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सद्भावना - भाईचारे , रंगों के त्यौहार होली को भी नफरती रंग में रंग दिया भाजपा ने , ऐसा नहीं कि पाक महीने रमजान का जुम्मा और होली पहली दफा एक ही दिन है, पहले भी ऐसा संयोग आया है और बिना किसी हील - हुज्जत के दोनों त्यौहार सद्भाव के साथ संपन्न हुए हैं , हमारे देश की ये विलक्षण परंपरा रही है कि यहाँ त्यौहारों में कोई संकुचन , किसी भी प्रकार की सीमितता नहीं होती, हरेक धर्म , हर संप्रदाय के लोग हर पर्व व् त्यौहार को मिल कर मनाते आए हैं , मगर २०१४ के पश्चात् जब से भारत जलाओ पार्टी ( भाजपा ) सत्ता में आयी है , तब से हरेक पर्व - त्यौहार पर उन्माद ही उत्पन्न करते आयी है , इस दफा तो होली के रंग में ही जहर घोल दिया भाजपा ने, शुरुआत उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री ने की और फिर भाजपा के पूरे तंत्र ने देश का माहौल बिगाड़ने का नापाक काम शुरू कर दिया ..
मस्जिदों पर तिरपाल डालने की बजाय नफरती जुबानों पर लगाम लगाने की जरूरत थी , मगर ऐसा करने की बजाय भाजपा सांप्रदायिक - धार्मिक सौहार्द - व्यवहार बिगाड़ने के अपने एकमात्र एजेंडे में ही पूरी शिद्दत के साथ एक बार फिर जुट गयी और जहरीले बयानों के बारूद से भाजपाईयों ने होली का सद्भाव ही जला डाला.