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गौरी गोपाल आश्रम में कथा सुनने आई महिला की 5 साल की बेटी अगवा, FIR दर्ज
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10 बेटियों के बाद पैदा हुआ बेटा...19 साल में 11वीं बार मां बनी हरियाणा की सुनीता
10 बेटियों के बाद बेटे के जन्म ने हरियाणा के फतेहाबाद जिले के ढाणी भोजराज गांव में खुशी की लहर दौड़ा दी है. 19 साल में 11वीं बार मां बनी सुनीता ने बेटे को जन्म दिया, जिससे परिवार का लंबा इंतजार पूरा हुआ. सामाजिक तानों और आर्थिक संघर्षों के बावजूद संजय-सुनीता ने बेटियों को बराबरी का सम्मान दिया. मां-बेटा स्वस्थ हैं और गांव में परिवार को सम्मानित करने की तैयारी है.
पूरी ख़बर: https://intdy.in/5z5yp3
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पटियाला की राजपाल कौर पिछले 25 सालों से गरीब और ज़रूरतमंद बच्चों की ज़िंदगी में शिक्षा की रोशनी जगा रही हैं। फ्लायओवर के नीचे चलने वाली उनकी “मस्ती की पाठशाला” सिर्फ़ एक क्लासरूम नहीं है, बल्कि सैकड़ों बच्चों के सपनों का सुरक्षित ठिकाना है। तेज़ धूप हो, बारिश हो या कड़ाके की ठंड; राजपाल कौर कभी भी पाठशाला पहुँचने से नहीं रुकीं।
कई सालों पहले पति हरभजन सिंह के निधन के बाद, उनकी ज़िंदगी में अंधेरा छा गया था। लेकिन टूटने के बजाय उन्होंने अपने पति के अधूरे सपने को ही अपने जीवन का मकसद बना लिया। 21 नंबर रेलवे फाटक के पास फुटपाथ पर शुरू हुई यह शिक्षा की यात्रा आज फ्लायओवर के नीचे “मस्ती की पाठशाला” के नाम से जानी जाती है— एक ऐसी जगह जहाँ गरीबी बच्चों के सपनों को रोक नहीं पाई।
शुरुआत में उन्हें समाज के ताने और मज़ाक भी सहने पड़े, लेकिन राजपाल कौर डटी रहीं। उन्होंने झुग्गी-बस्ती के बच्चों को पढ़ाई से जोड़ा, उनके माता-पिता को समझाकर सरकारी स्कूलों में दाख़िला दिलवाया और शाम को खुद बैठकर उनका होमवर्क करवाया। वह बच्चों को फीस, यूनिफॉर्म और किताबें खरीदने में भी उनकी मदद करती हैं।
राजपाल कौर कहती हैं, “मेरा सपना है कि हर ज़रूरतमंद बच्चा पढ़े। मैं चाहती हूँ कि कोई भी अनपढ़ न रहे, ख़ासकर बेटियाँ।”
आज उनकी पाठशाला से पढ़कर निकले कई बच्चे आत्मनिर्भर बन चुके हैं। कोई सरकारी नौकरी में है, कोई अपना बिज़नेस कर रहा है, तो कई बेटियाँ अपने पैरों पर खड़ी हैं। राजपाल कौर यह साबित करती हैं कि सच्ची देशसेवा मंचों पर नहीं, बल्कि ज़मीन पर होती है। शिक्षा की यह ज्योत वे अपनी आख़िरी साँस तक जलाए रखने के लिए आज भी पूरे संकल्प के साथ जुटी हुई हैं।
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