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ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🙏
वरुथिनी एकादशी का महत्व हिंदू धर्म में अत्यधिक माना जाता है, इस दिन का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इसे करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।
वरूथिनी एकादशी पर भगवान मधुसूदन की पूजा की जाती है, इस दिन भगवान नारायण के वराह अवतार की पूजा भी किए जाने का विधान है।
शास्त्रों में वरूथिनी एकादशी के व्रत को अन्नदान तथा कन्यादान दोनों के समान फलों की प्राप्ति होने वाला कहा गया है।
बैसाखी का पर्व सिख धर्म के अनुयायियों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है, जो पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है।
- सिख इतिहास में बैसाखी का दिन विशेष है, क्योंकि 13 अप्रैल 1699 को सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना की थी।
- कृषि के लिए विशेष महत्व: किसानों के लिए यह समय नई फसल की खुशी का है, जब वे अपनी मेहनत का फल पाकर प्रसन्न होते हैं।
- नववर्ष का आगमन: यह पर्व सौर नववर्ष की शुरुआत का भी संकेत देता है, जिसे देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है।
असम में इस पर्व को बिहू कहा जाता है, इस दौरान यहां फसल काटकर इसे मनाया जाता है, बंगाल में भी इसे पोइला बैसाख कहते हैं।
मेष संक्राति के दौरान पर्वतीय इलाकों में भी मेलों का आयोजन होता है व देवी पूजा करने का रिवाज है, इस दिन को सौर नववर्ष भी कहा जाता है।
आज महाराजपुर विधान सभा क्षेत्र के सम्मानित कार्यकर्ताओं के बीच उपस्थित होकर ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान’ को संबोधित किया।
दो दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग के माध्यम से आयोजित यह कार्यक्रम कार्यकर्ताओं के वैचारिक आधार और कार्यकुशलता को सुदृढ़ करने का सशक्त माध्यम है। ‘एकात्म मानववाद’ की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने तथा संगठन की रीति-नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने में यह अभियान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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