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शेषनाग और पृथ्वी: वैदिक विज्ञान की गहनता
शेषनाग का वैज्ञानिक अर्थ:
संस्कृत में "शेष" का अर्थ है अंतरिक्ष, अर्थात् वह जो पृथ्वी से परे है। "नाग" का तात्पर्य गुरुत्वाकर्षण (ग्रैविटी) और चुंबकीय बलों (मैग्नेटिक फोर्स) के संयुक्त प्रभाव से है। इस प्रकार, "शेषनाग पर टिकी पृथ्वी" का अर्थ है कि पृथ्वी अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण और चुंबकीय बलों के कारण संतुलित है। यह संतुलन पृथ्वी को गोलाकार या अंडाकार बनाता है, न कि चपटा, जैसा कि कुछ भ्रांतियां मानती हैं।

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