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I couldn’t even afford a bus ticket. | Sejal Gaba | Josh Talks
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****ly to become speaker at Josh Talks-
https://forms.gle/d23aj3x7c5BuBjnf6
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बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर ने अयोध्या राम मंदिर के दानपात्र से कथित चढ़ावा चोरी के मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी भी धार्मिक स्थल पर चोरी की घटना का दोष उस स्थान या आस्था को नहीं, बल्कि चोरी करने वाले व्यक्ति को दिया जाना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, "अगर आपके घर में चोरी होती है, तो आप चोर को कोसते हैं, घर को नहीं कोसते।"

अनुपम खेर ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और किसी एक आपराधिक घटना के आधार पर पूरे मंदिर या हिंदू समाज को कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं है। उन्होंने लोगों से अपील की कि ऐसे मामलों में अपराधी को जिम्मेदार ठहराया जाए, न कि उस धार्मिक स्थल या उससे जुड़ी आस्था को।

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जापान के पूर्व राजदूत यासुकुनी एनोकी ने भारत और जापान के सांस्कृतिक संबंधों पर चर्चा करते हुए कहा कि जापान में पूजे जाने वाले अनेक देवताओं की जड़ें भारतीय परंपरा और बौद्ध धर्म के माध्यम से पहुंची हैं। उन्होंने दावा किया कि जापान के 80% से अधिक देवता मूल रूप से भारतीय देवताओं से जुड़े हुए हैं, हालांकि अधिकांश जापानी इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध से परिचित नहीं हैं।
यासुकुनी एनोकी ने उदाहरण देते हुए बताया कि वह टोक्यो के बाहरी क्षेत्र किचिजोजी (Kichijōji) में रहते हैं। उनके अनुसार, इस स्थान का नाम 'किचिज़ो' देवी से जुड़ा है, जिन्हें वह भारतीय परंपरा की माता लक्ष्मी से संबंधित मानते हैं। इसी कारण वह मजाकिया अंदाज में स्वयं को "लक्ष्मी टाउन" का निवासी भी कहते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत और जापान के बीच सांस्कृतिक एवं धार्मिक संबंध हजारों वर्षों पुराने हैं और बौद्ध धर्म के प्रसार के साथ भारतीय देवताओं एवं परंपराओं का प्रभाव जापानी संस्कृति तक पहुंचा। यह वक्तव्य यासुकुनी एनोकी के विचारों को दर्शाता है। जापान में भारतीय मूल से जुड़े देवताओं और उनके ऐतिहासिक संबंधों पर विभिन्न इतिहासकारों और शोधकर्ताओं द्वारा अलग-अलग अध्ययन और व्याख्याएं प्रस्तुत की गई हैं।
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Radhe Krishna ❤️

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"नर्मदेश्वर महादेव"
काशी वाराणसी में स्थित अत्यंत प्राचीन एवं ऐतिहासिक मंदिरों में एक श्री नर्मदेश्वर महादेव
साक्षात भगवान शिव का स्वरूप हैं, जो नर्मदा नदी के प्राकृतिक पत्थरों से बनते हैं। इनकी महिमा अपरंपार है और मान्यता है कि "नर्मदा का हर कंकर शंकर है"। यह दुनिया के एकमात्र ऐसे शिवलिंग हैं, जिनकी प्राण-प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं होती। इन्हें किसी शिल्पकार द्वारा तराशा नहीं जाता, बल्कि ये माँ नर्मदा के जल प्रवाह में प्राकृतिक रूप से आकार लेते हैं। इसलिए ये स्वयंभू (स्वयं प्रकट) माने जाते हैं। शिव महापुराण के अनुसार, नर्मदा नदी के दर्शन मात्र से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। चूँकि ये स्वयं सिद्ध होते हैं, इन्हें घर में स्थापित करने के लिए किसी विशेष प्राण-प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं होती।
अन्य शिवलिंगों पर चढ़ाया गया प्रसाद या भोग ग्रहण नहीं किया जाता, लेकिन नर्मदेश्वर महादेव पर चढ़ाया गया प्रसाद बहुत पवित्र माना जाता है और इसे खाया जा सकता है। घर में इनकी पूजा करने से वास्तु दोष दूर होते हैं और साधक को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—चारों फलों की प्राप्ति होती है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, माता नर्मदा ने ब्रह्मा जी से गंगा के समान पाप नाशिनी और मोक्षदायिनी बनने का वरदान मांगा था। बाद में भगवान शिव ने प्रसन्न होकर वरदान दिया कि नर्मदा नदी से निकलने वाला हर पत्थर (बाणलिंग) नर्मदेश्वर के रूप में पूजा जाएगा और भक्तों को शीघ्र फल प्रदान करेगा।

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"नर्मदेश्वर महादेव"
काशी वाराणसी में स्थित अत्यंत प्राचीन एवं ऐतिहासिक मंदिरों में एक श्री नर्मदेश्वर महादेव
साक्षात भगवान शिव का स्वरूप हैं, जो नर्मदा नदी के प्राकृतिक पत्थरों से बनते हैं। इनकी महिमा अपरंपार है और मान्यता है कि "नर्मदा का हर कंकर शंकर है"। यह दुनिया के एकमात्र ऐसे शिवलिंग हैं, जिनकी प्राण-प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं होती। इन्हें किसी शिल्पकार द्वारा तराशा नहीं जाता, बल्कि ये माँ नर्मदा के जल प्रवाह में प्राकृतिक रूप से आकार लेते हैं। इसलिए ये स्वयंभू (स्वयं प्रकट) माने जाते हैं। शिव महापुराण के अनुसार, नर्मदा नदी के दर्शन मात्र से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। चूँकि ये स्वयं सिद्ध होते हैं, इन्हें घर में स्थापित करने के लिए किसी विशेष प्राण-प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं होती।
अन्य शिवलिंगों पर चढ़ाया गया प्रसाद या भोग ग्रहण नहीं किया जाता, लेकिन नर्मदेश्वर महादेव पर चढ़ाया गया प्रसाद बहुत पवित्र माना जाता है और इसे खाया जा सकता है। घर में इनकी पूजा करने से वास्तु दोष दूर होते हैं और साधक को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—चारों फलों की प्राप्ति होती है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, माता नर्मदा ने ब्रह्मा जी से गंगा के समान पाप नाशिनी और मोक्षदायिनी बनने का वरदान मांगा था। बाद में भगवान शिव ने प्रसन्न होकर वरदान दिया कि नर्मदा नदी से निकलने वाला हर पत्थर (बाणलिंग) नर्मदेश्वर के रूप में पूजा जाएगा और भक्तों को शीघ्र फल प्रदान करेगा।

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