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ਸੂਰਿਆਕੁਮਾਰ ਯਾਦਵ ਨੇ ਪਾਕਿ ਖਿਲਾਫ਼ ਜਿੱਤ ਨੂੰ ਭਾਰਤੀ ਫੌਜ ਨੂੰ ਕੀਤੀ ਸਮਰਪਿਤ'
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पाकिस्तान के खिलाफ जीत हमारी और पहलगाम के पीड़ितों की रक्षा करने वाले सशस्त्र बलों को समर्पित: शुभमन गिल
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कांग्रेस मुख्यालय में इटावा के कलेक्टर रहे अंग्रेज एलन ऑक्टेवियो ह्यूम की बड़ी सी तस्वीर लगी है
यह स्वतंत्रता सेनानियों का दुश्मन था अपने कार्यकाल के दौरान इसने 400 से ज्यादा स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को गिरफ्तार करवाया था
अब आप सोच रहे होंगे कि इस अंग्रेज की तस्वीर कांग्रेस मुख्यालय में क्यों लगी है
क्योंकि कांग्रेस पार्टी का यही स्थापना किया था
और यह कांग्रेसी कहते हैं हम अंग्रेजों से लड़े थे
सुभाष चंद्र बोस की पत्नी🌺
मिलिये नेताजी सुभाष चंद्र बोस की पत्नी से जिन्हें आजादी के बाद नहीं घुसने दिया गया था भारत में, जानिये क्यों?
बात 1947 से पहले की है. यह कहानी है एक जर्मन महिला की नाम था एमिली शेंकल. मुझे नहीं पता आपमें से कितनों ने ये नाम सुना है और अगर नहीं सुना है तो आप दोषी नहीं इस नाम को इतिहास से खुरच कर निकाल फैंका गया.
एमिली शेंकल ने 1937 में भारत मां के सबसे लाडले बेटे से विवाह किया और एक ऐसे देश को ससुराल के रूप में चुना जिसने कभी इस बहू का स्वागत नहीं किया. न बहू के आगमन में किसीने मंगल गीत गाये और न उसकी बेटी के जन्म पर कोई सोहर गायी गयी. कभी कहीं जनमानस में चर्चा तक नहीं हुई के वो कैसे जीवन गुजार रही है.
सात साल के कुल वैवाहिक जीवन में सिर्फ 3 साल ही उन्हें अपने पति के साथ रहने का अवसर मिला फिर उन्ह और नन्हीं सी बेटी को छोड़ पति देश के लिए लड़ने चला आया इस वादे के साथ के पहले देश को आज़ाद करा लूं फिर तो सारा जीवन तुम्हारे साथ वहां बिताना ही है पर ऐसा हुआ नहीं औऱ 1945 में एक कथित विमान दुर्घटना में वो लापता हो गए.
उस समय एमिली शेंकल बेहद युवा थीं चाहतीं तो यूरोपीय संस्कृति के हिसाब से दूसरा विवाह कर सकतीं थीं पर उन्हों ने ऐसा नहीं किया और सारा जीवन बेहद कड़ा संघर्ष करते हुए बिताया. एक तारघर की मामूली क्लर्क की नौकरी और बेहद कम वेतन के साथ वो अपनी बेटी को पालतीं रहीं न किसी से शिकायत की न कुछ मांगा.
भारत भी तब तक आज़ाद हो चुका था और वे चाहतीं थीं कम से कम एक बार उस देश में आएं जिसकी आजादी के लिए उनके पति ने जीवन दिया.
भारत का एक अन्य राजनीतिक परिवार इतना भयभीत था इस एक महिला से के जिसे सम्मान सहित यहां बुला देश की नागरिकता देनी चाहिए थी उसे कभी भारत का वीज़ा तक नहीं दिया गया.