीता पर क्या कहूँ ..मै वैसे भी अनपढ़ अज्ञानी हूँ , लेकिन माता पिता के आशीर्वाद से सौभाग्यशाली हूँ कि भगवान योगेश्वर की अनन्य कृपा गीता माँ के रुप में सदैव बनी रहती है और इस युद्ध में श्री योगेश्वर ही हमारे सारथी है।
आप सबको भी भले ही आप किसी भी मत संप्रदाय के है ,श्रीमद्भगवद्गीता का वाचन अवश्य करना चाहिए, और और कही गई बातों पर चींतन मनन करते रहना चाहिए ताकि वो आपके अनुभव में उतर जाये और आप यह महसूस कर सकें कि यह जीवन कितना मूल्यवान और आनंद से भरा हूआ है, और अपने बच्चों को भी पढ़ाते रहे ताकि वो जीवन का मूल्य , जीवन युद्ध शुरु होने से पहले ही समझ जाये, उनको बोध होने की संभावना उपलब्ध हो जाये, एक माता पिता के रुप में इससे बड़ा हम अपने बच्चों के लिये कुछ भी नहीं कर सकते.।।।
आप सबको प्रबोधिनी एकादशी "गीता जयंती" की अनंत शुभकामनाएं , श्रीहरि आप सबके सारथी रहें ऐसी मै श्रीहरि से प्रार्थना करता हूँ 🙏🙏
(मित्रगण पुछते रहते है कि किसका भाष्य पढ़े, तो मेरा निज अनुभव है कि परमपूज्य स्वामी रामसुखदासजी का भाष्य साधक संजीवनी और उसी का छोटा संस्करण गीता प्रबोधिनी सबसे उत्तम् है, इसे आप गीता प्रेस मंगवा भी सकते है, यह पुस्तक और गीता प्रेस के और भी ग्रंथ अब गीताप्रेस के एक ऐप गीता सेवा पर भी उपलब्ध है)
जय श्रीहरि 💐💐
९९.९९% जीव ..जीव ही पैदा होते है और जीव के तरह मर भी जाते है .., कुछ लोग मनुष्य बन पाते है और उसमें से कुछ मनुष्य से भगवान बन जाते है जिनकी संख्या बहुत ही कम होती है। श्रीमद्भगवद्गीता श्री हरि योगेश्वर के द्वारा प्रत्येक जीव के लिये प्रसाद है, जीव से भगवान तक की यात्रा का साधन है। मै अपने अनुभव से कहूँ तो यह अमृत है, इसका एक बूंद भी हम ले पाये तो यह जीवन सार्थक है।
आज गीता जयंती है, भारत के प्रधानमंत्री महोदय ने भी इस पर सभी देशवासियों को शुभकामनाएं दी है, लेकिन सूबह से मै देख रहा हूँ कि इस पटल पर आज के इस महत्त्वपूर्ण दिवस को लेकर भयंकर उदासीनता है ..यह अपने आप में बहुत बड़ा अशुभ संकेत भी है कि लोग गीता को लेकर इतने उदासीन क्यों है, जबकि मै देखता हूँ कि यहां दिनरात राम नाम के जयकारे लगाने वाले, विश्वगुरु बनने की कामना वाले भरे पड़े है, क्या बिना गीता के यह सबकुछ संभव है..?
कभी नहीं ।।।
मै बहुत से धर्म गुरुओं , संप्रदायों के महापुरुषों आज के विद्वानों को यहां वहां सुनते रहता हूँ ..वो सब जो कुछ भी बोलते है, कहते है, उपदेश करते है ..वो सब गीता मे है या कहेंं वो गीता को ही भजते रहते है।
और मै गीता पर क्या कहूँ ..मै वैसे भी अनपढ़ अज्ञानी हूँ , लेकिन माता पिता के आशीर्वाद से सौभाग्यशाली हूँ कि भगवान योगेश्वर की अनन्य कृपा गीता माँ के रुप में सदैव बनी रहती है और इस युद्ध में श्री योगेश्वर ही हमारे सारथी है।
आप सबको भी भले ही आप किसी भी मत संप्रदाय के है ,श्रीमद्भगवद्गीता का वाचन अवश्य करना चाहिए, और और कही गई बातों पर चींतन मनन करते रहना चाहिए ताकि वो आपके अनुभव में उतर जाये और आप यह महसूस कर सकें कि यह जीवन कितना मूल्यवान और आनंद से भरा हूआ है, और अपने बच्चों को भी पढ़ाते रहे ताकि वो जीवन का मूल्य , जीवन युद्ध शुरु होने से पहले ही समझ जाये, उनको बोध होने की संभावना उपलब्ध हो जाये, एक माता पिता के रुप में इससे बड़ा हम अपने बच्चों के लिये कुछ भी नहीं कर सकते.।।।
आप सबको प्रबोधिनी एकादशी "गीता जयंती" की अनंत शुभकामनाएं , श्रीहरि आप सबके सारथी रहें ऐसी मै श्रीहरि से प्रार्थना करता हूँ 🙏🙏
