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ईरान की अर्थव्यवस्था क्यों हांफ रही है? 1 डॉलर = 14 लाख रियाल की खौफनाक हकीकत
ईरान की करेंसी रियाल आज दुनिया की सबसे कमजोर मुद्राओं में गिनी जा रही है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अब एक डॉलर के लिए 14 लाख रियाल देने पड़ते हैं। यह सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि ईरान की आर्थिक तबाही की कहानी है।
इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध, राजनीतिक अस्थिरता और लगातार बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। अमेरिका और पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों ने ईरान के तेल निर्यात को लगभग ठप कर दिया है—और तेल ही उसका सबसे बड़ा कमाई का स्रोत था।
डॉलर की कमी, विदेशी निवेश का खत्म होना और व्यापार पर रोक ने देश को अंदर से खोखला कर दिया है। लोग अपनी बचत को रियाल में रखने से डर रहे हैं। जैसे ही डॉलर मिलता है, लोग तुरंत उसे खरीद लेते हैं—जिससे रियाल और गिरता जाता है।
न्यूक्लियर समझौते के टूटने के बाद स्थिति और बिगड़ गई। संयुक्त राष्ट्र के नए प्रतिबंधों ने विदेशी संपत्तियों को फ्रीज कर दिया, हथियार सौदे रोके और मिसाइल कार्यक्रम पर नई पाबंदियां लगा दीं।