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शिवलिंग का वीडियो शेयर करते ही रुका हुआ काम हुआ पूरा

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Types of SEO: On-Page, Off-Page & Technical

Types of SEO play a major role in website ranking and online visibility. This article explores on-page SEO, off-page SEO, technical SEO, local SEO, and content SEO in detail. Learn how these SEO strategies work together to improve search engine rankings, enhance user experience, and drive organic traffic to your website. Visit us: https://dizimods.com/types-of-seo/

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What Are the Different Types of SEO | Dizimods
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What Are the Different Types of SEO | Dizimods

A complete guide to the different types of SEO. Discover on-page, off-page, technical and local SEO strategies to grow your business online.
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नाजायज संबंधों को छुपाने के लिए एक विवाहिता द्वारा अपने ही बेटे की हत्या करने के मामले में ग्वालियर जिला न्यायलय ने कलयुगी मां को उम्र कैद की सजा सुनाई है. कोर्ट ने पांच वर्षीय बेटे की हत्यारी मां को दोषी मानते हुए आजीवन जेल की सजा का फैसला सुनाया

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वह सिर्फ एक नायिका नहीं थीं, बल्कि भारत का गौरव थीं।
2016 में इसी दिन, भारत की बहादुर बेटी, कैप्टन कनिका भारद्वाज मैम, पंजाब के खन्ना के पास अलूद गांव के नजदीक एक दुखद सड़क दुर्घटना में देहांत हो गईं।
वह मात्र 32 वर्ष की थीं।
उनकी पुण्यतिथि पर, मैं कैप्टन कनिका भारद्वाज मैम की सेवा और बलिदान को गहरी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
बहादुर परिवार के प्रति हार्दिक संवेदना।
जय हिंद।

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संगम पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी के साथ जो हुआ, उसकी आंखो देखी।
मैं उस वक्त संगम पर ही मौजूद था। शंकराचार्य अपने करीब 100 भक्तों-साधुओं-शिष्यों के साथ पुल नंबर दो के जरिए 9 बजे सुबह संगम की तरफ बढ़े। ये पुल बंद था। लेकिन शिष्यों ने बाबा के लिए खुलवा दिया। संगम पर जब पहुंचे तो हर तरफ स्वागत वगैरह हो रहा था।
इसके बाद बाबा की पालकी आगे बढ़ी। वह संगम की तरफ जाना चाहते थे, पुलिस कह रही थी संगम पुलिस चौकी के पास पालकी रोक दीजिए, यहां से पैदल चले जाइए। आगे भीड़ है। दोनों ही जगह में महज 50 मीटर की दूरी रही होगी। यही विवाद की वजह बन गया।
बाबा के समर्थक अड़ गए कि हमें आगे जाने दिया जाए। इसी बीच उनकी बहस शुरू हो गई। बहस धक्का-मुक्की में बदल गई। पुलिस ने एक-एक करके शिष्यों और साधुओं को पकड़ा और उन्हें खींचते हुए संगम पुलिस चौकी तक ले गई। एक शिष्य को तो धक्का देकर गिराया, बाल पकड़कर खींचे और बुरी तरह पीट दिया।
इसके बाद कई और को पकड़ा और ले गए। बाबा अकेले हो गए। बाबा के आसपास पुलिस, आरएएफ और सीएसएफ का घेरा बना दिया गया। 3 घंटे तक बहस चली। बाबा अड़े रहे कि हमारे लोगों को छोड़ा जाए, हमें इज्जत के साथ संगम में स्नान करवाया जाय, इसके बाद ही वापस जाएंगे।
पुलिस नरम हुई, लोगों को छोड़ा गया, पालकी आगे बढ़ी, लेकिन बात वही। पुलिस ने संगम की तरफ जाने नहीं दिया। फिर से धक्का मुक्की। बाबा के सभी लोगों को फिर से खींचकर चौकी के अंदर बंद कर दिया गया।
बाबा की पालकी को कुछ लोग धक्का मारते हुए तेजी से संगम से करीब 500 मीटर दूर तक ले गए। उनका छत्रप टूट गया। किसी शंकराचार्य का यही छत्रप सबसे अहम माना जाता है। जो लोग धक्का दे रहे थे, शंकराचार्य उनसे बार-बार पूछ रहे थे कि तुम लोग कौन हो? किसी ने कुछ नहीं बताया। समर्थक कहते हैं- वो सभी सादी वर्दी में प्रशासन के ही लोग थे।
बाबा को अक्षय वट पर अकेले छोड़ दिया गया। उन्हें बिना नहाए वापस जाना पड़ा। उनके समर्थकों को पुलिस गाड़ी में भरकर उनके आश्रम छोड़ आई।
सही-गलत का फैसला आप करिए। मुझे बस इतना लगता है कि हिन्दू धर्म के इतने बड़े धर्मगुरू के साथ यह नहीं होना चाहिए था। कई और भी बातें थी, जिन्हें नहीं लिखा-दिखाया जा सकता है।
:- राजेश साहू ( पत्रकार)
नोट :- ये शब्द पत्रकार राजेश साहू के है जो खुद को चश्मदीद बता रहे है।फ़ोटो भी उन्हीं के द्वारा लिए गए हैं। 👇

