40 w - Translate

आज काशी विश्वनाथ जी के पूजा उपरान्त पवित्र गणतंत्र दिवस पर विश्वनाथ धाम परिसर में भारत माता की मूर्ति पर पुष्प अर्पित कर उसके समीपस्थ राष्ट्र ध्वज का ध्वज वंदन किया।

imageimage

image
40 w - Translate
UGC act में सवर्ण छात्राओं पर झूठे आरोप लगा कर विरोधी छात्र और कमेटी के लोग कंप्रोमाइज के नाम पर उनका शारीरिक शोषण करेंगे।

होनहार छात्रों को फर्जी मुकदमों में फंसाया जाएगा। जिससे कि उनके कैरियर को समाप्त किया जा सके।

झूठे आरोप लगाने वालों पर कोई भी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान नहीं है।
कालेज की कमेटी में सामान्य वर्ग से कोई भी प्रतिनिधि नहीं रखा जाएगा।

#यूजीसी का काला कानून वापस होना चाहिए।
40 w - Translate

पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नामित आतंकी हाफिज़ अब्दुल रऊफ के एक बड़े कबूलनामे ने सुरक्षा हलकों में हलचल मचा दी है। लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष कमांडर रऊफ ने सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया है कि भारत के “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान मुरीदके में आतंकियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा और कई आतंकी मारे गए। उसके बयान के मुताबिक, भारतीय कार्रवाई ने आतंकी ठिकानों को गंभीर रूप से तबाह किया, जिससे संगठन की क्षमताओं को गहरा झटका लगा।

image
40 w - Translate

- नितेश राणे मंत्री, भाजप नेते

image
40 w - Translate

भारत के इलेक्ट्रिक वाहन बाजार को लेकर सज्जन जिंदल का बयान काफी चर्चा में है। उनका मानना है कि एलन मस्क जैसी वैश्विक शख्सियत भी भारत में वही सफलता हासिल नहीं कर पाएंगी, जैसी घरेलू कंपनियों ने की है। जिंदल के अनुसार टाटा मोटर्स और महिंद्रा जैसी भारतीय कंपनियां देश के उपभोक्ताओं को गहराई से समझती हैं। वे न केवल कीमतों को भारतीय जेब के हिसाब से तय करती हैं, बल्कि सड़क की स्थिति, ड्राइविंग आदतों, चार्जिंग जरूरतों और उपयोग के वास्तविक पैटर्न को भी ध्यान में रखती हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि एलन मस्क अमेरिका से भारत को देखते हैं, जबकि भारतीय कंपनियां यहीं रहकर, यहीं की चुनौतियों और जरूरतों के बीच गाड़ियां डिजाइन और तैयार करती हैं। यही वजह है कि विदेशी कंपनियों के लिए भारत जैसे विविध और जटिल बाजार में स्थानीय खिलाड़ियों से मुकाबला करना आसान नहीं है। जिंदल का मानना है कि भारत का ईवी भविष्य घरेलू कंपनियों के हाथों में ही अधिक सुरक्षित और मजबूत दिखाई देता है।

image
40 w - Translate

दत्तक ग्रहण की नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है। इसका दायित्व देश के भीतर और अंतर-देशीय दत्तक ग्रहण प्रक्रियाओं की निगरानी और नियमन करना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कोई नया सामाजिक रुझान नहीं है, बल्कि वास्तविकता यह है कि अधिक संख्या में बच्चियों को छोड़ा या त्यागा जा रहा है, जिसके कारण वे गोद लेने के लिए अधिक उपलब्ध हो जाती हैं।

बाल अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था HAQ: सेंटर फॉर चाइल्ड राइट्स की सह-संस्थापक और कार्यकारी निदेशक भारती अली के अनुसार, “यह बढ़ोतरी इसलिए दिखाई दे रही है क्योंकि अधिक बच्चियां उपलब्ध हैं। समाज में आज भी बेटियों को छोड़े जाने की घटनाएं अधिक हैं।” इसी बात से सहमत होते हुए बाल अधिकार कार्यकर्ता एनाक्षी गांगुली ने भी कहा कि अधिक बच्चियों के परित्याग या आत्मसमर्पण के कारण ही उन्हें गोद लिए जाने की संख्या अधिक होती है।

