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नवरात्रि के आठवें दिन दर्शन- माँ महागौरी अन्नपूर्णा माता🙏
नवरात्रि के आठवें दिन (अष्टमी) देवी दुर्गा की महागौरी की पूजा की जाती है। यह काशी की प्रमुख देवी माता अन्नपूर्णा भी हैं। इनकी पूजा करने से भक्त कभी दरिद्र नहीं होते। माता की असीम अनुकंपा सदैव भक्तों पर बनी रहती है। जिससे धन-धान्य की प्राप्ति होती है। महागौरी सदैव काशीवासियों का कल्याण करती हैं। इनकी कृपा से काशीवासी कभी भूखे नहीं रहते। माता का स्वरूप पूर्ण गौरवर्ण है। माता की सवारी वृषभ है। इनकी चार भुजाएं हैं। इनकी मुद्रा शांत और सौम्य है। इनके दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ होती है। यह मंदिर अन्नपूर्णा मंदिर विश्वनाथ गली में स्थित है।
जय माँ अन्नपूर्णेश्वरी माता रानी 🙏
नवरात्रि नवमी दिन दर्शन- सिद्धिदात्री माता 🙏
नवरात्र के नौवें (नवमी) को व अंतिम दिन सिद्धिदात्री माँ की पूजा आराधना होती है। इनके दर्शन-पूजन से कलह का शमन होता है। माँ सबकी रक्षा करने के साथ सिद्धि प्रदान करती हैं। माँ के प्रसन्न होने पर भक्तों को आठों सिद्धि मिल जाती है। आठों सिद्धियाँ इस प्रकार है। अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वाशित्व। इनका वाहन भी सिंह है और इन्हें चार भुजाएं हैं। माँ सिद्धिदात्री का मंदिर गोलघर सिध्माता गली में स्थित है।
जय माँ सिध्माता, हर-हर महादेव 🙌🙏
आपको और आपके परिवार को बनारसी अंदाज परिवार की तरफ से धनतेरस के पर्व की ढेर सारी शुभकामनाएं एवं बधाई, भगवान धन्वंतरि आप सभी के जीवन के प्रत्येक दिन को उज्ज्वल और धन्य करें।🙏
मां अन्नपूर्णा देवी जी की कृपा आप पर सदैव बनी रहे 🌺🙏
जय माँ धन्वंतरि, जय माँ अन्नपूर्णा जी, हर-हर महादेव 🙌
Dhanteras Special: वर्ष में केवल 5 घंटे के लिए होते हैं भगवान धन्वन्तरी के दुर्लभ दर्शन, पूरे भारत की अनूठी प्रतिमा, देश-विदेश से जुटते हैं श्रद्धालु
वाराणसी। काशी के सुड़िया क्षेत्र में स्थित दिवंगत राजवैद्य शिवकुमार शास्त्री के निवास पर स्थापित दुर्लभ अष्टधातु की भगवान धन्वन्तरी की प्रतिमा हर वर्ष केवल धनतेरस के दिन पांच घंटे के लिए दर्शनार्थियों के लिए खोली जाती है। यह भारत की अनूठी प्रतिमा मानी जाती है, जिसे देखने और भगवान का आशीर्वाद पाने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु यहां जुटते हैं। मान्यता है कि भगवान धन्वन्तरी के दर्शन मात्र से व्यक्ति पूरे वर्ष निरोग और स्वस्थ रहता है।
धनतेरस पर होती है विशेष पूजा
धनतेरस के पावन अवसर पर भगवान धन्वन्तरी की पूजा परंपरागत तरीके से की जाती है। इस दिन दोपहर में भगवान का आयुर्वेदिक औषधियों से स्नान करवा कर शृंगार किया जाता है। फिर पांच ब्राह्मणों के द्वारा विशेष पूजा और आरती होती है। परिवार के सदस्य, जिनमें पं. रामकुमार शास्त्री, नंद कुमार शास्त्री, उत्पल शास्त्री, कोमल शास्त्री, आदित्य विक्रम शास्त्री और मिहिर विक्रम शास्त्री शामिल हैं, पूरे विधि-विधान से भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। शाम 5 बजे आम भक्तों के लिए मंदिर का पट खोला जाता है, जिससे हर श्रद्धालु भगवान का दर्शन कर प्रसाद ग्रहण कर सके। रात्रि 10 बजे मंदिर का पट बंद कर दिया जाता है और इसके बाद अगले वर्ष धनतेरस तक यह पुनः नहीं खोला जाता।
धन्वन्तरी भगवान की महिमा और नि:शुल्क चिकित्सा सेवा
हिंदू पुराणों के अनुसार, भगवान धन्वन्तरी समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उनके इस रूप को काशी में विशेष आदर प्राप्त है, और इसी के साथ धन्वन्तरी निवास पर जरूरतमंदों के लिए नि:शुल्क आयुर्वेदिक चिकित्सा और औषधि प्रदान की जाती है। यहां असाध्य रोगों का आयुर्वेदिक उपचार भी होता है। राजवैद्य शिवकुमार शास्त्री के यहां पूर्व राष्ट्रपति समेत अनेक नेता भी चिकित्सा हेतु आए हैं।
स्वर्णमई अन्नपूर्णा के कपाट खुल गए, विधिवत हुआ पूजन आरती ।
लाखों भक्तों में बट रहे हैं खजाने, कोई माने या ना माने, लूटा रही है अपने हाथों से मां, यह तो पाने वाला ही जाने...🙏🚩
काशी में स्वर्णमयी माता अन्नपूर्णा के कपाट धनतेरस की भोर बेला में धनतेरस से अन्नकूट महापर्व 5 दिनों तक के लिए खुल गए, 29 अक्टूबर से 2 नवंबर तक होंगे स्वर्ण मई प्रतिमा के दर्शन, भक्तों की लगी भारी कतार, गूंज रही है जय जयकार 🙌
जय-जय माँ अन्नपूर्णा, जय माता दी 🚩
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