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दयया सर्वभूतेषु ......
भागवत में लिखा है भगवान की प्रसन्नता का प्रधान कारण है जीवो पर दया करना।।
यदि जीवो पर दया नहीं है तो चाहे जितनी पूजा पाठ अर्चन वंदन कर लो भगवान प्रसन्न नहीं होगें। और न ही मन में शांति आएगी ना सुख मिलेगा और इस संसार से जाने के बाद परम गति भी नहीं होगी।।
शास्त्र विधि से जीवन जीना और भगवान की वाणी का आदर सम्मान करना यह मनुष्य मात्र का कर्तव्य है,मूक प्राणियों पर दया करना मानवता है और इंसान होने की पहचान है,
काश यह बात मांसाहार करने वाले लोग समझ पाएं....
दयया सर्वभूतेषु ......
भागवत में लिखा है भगवान की प्रसन्नता का प्रधान कारण है जीवो पर दया करना।।
यदि जीवो पर दया नहीं है तो चाहे जितनी पूजा पाठ अर्चन वंदन कर लो भगवान प्रसन्न नहीं होगें। और न ही मन में शांति आएगी ना सुख मिलेगा और इस संसार से जाने के बाद परम गति भी नहीं होगी।।
शास्त्र विधि से जीवन जीना और भगवान की वाणी का आदर सम्मान करना यह मनुष्य मात्र का कर्तव्य है,मूक प्राणियों पर दया करना मानवता है और इंसान होने की पहचान है,
काश यह बात मांसाहार करने वाले लोग समझ पाएं....
दयया सर्वभूतेषु ......
भागवत में लिखा है भगवान की प्रसन्नता का प्रधान कारण है जीवो पर दया करना।।
यदि जीवो पर दया नहीं है तो चाहे जितनी पूजा पाठ अर्चन वंदन कर लो भगवान प्रसन्न नहीं होगें। और न ही मन में शांति आएगी ना सुख मिलेगा और इस संसार से जाने के बाद परम गति भी नहीं होगी।।
शास्त्र विधि से जीवन जीना और भगवान की वाणी का आदर सम्मान करना यह मनुष्य मात्र का कर्तव्य है,मूक प्राणियों पर दया करना मानवता है और इंसान होने की पहचान है,
काश यह बात मांसाहार करने वाले लोग समझ पाएं....
