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IIT दिल्ली के 24 वर्षीय ग्रेजुएट चिराग मदान ने कॉर्पोरेट जगत के वर्क कल्चर के खिलाफ आवाज उठाते हुए अपनी 17 लाख रुपये सालाना की बैंकिंग नौकरी छोड़ दी है। चिराग ने साझा किया कि जिस नौकरी को लोग सपना मानते हैं, वहां हकीकत में सिर्फ 10-15 मिनट का लंच ब्रेक मिलता था और बीमारी की छुट्टी के लिए भी अपमानजनक सफाई देनी पड़ती थी। सुबह 9 से शाम 7 बजे तक का काम और 10 करोड़ रुपये के असंभव टारगेट ने उनकी मानसिक शांति छीन ली थी। चिराग का यह फैसला अब सोशल मीडिया पर 'वर्क-लाइफ बैलेंस' को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ चुका है। यह कहानी उन लाखों युवाओं के लिए एक संदेश है जो मोटी सैलरी के बदले अपनी सेहत और सुकून का सौदा कर रहे हैं। चिराग ने साबित कर दिया कि आत्म-सम्मान और मानसिक स्वास्थ्य किसी भी हाई-पेइंग जॉब से कहीं अधिक मूल्यवान हैं।
भारत-चीन सीमा के पास अपने दौरे के दौरान Anil Chauhan ने देश की सुरक्षा और भविष्य की युद्ध रणनीति को लेकर बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है “अगले सिंदूर” की तैयारी का, यानी आने वाले युद्ध पारंपरिक नहीं बल्कि आधुनिक और मल्टी-डोमेन होंगे।
सीडीएस ने बताया कि Operation Sindoor एक ऐसा ऑपरेशन था, जिसमें जल, थल, वायु के साथ-साथ साइबर और स्पेस जैसे नए मोर्चों पर भी एक साथ काम किया गया। यही भविष्य की लड़ाई का तरीका होगा, जहां टेक्नोलॉजी और तेज़ फैसले सबसे बड़ी ताकत बनेंगे।
Harsil और Mana Village जैसे सीमावर्ती इलाकों के दौरे के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि सेना को अब 24 घंटे और 365 दिन हर स्थिति के लिए तैयार रहना होगा। बदलती जियो-पॉलिटिक्स और नई चुनौतियों को देखते हुए तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और इंटीग्रेशन बेहद जरूरी है।
उन्होंने “थियेटर कमांड” को भविष्य की जरूरत बताते हुए कहा कि इससे सेना की ताकत और प्रतिक्रिया क्षमता और मजबूत होगी। साथ ही सीमांत गांवों को पर्यटन और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना पर भी जोर दिया, ताकि आम लोग भी देश की सीमाओं और सैनिकों के योगदान को समझ सकें।
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