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"लियोनार्दो द विंची" एक बहुचर्चित नाम, लेकिन हम उनके बारे में कितना जानते हैं? मेरी तरह ही अधिकांश लोग लियोनार्दो के बारे में इतना ही जानते हैं कि उन्होंने एक विश्व प्रसिद्ध पेंटिंग "मोनालिसा" बनाई है।
लेकिन ये विनोद कुमार मिश्र द्वारा लियोनार्दो की जीवानी पढ़ने के बाद पता चलता है कि लियोनार्दो एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी एक अद्भुत व्यक्ति थे। वह चित्रकार के साथ मूर्तिकार, वैज्ञानिक, यांत्रिक, गणितज्ञ, आर्किटेक्ट, दार्शनिक भी थे। जो सुनने में एक काल्पनिक व्यक्ति की भांति लगता है लेकिन लियोनार्दो नें अपने जीवनकाल में हर क्षण इन तमाम क्षेत्रों में अपना योगदान देने में ही व्यतीत किया।
युद्ध का विरोधी होने के बावजूद उन्हें राजा के आज्ञा अनुसार काफ़ी सारे युद्ध उपकरण इजाद करने पड़े। लियोनार्दो नें कई वैज्ञानिक उपकारणों की कल्पना की, विचार का एक बीज बोया जो आगे चलकर अथक प्रयासों के बाद हकीकत में बन पाया। टेबल लैंप से लेकर, आराम कुर्सी व पन्नडूब्बी तक के आइडिया इनके नोट्स में मिले।
इनके लिखे नोट्स इस कदर बिखेर की कई वर्षों-वर्षो तक इनके वैज्ञानिक प्रयासों का असल रूप आम जनमानस तक नहीं पंहुँच पाया। नोट्स के कुछ हिस्से, इटली के पास, कुछ फ़्रांस और कुछ इंग्लैंड के बाद.. और न जाने कितना हिस्सा कबाड़ी में खो गया। कुछ वर्षों पूर्व इनका एक नोट्स माइक्रोसॉफ्ट के मालिक बिल गेट्स नें करोङो में खरीदा, वो भी कम्प्यूटर पे लियोनार्दो के प्रयास का शोध करने के लिए।
किताब विश्व प्रसिद्ध पेंटिंग मोनालिसा के बारे में भी जानकारी देती है। उस जामने में मोनालिसा की पेंटिंग आकर्षक होने के साथ क्रन्तिकारी भी थी। क्रन्तिकारी इसलिए कि उस समय गंभीर मुद्रा में ही पेंटिंग बनाई जाती थी, और मोनालिसा की हल्की मुस्कान इस क्षेत्र में एक क्रांति ले के आई। लेकिन मोनालिसा थी कौन? कुछ लोग कहते की वह राजा की पत्नी है, कुछ कहते की वह लियोनार्दो की प्रेमिका है तो कुछ कहते कि नकली बाल लगाए वह लियोनार्दो ही है।
बात इस पर भी हुई कि कैसे लियोनार्दो की अन्य पेंटिंग जो मशहूर हैं, वे कैसे बनी और कँहा हैं.. और पेंटिंगो में समयानुसार बदलाव कैसे होते रहे। जैसे ओरिजिनल पेंटिंग में मोनालिसा अपने खिड़की पर बैठी है और उसके दोनों तरफ खिड़कियों के खम्भे हैं जो मौजूदा पेंटिंग में देखने को नहीं मिलते क्योंकि वह पेंटिंग साइड से काटकर छोटी कर दी गई।
बहरहाल इस पुस्तक को लेखक नें बड़े ही रोचकता से संजोया है। लेखक नें लियोनार्दो के जन्म से उसकी मृत्यु और उनके कार्यों का वर्णन इस तरीके से किया है कि पाठक उसमें रमता जाएगा।
श्मीर राज्य के सिंहराज लोहार वंश के राजा की पुत्री लोहार राजवंश की.शासक जिन्होंने महमूद गजनवी को कश्मीर मे दो दो बार हराया ही नही बल्कि भारत मे प्रवेश करने के लिए गजनवी के साहस को चकनाचूर कर उसे रास्ता बदलने को मजबूर करने वाली कश्मीर की कारामाती महारानी दिददा के आज जयन्ती अवसर पर गर्वान्वित हृदय से विनम्र श्रद्धांजलि,नमन वंदन।
भारतीय कुश्ती की इस जगहंसाई से किसको क्या मिला?
बुधवार को शुरू हुआ दंगल शुक्रवार की रात हुआ समाप्त
खेलपथ संवाद
नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर में जो हुआ उससे किसको क्या मिला इसका पता तो भविष्य में चलेगा लेकिन इससे जो जगहंसाई हुई उसकी कल्पना समझ से परे है। पहलवानों और भारतीय कुश्ती संघ के इस दंगल से यह बात तो सिद्ध हो ही गई कि अब खिलाड़ी खेलनहारों की तानाशाही कतई बर्दाश्त नहीं करने वाले। इस दंगल को हरियाणा बनाम उत्तर प्रदेश से जोड़ने की जो कोशिशें हुईं इससे भविष्य में पहलवानों का ही नुकसान हो सकता है।