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कोटा स्थित कार्यालय में आज कोटा, बून्दी, बारां और झालावाड़ से आए दिव्यांग भाई-बहनों को मोटराइज़्ड ट्राईसाइकिल वितरित करने का अवसर मिला। यह केवल आवागमन के साधन नहीं, बल्कि उनके जीवन को अधिक सहज, आत्मनिर्भर और सम्मानजनक बनाने में सहायक माध्यम भी है। समाज के रूप में हमारा दायित्व है कि दिव्यांगजनों को समान अवसर और सुविधाएं मिलें, ताकि वे भी अपनी क्षमता के अनुसार समाज में सक्रिय भूमिका निभा सकें।
संतोष का विषय है कि कोटा में मई 2025 में प्रारंभ हुए ‘प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्र’ के माध्यम से अब तक लगभग 2500 से अधिक दिव्यांग एवं वरिष्ठजनों को सहायता मिल चुकी है और करीब 7 करोड़ रूपए के सहायक उपकरण वितरित किए गए हैं। यह पहल दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण की दिशा में एक सार्थक प्रयास है, जिसे आगे भी निरंतर मजबूत किया जाएगा।
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कोटा स्थित कार्यालय में आज कोटा, बून्दी, बारां और झालावाड़ से आए दिव्यांग भाई-बहनों को मोटराइज़्ड ट्राईसाइकिल वितरित करने का अवसर मिला। यह केवल आवागमन के साधन नहीं, बल्कि उनके जीवन को अधिक सहज, आत्मनिर्भर और सम्मानजनक बनाने में सहायक माध्यम भी है। समाज के रूप में हमारा दायित्व है कि दिव्यांगजनों को समान अवसर और सुविधाएं मिलें, ताकि वे भी अपनी क्षमता के अनुसार समाज में सक्रिय भूमिका निभा सकें।
संतोष का विषय है कि कोटा में मई 2025 में प्रारंभ हुए ‘प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्र’ के माध्यम से अब तक लगभग 2500 से अधिक दिव्यांग एवं वरिष्ठजनों को सहायता मिल चुकी है और करीब 7 करोड़ रूपए के सहायक उपकरण वितरित किए गए हैं। यह पहल दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण की दिशा में एक सार्थक प्रयास है, जिसे आगे भी निरंतर मजबूत किया जाएगा।
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कोटा स्थित कार्यालय में आज कोटा, बून्दी, बारां और झालावाड़ से आए दिव्यांग भाई-बहनों को मोटराइज़्ड ट्राईसाइकिल वितरित करने का अवसर मिला। यह केवल आवागमन के साधन नहीं, बल्कि उनके जीवन को अधिक सहज, आत्मनिर्भर और सम्मानजनक बनाने में सहायक माध्यम भी है। समाज के रूप में हमारा दायित्व है कि दिव्यांगजनों को समान अवसर और सुविधाएं मिलें, ताकि वे भी अपनी क्षमता के अनुसार समाज में सक्रिय भूमिका निभा सकें।
संतोष का विषय है कि कोटा में मई 2025 में प्रारंभ हुए ‘प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्र’ के माध्यम से अब तक लगभग 2500 से अधिक दिव्यांग एवं वरिष्ठजनों को सहायता मिल चुकी है और करीब 7 करोड़ रूपए के सहायक उपकरण वितरित किए गए हैं। यह पहल दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण की दिशा में एक सार्थक प्रयास है, जिसे आगे भी निरंतर मजबूत किया जाएगा।
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हमारी सरकार युवाओं को रोज़गार के अवसर प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए पूर्णतः संकल्पित है। नए साल में हज़ारों नई नियुक्तियां प्रदेश के विकास को नई गति देंगी।
Narendra Modi BJP INDIA PMO India Dharmendra Pradhan

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भारतीय जनता पार्टी, राजस्थान प्रदेश महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष नियुक्ति पर श्रीमती राखी राठौड़ जी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि आपके कुशल नेतृत्व, संगठनात्मक अनुभव एवं समर्पण से महिला मोर्चा को नई ऊर्जा और दिशा मिलेगी। आप मातृशक्ति को संगठित कर पार्टी की विचारधारा, जनसेवा और राष्ट्रनिर्माण के संकल्प को सशक्त रूप से आगे बढ़ाएंगी।
ईश्वर से आपके सफल, प्रभावी एवं प्रेरणादायी कार्यकाल की मंगलकामना करता हूँ।

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आज के समय में सोशल मीडिया पर फेमस होना बहुत आसान है।
हॉस्पिटल में कोई कैमरे के सामने एक केला दे दे,
तो लोग उसे फरिश्ता, मसीहा और हीरो बना देते हैं।
लाइक्स, कमेंट्स और शेयरों की बारिश होने लगती है।
लेकिन ज़रा रुक कर सोचिए—
जो इंसान अपने शरीर का 40% लिवर दान कर देता है,
उसके लिए कितने लोग खड़े होते हैं?
लिवर दान करना कोई भावुक पल का फैसला नहीं होता।
इसमें दर्द है, ऑपरेशन है, जोखिम है,
हफ्तों की तकलीफ है और महीनों की रिकवरी है।
यह कोई दिखावे का काम नहीं,
यह शुद्ध कुर्बानी है।
ऐसे लोग कैमरे के सामने भाषण नहीं देते,
न पोस्ट लिखते हैं, न ट्रेंड चलाते हैं।
वे बस चुपचाप किसी की ज़िंदगी बचा देते हैं।
समस्या यह नहीं कि लोग केला देने वालों की मदद को सराहते हैं—
समस्या यह है कि
हम गहराई वाली इंसानियत को पहचानना भूल गए हैं।
आज ज़रूरत है लाइक देने से ज़्यादा
सम्मान देने की।
आज ज़रूरत है वायरल करने से ज़्यादा
सोच बदलने की।
यह पोस्ट लाइक माँगने के लिए नहीं है,
यह याद दिलाने के लिए है—
कि असली हीरो वही होते हैं
जो बिना शोर किए
किसी की ज़िंदगी बन जाते हैं।
हमें आप पर गर्व है।
और अगर यह पोस्ट आपको छू जाए,
तो एक लाइक नहीं,
एक सोच बदलना ही काफी है

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