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जय श्रीहरि 💐💐

मित्रों आप सबके के लिये एक सुचना है कि मैने श्रीमद्भगवद्गीता को समर्पित श्रीमद्भगवद्गीता संवाद के नाम से एक पेज बनाया है, जिसपर मै प्रतिदिन गीता के श्लोकों को पोस्ट करता हूँ। यह पेज मैने बनाया तो एकाध वर्ष पहले था लेकिन अब इसपर पोस्ट करना शुरू किया है। इस पेज पर इस समय श्रद्धेय स्वामी श्री रामसुखदासजी द्वारा गीता पर भाष्य साधक संजीवनी के श्लोकों को पोस्ट कर रहा हूँ, अभी आज प्रथम अध्याय का सातवां श्लोक पोस्ट किया है।
मेरा प्रयास है कि मै अपने क्षमतानुसार जहां तक संभव हों गीता को इस पटल के माध्यम से लोगों तक पहूंचा सकूं, फिलहाल तो केवल पोस्ट ही है, आगे वीडियो वगैरह के माध्यम से जितना गीता का प्रचार प्रसार हो सकें , उतना ही शुभ होगा। यदि इन प्रयासों से एक भी व्यक्ति गीता के अध्ययन के लिये प्रेरित हो गया तो फिर मेरा यह सब प्रयास सार्थक है।।
एक बात और कहना चाहूंगा कि गीता को रटिये मत ..इसकों बूँद बूँद पीजिए ..और पीते ही जाईये ..इसका एक बू्ँद भी यदि हम ले पाये तो फिर हमारी यह जीवन यात्रा एकदम सरल और आनंद से भर जायेगी इसका मै विश्वास दिलाता हूँ।
मेरा यह प्रयास श्रीयोगेश्वर के श्री चरणों में समर्पित
🙏🙏
पेज का लिंक कमेंट बाक्स में है,
आप की इच्छा हो तो पेज फालो कर सकतें है ।
आज काशी तमिल समागम मे जाने का अवसर मिला। वैसे तो काशी का स्वभाव ही है उत्सव, यहां उत्सव कभी भी नहीं बंद होता ..लेकिन काशी तमिल समागम मोदी जी के द्वारा एक अद्वितीय एवं सराहनीय प्रयास है, काशी अपने में एक भारत को समेटे हूये है , यहां भारत के प्रत्येक क्षेत्र संस्कृति के लोग है ..और उत्तर दक्षिण के मेल का अनुपम प्रयास है।
आज काशी तमिल समागम मे जाने का अवसर मिला। वैसे तो काशी का स्वभाव ही है उत्सव, यहां उत्सव कभी भी नहीं बंद होता ..लेकिन काशी तमिल समागम मोदी जी के द्वारा एक अद्वितीय एवं सराहनीय प्रयास है, काशी अपने में एक भारत को समेटे हूये है , यहां भारत के प्रत्येक क्षेत्र संस्कृति के लोग है ..और उत्तर दक्षिण के मेल का अनुपम प्रयास है।
आज काशी तमिल समागम मे जाने का अवसर मिला। वैसे तो काशी का स्वभाव ही है उत्सव, यहां उत्सव कभी भी नहीं बंद होता ..लेकिन काशी तमिल समागम मोदी जी के द्वारा एक अद्वितीय एवं सराहनीय प्रयास है, काशी अपने में एक भारत को समेटे हूये है , यहां भारत के प्रत्येक क्षेत्र संस्कृति के लोग है ..और उत्तर दक्षिण के मेल का अनुपम प्रयास है।
आज काशी तमिल समागम मे जाने का अवसर मिला। वैसे तो काशी का स्वभाव ही है उत्सव, यहां उत्सव कभी भी नहीं बंद होता ..लेकिन काशी तमिल समागम मोदी जी के द्वारा एक अद्वितीय एवं सराहनीय प्रयास है, काशी अपने में एक भारत को समेटे हूये है , यहां भारत के प्रत्येक क्षेत्र संस्कृति के लोग है ..और उत्तर दक्षिण के मेल का अनुपम प्रयास है।



देखिये ईहै है...
मोदी जी ने एंबुलेंस को पास दिया तो ..वाह वाह ..और हमारे लतफत गांधी ने दिया तो प्रोपेगैंडा है, दिखावा है!!!
मोदी जी सामान्य नागरिक की तरह वोट दिये तो सोशल मीडिया पर चर्चा ए आम हो गया ....
और ऊ बेचारा फेविक्विक का बाल्टी लेकर भारत को जोड़ रहा है, समय समय माहौल बोरियत वाला न हो तो स्टेज पर आकर मुफ्त मनोरंजन भी करवा रहा है ..तो उसका कोई चर्चै नहीं है ...!!
यह देश बदल गया ..
बदल गया यह देश दोस्तों बदल गया यह देश ...।।