CARA ने अपने एक हलफनामे में बताया कि दत्तक ग्रहण के लिए उपलब्ध बच्चों को पांच श्रेणियों में रखा गया है—अनाथ, परित्यक्त, आत्मसमर्पित, अयोग्य माता-पिता वाले बच्चे और लंबे समय तक मुलाकात न होने के मामले। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, अब तक 7 से 11 वर्ष और 12 से 18 वर्ष आयु वर्ग के कुल 20,673 बच्चों की पहचान की जा चुकी है, जो इन श्रेणियों में आते हैं।

हालांकि, दस राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों—अरुणाचल प्रदेश, बिहार, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, केरल, लद्दाख, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और मणिपुर—ने इस अवधि में हुए कुल दत्तक ग्रहण का डेटा उपलब्ध नहीं कराया है। वहीं पंजाब में हिंदू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम (HAMA) के तहत कुल 7,496 दत्तक ग्रहण दर्ज किए गए, जिनमें से 4,966 बच्चियां और 2,530 बच्चे थे। इसके विपरीत, तेलंगाना में HAMA के अंतर्गत दत्तक ग्रहण में दंपतियों की प्राथमिकता लड़कों की ओर अधिक पाई गई।

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने 15 मार्च को देश के 370 जिलों में विशेषीकृत दत्तक ग्रहण एजेंसियों (Specialised Adoption Agencies – SAAs) की स्थापना न होने पर गहरी नाराजगी जताई। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि उसके निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खिलाफ कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि देश के कुल 760 जिलों में से 370 जिलों में अभी तक कार्यशील SAAs नहीं हैं, जबकि किशोर न्याय अधिनियम के तहत यह एक अनिवार्य कानूनी आवश्यकता है।

SAAs का मुख्य कार्य संभावित दत्तक माता-पिता की होम स्टडी रिपोर्ट तैयार करना होता है। पात्र पाए जाने पर, वे कानूनी रूप से दत्तक ग्रहण के लिए मुक्त घोषित बच्चे को, उसकी बाल-अध्ययन रिपोर्ट और मेडिकल रिपोर्ट के साथ दंपति को सौंपते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे 7 अप्रैल तक महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को SAAs की स्थिति और दत्तक ग्रहण से संबंधित नवीनतम आंकड़े उपलब्ध कराएं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि अदालत के आदेशों का जमीनी स्तर पर कोई प्रभाव पड़ा है या नहीं।

केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने भी कहा कि अदालत के आदेशों के प्रभावी क्रियान्वयन और दत्तक प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए राज्यों को समय पर सही आंकड़े मंत्रालय को उपलब्ध कराने चाहिए। यह पूरा मुद्दा न केवल दत्तक व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है, बल्कि समाज में बच्चियों के प्रति दृष्टिकोण पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

image
40 w - Translate

जब पूरा देश लियोनेल मेसी से मिलने की तस्वीरों और चर्चाओं में डूबा हुआ था, तब विराट कोहली ने एक अलग ही रास्ता चुना। उन्होंने भीड़ और सुर्खियों से दूर जाकर प्रेमानंद जी महाराज के दर्शन किए। यह कदम दिखाता है कि विराट के लिए आंतरिक शांति, आस्था और आध्यात्मिक संतुलन उतना ही महत्वपूर्ण है जितना मैदान पर सफलता। यह मुलाकात उनके व्यक्तित्व के उस पक्ष को सामने लाती है, जहां विनम्रता और आत्मिक जुड़ाव सबसे ऊपर है।

image
40 w - Translate

संविधान की भावना को साकार करता उत्तराखण्ड
हर नागरिक के लिए समान कानून वाला पहला राज्य
#bjp4uk #bjpukgov #dhamigovernment #goodgovernance #समाननागरिकसंहिता #ucc

image
40 w - Translate

35 करोड़ सवर्ण समाज से कौन कौन UGC काले कानून के खिलाफ महाआंदोलन का समर्थन करते?
कमेंट में अपनी राय जरूर दे।
सवर्ण समाज एकता जिंदाबाद 🚩

image