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ऋषि कपूर (4 सितंबर 1952 – 30 अप्रैल 202 हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय और सफल अभिनेताओं में से एक थे। वे महान अभिनेता एवं निर्देशक राज कपूर और कृष्णा राज कपूर के पुत्र तथा प्रसिद्ध कपूर खानदान की चौथी पीढ़ी के प्रतिनिधि थे। उन्होंने बाल कलाकार के रूप में मेरा नाम जोकर (197 से शुरुआत की और बॉबी (1973) से बतौर नायक अपार लोकप्रियता हासिल की।
ऋषि कपूर ने अपने लगभग पाँच दशक लंबे फिल्मी करियर में 150 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया। कर्ज़, चांदनी, नगीना, अग्निपथ (2012), कपूर एंड संस, 102 नॉट आउट और मुल्क जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को खूब सराहा गया। उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।
1980 में उन्होंने अभिनेत्री नीतू कपूर से विवाह किया। उनके दो बच्चे हैं—अभिनेता रणबीर कपूर और रिद्धिमा कपूर साहनी। 30 अप्रैल 2020 को उनका निधन हो गया, लेकिन भारतीय सिनेमा में उनके योगदान और अभिनय की विरासत आज भी करोड़ों लोगों के दिलों में जीवित है।
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🇮🇳💔 मां भारती के वीर सपूत विक्रम पायला जी को भावभीनी श्रद्धांजलि।
देश सेवा के दौरान उनका असमय निधन पूरे देश के लिए अपूरणीय क्षति है। पत्नी का सलाम, 6 महीने की मासूम बेटी की अंतिम विदाई और तिरंगे में लिपटे वीर जवान का सफर हर आंख नम कर गया।
🙏 ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।
ॐ शांति। जय हिंद। 🇮🇳🕊️
भारतीय तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ ने कहा कि इंग्लैंड के खिलाफ एकमात्र टेस्ट मैच में पांच विकेट लेने के बाद ‘लॉर्ड्स ऑनर्स बोर्ड’ (सम्मान पट्टिका) पर नाम दर्ज कराने वाली पहली महिला बनना उनके और उनके परिवार के लिए बेहद गर्व की बात है.
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क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित मैदान लॉर्ड्स पर भारत की बेटी ने इतिहास रच दिया!
भारतीय महिला क्रिकेटर यास्तिका भाटिया ने लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर शानदार शतक जड़ते हुए इतिहास रच दिया। वह इस प्रतिष्ठित मैदान पर शतक लगाने वाली पहली महिला क्रिकेटर बन गई हैं। जिस मैदान के ऑनर्स बोर्ड पर दशकों से क्रिकेट के महान खिलाड़ियों की उपलब्धियां दर्ज होती रही हैं, वहां अब एक भारतीय महिला का नाम भी हमेशा के लिए दर्ज हो गया है।
यास्तिका की यह पारी सिर्फ एक शतक नहीं, बल्कि भारतीय महिला क्रिकेट के बढ़ते कद का प्रतीक है। दबाव, उम्मीदों और दुनिया की निगाहों के बीच उन्होंने संयम, आत्मविश्वास और बेहतरीन बल्लेबाज़ी का प्रदर्शन करते हुए एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया जिसे आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी।
यह उपलब्धि हर उस लड़की के लिए प्रेरणा है जो क्रिकेट के मैदान पर बड़े सपने देखती है। भारत की यह ऐतिहासिक पारी बताती है कि अब भारतीय बेटियां सिर्फ इतिहास का हिस्सा नहीं बन रहीं, बल्कि इतिहास लिख रही हैं।
यास्तिका भाटिया को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए ढेरों शुभकामनाएं!
भारतीय सेना की एक जवान... और भारत के नाम ऐतिहासिक गोल्ड! :flag-in::dart:
हरियाणा की नीरू धांडा ने इटली के लोनाटो में आयोजित ISSF वर्ल्ड कप में इतिहास रच दिया। वह ट्रैप शूटिंग में ISSF वर्ल्ड कप का गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं। यह उपलब्धि भारतीय निशानेबाजी के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ती है।
26 वर्षीय नीरू ने पहले क्वालिफिकेशन राउंड में 121/125 का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाते हुए फाइनल में जगह बनाई। इसके बाद उन्होंने पूर्व विश्व चैंपियन कैरोल कॉर्मेनियर (फ्रांस) और मौजूदा विश्व चैंपियन मार मोल्ने मग्रिना (स्पेन) जैसी दिग्गज निशानेबाज़ों को पीछे छोड़ गोल्ड अपने नाम किया।
यह जीत यूं ही नहीं आई। नीरू भारतीय सेना में नायब सूबेदार हैं और वर्षों से अनुशासन, कठिन प्रशिक्षण और लगातार मेहनत के दम पर अपनी पहचान बना रही हैं। पिछले साल एशियाई चैंपियनशिप में भी उन्होंने ट्रैप शूटिंग में भारत के लिए ऐतिहासिक गोल्ड जीता था, और अब वर्ल्ड कप में भी देश का तिरंगा सबसे ऊंचा लहरा दिया।
नीरू धांडा की यह उपलब्धि सिर्फ एक मेडल नहीं, बल्कि उन लाखों बेटियों के लिए प्रेरणा है जो बड़े सपने देखने का साहस रखती हैं। भारत को अपनी इस चैंपियन पर गर्व है।भारतीय सेना की एक जवान... और भारत के नाम ऐतिहासिक गोल्ड! :flag-in::dart:
हरियाणा की नीरू धांडा ने इटली के लोनाटो में आयोजित ISSF वर्ल्ड कप में इतिहास रच दिया। वह ट्रैप शूटिंग में ISSF वर्ल्ड कप का गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं। यह उपलब्धि भारतीय निशानेबाजी के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ती है।
26 वर्षीय नीरू ने पहले क्वालिफिकेशन राउंड में 121/125 का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाते हुए फाइनल में जगह बनाई। इसके बाद उन्होंने पूर्व विश्व चैंपियन कैरोल कॉर्मेनियर (फ्रांस) और मौजूदा विश्व चैंपियन मार मोल्ने मग्रिना (स्पेन) जैसी दिग्गज निशानेबाज़ों को पीछे छोड़ गोल्ड अपने नाम किया।
यह जीत यूं ही नहीं आई। नीरू भारतीय सेना में नायब सूबेदार हैं और वर्षों से अनुशासन, कठिन प्रशिक्षण और लगातार मेहनत के दम पर अपनी पहचान बना रही हैं। पिछले साल एशियाई चैंपियनशिप में भी उन्होंने ट्रैप शूटिंग में भारत के लिए ऐतिहासिक गोल्ड जीता था, और अब वर्ल्ड कप में भी देश का तिरंगा सबसे ऊंचा लहरा दिया।
नीरू धांडा की यह उपलब्धि सिर्फ एक मेडल नहीं, बल्कि उन लाखों बेटियों के लिए प्रेरणा है जो बड़े सपने देखने का साहस रखती हैं। भारत को अपनी इस चैंपियन पर गर्व है।