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संगम पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी के साथ जो हुआ, उसकी आंखो देखी।
मैं उस वक्त संगम पर ही मौजूद था। शंकराचार्य अपने करीब 100 भक्तों-साधुओं-शिष्यों के साथ पुल नंबर दो के जरिए 9 बजे सुबह संगम की तरफ बढ़े। ये पुल बंद था। लेकिन शिष्यों ने बाबा के लिए खुलवा दिया। संगम पर जब पहुंचे तो हर तरफ स्वागत वगैरह हो रहा था।
इसके बाद बाबा की पालकी आगे बढ़ी। वह संगम की तरफ जाना चाहते थे, पुलिस कह रही थी संगम पुलिस चौकी के पास पालकी रोक दीजिए, यहां से पैदल चले जाइए। आगे भीड़ है। दोनों ही जगह में महज 50 मीटर की दूरी रही होगी। यही विवाद की वजह बन गया।
बाबा के समर्थक अड़ गए कि हमें आगे जाने दिया जाए। इसी बीच उनकी बहस शुरू हो गई। बहस धक्का-मुक्की में बदल गई। पुलिस ने एक-एक करके शिष्यों और साधुओं को पकड़ा और उन्हें खींचते हुए संगम पुलिस चौकी तक ले गई। एक शिष्य को तो धक्का देकर गिराया, बाल पकड़कर खींचे और बुरी तरह पीट दिया।
इसके बाद कई और को पकड़ा और ले गए। बाबा अकेले हो गए। बाबा के आसपास पुलिस, आरएएफ और सीएसएफ का घेरा बना दिया गया। 3 घंटे तक बहस चली। बाबा अड़े रहे कि हमारे लोगों को छोड़ा जाए, हमें इज्जत के साथ संगम में स्नान करवाया जाय, इसके बाद ही वापस जाएंगे।
पुलिस नरम हुई, लोगों को छोड़ा गया, पालकी आगे बढ़ी, लेकिन बात वही। पुलिस ने संगम की तरफ जाने नहीं दिया। फिर से धक्का मुक्की। बाबा के सभी लोगों को फिर से खींचकर चौकी के अंदर बंद कर दिया गया।
बाबा की पालकी को कुछ लोग धक्का मारते हुए तेजी से संगम से करीब 500 मीटर दूर तक ले गए। उनका छत्रप टूट गया। किसी शंकराचार्य का यही छत्रप सबसे अहम माना जाता है। जो लोग धक्का दे रहे थे, शंकराचार्य उनसे बार-बार पूछ रहे थे कि तुम लोग कौन हो? किसी ने कुछ नहीं बताया। समर्थक कहते हैं- वो सभी सादी वर्दी में प्रशासन के ही लोग थे।
बाबा को अक्षय वट पर अकेले छोड़ दिया गया। उन्हें बिना नहाए वापस जाना पड़ा। उनके समर्थकों को पुलिस गाड़ी में भरकर उनके आश्रम छोड़ आई।
सही-गलत का फैसला आप करिए। मुझे बस इतना लगता है कि हिन्दू धर्म के इतने बड़े धर्मगुरू के साथ यह नहीं होना चाहिए था। कई और भी बातें थी, जिन्हें नहीं लिखा-दिखाया जा सकता है।
:- राजेश साहू ( पत्रकार)
नोट :- ये शब्द पत्रकार राजेश साहू के है जो खुद को चश्मदीद बता रहे है।फ़ोटो भी उन्हीं के द्वारा लिए गए हैं। 👇

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