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बहुत दु:खद
चाहरवाटी अकोला व भारत के लिए कभी ना पूरी होने वाली क्षति 😥
अकोला का लाल लेफ्टिनेंट शहीद आजाद चाहर मात्र 24 साल की उम्र मे देश की सेवा करते हुए शहीद हुए उनकी शहादत को नमन करते हुए भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
जय हिन्द 🇮🇳🇮🇳🙏

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फौजी ललित मोहन जोशी ने साल 2001 मे उत्तराखंड के संगीत जगत में अपना कदम रखा. फौजी ललित मोहन जोशी को तब पहचान मिली जब उनका टक - टकाटक कमला बाटुली लगाए, गाना हिट हुआ, आज भी ललित मोहन जोशी जी की बराबरी कोई नहीं कर सकता है दोस्तों, कुमाऊं के लोक गायन को भले ही आजकल के नए जमाने का संगीत कड़ी टक्कर दे रहा है। मगर हमारे अपने कुछ गायकों ने भी इस चैलेंज को बाखूबी स्वीकार किया है। फौजी ललित मोहन जोशी जी की वह हमेशा से कुमाऊंनी लोक गायकी को आगे ले जाने के पक्षधर रहे हैं। समय-समय पर उनके गाने आते रहते हैं। फौजी ललित मोहन जोशी का गानों के साथ-साथ फ़ौज की नौकरी भी करते हैं, ऐसे महान कलाकार को एक लाइक तो बनता है जिन्होंने अपने गानों के माध्यम से उत्तराखंड की संस्कृति को संभाले रखा है💐💐
फ़ोटो साभार: फौजी ललित मोहन जोशी
#dainikcircle #uttarakhand

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फौजी ललित मोहन जोशी ने साल 2001 मे उत्तराखंड के संगीत जगत में अपना कदम रखा. फौजी ललित मोहन जोशी को तब पहचान मिली जब उनका टक - टकाटक कमला बाटुली लगाए, गाना हिट हुआ, आज भी ललित मोहन जोशी जी की बराबरी कोई नहीं कर सकता है दोस्तों, कुमाऊं के लोक गायन को भले ही आजकल के नए जमाने का संगीत कड़ी टक्कर दे रहा है। मगर हमारे अपने कुछ गायकों ने भी इस चैलेंज को बाखूबी स्वीकार किया है। फौजी ललित मोहन जोशी जी की वह हमेशा से कुमाऊंनी लोक गायकी को आगे ले जाने के पक्षधर रहे हैं। समय-समय पर उनके गाने आते रहते हैं। फौजी ललित मोहन जोशी का गानों के साथ-साथ फ़ौज की नौकरी भी करते हैं, ऐसे महान कलाकार को एक लाइक तो बनता है जिन्होंने अपने गानों के माध्यम से उत्तराखंड की संस्कृति को संभाले रखा है💐💐
फ़ोटो साभार: फौजी ललित मोहन जोशी
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फौजी ललित मोहन जोशी ने साल 2001 मे उत्तराखंड के संगीत जगत में अपना कदम रखा. फौजी ललित मोहन जोशी को तब पहचान मिली जब उनका टक - टकाटक कमला बाटुली लगाए, गाना हिट हुआ, आज भी ललित मोहन जोशी जी की बराबरी कोई नहीं कर सकता है दोस्तों, कुमाऊं के लोक गायन को भले ही आजकल के नए जमाने का संगीत कड़ी टक्कर दे रहा है। मगर हमारे अपने कुछ गायकों ने भी इस चैलेंज को बाखूबी स्वीकार किया है। फौजी ललित मोहन जोशी जी की वह हमेशा से कुमाऊंनी लोक गायकी को आगे ले जाने के पक्षधर रहे हैं। समय-समय पर उनके गाने आते रहते हैं। फौजी ललित मोहन जोशी का गानों के साथ-साथ फ़ौज की नौकरी भी करते हैं, ऐसे महान कलाकार को एक लाइक तो बनता है जिन्होंने अपने गानों के माध्यम से उत्तराखंड की संस्कृति को संभाले रखा है💐💐
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