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माँ लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की कृपा से
आपके जीवन में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशियों का वास हो।
#धनतेरस (धनों त्रयोदशी) की आपको और आपके परिवार को ढेर सारी शुभकामनाएँ !🙏
रावण की एक बात बहुत अच्छी लगती है।
कुम्भकर्ण ने रावण से कहा- भईया अगर मैं रणभूमि में मारा गया तो समझ लेना राम से कोई नहीं जीत सकता, तब आप राम को भगवान मानकर उनकी शरण में चले जाना
ताकि हमारा कुल नष्ट होने से बच जाए।
सुनकर रावण ने खूबसूरत जवाब दिया की - प्राणी जब अपने परिवार के साथ बैठकर सुख भोगता है तभी वो प्रसन्न और
संतुष्ट हो जाता है यदि तुम जैसे भाई नहीं रहे तो तीनों लोकों का साम्राज्य रावण के लिए किस काम का।
भाई, भाईयों के बेटे, अपने बेटे मरवा कर कैसे ऐश्वर्यं भोग
सकेगा रावण ।
शिक्षा :- परिवार के साथ केवल सुख भोगने के लिए मत खड़े रहो, बल्कि उनके बुरे समय में भी साथ खड़े रहो।
वृद्धाश्रम के दरवाजे पर रोज एक कार आकर रुकती थी। उस कार में से एक नौजवान उतरता और एक बुढ़ी महिला के पास जाकर बैठ जाता। एक आध घंटे तक दोनों के बीच कुछ वार्तालाप चलती फिर वह उठकर चला जाता। यह प्रक्रिया अनवरत चल रही थी।
धीरे-धीरे सबको पता चल गया कि बुढ़ी महिला उस नौजवान की माँ हैं।
आज फिर वह सुबह से आकर बैठा था और बार-बार माँ के पैर पकड़ माफ़ी मांग रहा था। दूर बैठे वृद्धाश्रम के गेट कीपर को रहा नहीं गया वह एक बुजुर्ग से बोला-" लोग कहते हैं कि औलाद की नीयत बदल जाती है पर यहाँ का दृश्य तो कुछ और ही कह रहा है।
बुजुर्ग ने कहा-" ऐसा नहीं है भाई कि जो तुम्हारी आँखें देख रही हो वह सही हो। कोई बात तो जरूर होगी तभी लोग वृद्धाश्रम के दरवाजे तक आते हैं। "