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पहले अपने गिरेबान में झांकिए .. अमित शाह जी
आपराधिक पृष्ठभूमि के लोगों, बाहुबलियों को या उनके बच्चों को चुनाव में प्रत्याशी बनाने के मुद्दे पर दोहरी - दोगली बात करने से पहले भाजपा और अमित शाह जी को अपनी गिरेबान में झाँकना चाहिए , फिर विपक्ष पर दोषारोपण करना चाहिए ..
आपराधिक मुकदमों में नामजद लोगों की उपस्थिति जितनी भाजपा और उसके एनडीए गठबंधन में है , उसकी तुलना में विपक्षी दलों व् इंडिया अलायंस में ऐसे लोगों की संख्या कम है, एडीआर की रिपोर्ट और चुनाव आयोग में दाखिल चुनावी हलफनामों से भी ये स्पष्ट होता है, राज्यों की विधानसभा की बात तो छोड़ दीजिए, देश की लोकसभा में सांसद के तौर पर चुन कर गए सांसदों में भी संज्ञेय अपराध के मुकदमों में नामजद सांसदों की संख्या के मामले में भाजपा अव्वल है .. गौरतलब है कि खुद अमित शाह जी की पृष्ठभूमि गंभीर आपराधिक चरित्र वाली रही है और एक समय माननीय न्यायालय ने भी उन्हें सभ्य समाज में नहीं रहने लायक बताते हुए तड़ीपारी की सजा सुनाई थी .