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आज देहरादून में भारतीय सेना की मध्य कमान के आर्मी कमाण्डर लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता जी से अपने आवास पर भेंट की। बैठक के दौरान उनसे पूर्व सैनिकों के कल्याण, सैन्य परंपराओं के संरक्षण एवं नागरिक-सैन्य समन्वय जैसे विभिन्न विषयों पर चर्चा में चर्चा की।
इस अवसर पर जनरल अनिंद्य जी ने सूर्या कमाण्ड की पुस्तक ‘‘द् वॉयेज ऑफ सूर्या कमाण्ड‘‘ भेंट की।

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आज देहरादून में भारतीय सेना की मध्य कमान के आर्मी कमाण्डर लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता जी से अपने आवास पर भेंट की। बैठक के दौरान उनसे पूर्व सैनिकों के कल्याण, सैन्य परंपराओं के संरक्षण एवं नागरिक-सैन्य समन्वय जैसे विभिन्न विषयों पर चर्चा में चर्चा की।
इस अवसर पर जनरल अनिंद्य जी ने सूर्या कमाण्ड की पुस्तक ‘‘द् वॉयेज ऑफ सूर्या कमाण्ड‘‘ भेंट की।

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आज देहरादून में भारतीय सेना की मध्य कमान के आर्मी कमाण्डर लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता जी से अपने आवास पर भेंट की। बैठक के दौरान उनसे पूर्व सैनिकों के कल्याण, सैन्य परंपराओं के संरक्षण एवं नागरिक-सैन्य समन्वय जैसे विभिन्न विषयों पर चर्चा में चर्चा की।
इस अवसर पर जनरल अनिंद्य जी ने सूर्या कमाण्ड की पुस्तक ‘‘द् वॉयेज ऑफ सूर्या कमाण्ड‘‘ भेंट की।

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एकात्म मानववाद और अंत्योदय के प्रणेता, प्रखर राष्ट्रवादी, हमारे प्रेरणास्रोत श्रद्धेय “पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी” की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।
दीनदयाल जी ने ‘अंत्योदय’ का वह विचार प्रस्तुत किया, जिसने समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास और सम्मान की किरण पहुँचाने का मार्ग प्रशस्त किया।
आज भी उनका ‘एकात्म मानववाद’ का दर्शन हमें राष्ट्र निर्माण की राह में संबल देता है और यह स्मरण कराता है कि समावेशी विकास ही सच्चे अर्थों में प्रगति है।

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महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रखर राष्ट्रवादी विचारक वीर सावरकर जी की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।
राष्ट्र प्रथम की उनकी भावना और अदम्य साहस आज भी हमें प्रेरित करता है।

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उम्मेद भवन पैलेस (विलासिता के लिए नहीं, अकाल से बचाने के लिए बना था)
दुनिया का 6वां सबसे बड़ा प्राइवेट घर, जिसके पीछे एक बहुत ही भावुक कहानी है!
"दुनिया का सबसे आलीशान महल, जो राजा के शौक के लिए नहीं... प्रजा को भूखे मरने से बचाने के लिए बना था!
आज 'उम्मेद भवन पैलेस' की गिनती दुनिया के सबसे महंगे और खूबसूरत होटलों में होती है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका निर्माण 1929 में महाराजा उम्मेद सिंह जी ने क्यों करवाया था? उस समय मारवाड़ में भयंकर अकाल पड़ा था। अपनी प्रजा को रोजगार और खाना देने के लिए महाराजा ने इस विशाल महल का निर्माण शुरू करवाया, जो 14 साल तक चला।
347 कमरों वाले इस महल को बनाने में सीमेंट का नहीं, बल्कि ##पत्थरों को आपस में फंसाने की तकनीक का इस्तेमाल हुआ है! #हाईलाइट #जोधाणा @फॉलोवर

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