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हैवान चंदन वर्मा ने जिस परिवार के 4 लोगों को निर्मम हत्या कर दी उस परिवार को सरकार ने आर्थिक मदद दी है। जमीन, एक घर और 30 लाख से अधिक रुपए दिए गए हैं! सरकार को ऐसे पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा होना ही चाहिए।

देवरिया में एक साल पहले देवेश दुबे के 5 लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई थी। दो बच्चे अनाथ हो गए थे। इन्हें भी सरकारी मदद मिलनी ही चाहिए थी। लेकिन आज भी सवाल यही कि इस परिवार को कितनी सरकारी मदद मिली?

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हैवान चंदन वर्मा ने जिस परिवार के 4 लोगों को निर्मम हत्या कर दी उस परिवार को सरकार ने आर्थिक मदद दी है। जमीन, एक घर और 30 लाख से अधिक रुपए दिए गए हैं! सरकार को ऐसे पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा होना ही चाहिए।

देवरिया में एक साल पहले देवेश दुबे के 5 लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई थी। दो बच्चे अनाथ हो गए थे। इन्हें भी सरकारी मदद मिलनी ही चाहिए थी। लेकिन आज भी सवाल यही कि इस परिवार को कितनी सरकारी मदद मिली?

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हैवान चंदन वर्मा ने जिस परिवार के 4 लोगों को निर्मम हत्या कर दी उस परिवार को सरकार ने आर्थिक मदद दी है। जमीन, एक घर और 30 लाख से अधिक रुपए दिए गए हैं! सरकार को ऐसे पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा होना ही चाहिए।

देवरिया में एक साल पहले देवेश दुबे के 5 लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई थी। दो बच्चे अनाथ हो गए थे। इन्हें भी सरकारी मदद मिलनी ही चाहिए थी। लेकिन आज भी सवाल यही कि इस परिवार को कितनी सरकारी मदद मिली?

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पत्रकार मिथुन मिश्रा के जमानत के प्रयास किए जा रहे हैं। परिवार से आज भी बात हुई। इनका एक छोटा बच्चा है। यही कोई 3-4 साल का होगा। इनकी गिरफ्तारी की तस्वीर देखकर डरा हुआ। घर में पूछ रहा है कि पापा कहां हैं।

एक बेहद सामान्य वर्ग से आने वाले पत्रकार की गिरफ्तारी होना और उसकी किसी मीडिया संस्थान में कोई चर्चा नहीं! सिर्फ इसलिए कि वो गरीब है, कम संसाधनों में भी स्थानीय मुद्दे कवर करता है। प्लीज इनके लिए आवाज उठाएँ।

बिहार की मुजफ्फरपुर पुलिस पर कई सवाल हैं। कितने पत्रकारों को गिरफ्तार करेंगे? कितनों को जेल में डालेंगे?

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पत्रकार मिथुन मिश्रा के जमानत के प्रयास किए जा रहे हैं। परिवार से आज भी बात हुई। इनका एक छोटा बच्चा है। यही कोई 3-4 साल का होगा। इनकी गिरफ्तारी की तस्वीर देखकर डरा हुआ। घर में पूछ रहा है कि पापा कहां हैं।

एक बेहद सामान्य वर्ग से आने वाले पत्रकार की गिरफ्तारी होना और उसकी किसी मीडिया संस्थान में कोई चर्चा नहीं! सिर्फ इसलिए कि वो गरीब है, कम संसाधनों में भी स्थानीय मुद्दे कवर करता है। प्लीज इनके लिए आवाज उठाएँ।

बिहार की मुजफ्फरपुर पुलिस पर कई सवाल हैं। कितने पत्रकारों को गिरफ्तार करेंगे? कितनों को जेल में डालेंगे?

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पत्रकार मिथुन मिश्रा के जमानत के प्रयास किए जा रहे हैं। परिवार से आज भी बात हुई। इनका एक छोटा बच्चा है। यही कोई 3-4 साल का होगा। इनकी गिरफ्तारी की तस्वीर देखकर डरा हुआ। घर में पूछ रहा है कि पापा कहां हैं।

एक बेहद सामान्य वर्ग से आने वाले पत्रकार की गिरफ्तारी होना और उसकी किसी मीडिया संस्थान में कोई चर्चा नहीं! सिर्फ इसलिए कि वो गरीब है, कम संसाधनों में भी स्थानीय मुद्दे कवर करता है। प्लीज इनके लिए आवाज उठाएँ।

बिहार की मुजफ्फरपुर पुलिस पर कई सवाल हैं। कितने पत्रकारों को गिरफ्तार करेंगे? कितनों को जेल में डालेंगे?

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अनिल विज ने कहा था कि अगली मुलाकात CM हाउस में होगी।

फिलहाल अंबाला कैंट से 1200 वोट से पीछे चल रहे हैं।

क्या लगता है वापसी कर लेंगे?

#haryanaelectionresult

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मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में तीनों जगह कांग्रेस के पक्ष में माहौल था। लेकिन उसके बाद राहुल गांधी आरक्षण, जातिवाद, सचिवों की जाति और पता नहीं क्या क्या नैरेटिव करने लगे। फिर जो रिजल्ट आया वो सभी ने देखा।

हरियाणा में भी कांग्रेस का पूरा माहौल था। लेकिन यहां ने जातीय जनगणना और आरक्षण लिमिट पर पूरा मुद्दा आकर रुक गया।

यही नैरेटिव कांग्रेस को बैकफायर कर गया। हरियाणा ने जातिवाद की राजनीति को नकार दिया है।

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मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में तीनों जगह कांग्रेस के पक्ष में माहौल था। लेकिन उसके बाद राहुल गांधी आरक्षण, जातिवाद, सचिवों की जाति और पता नहीं क्या क्या नैरेटिव करने लगे। फिर जो रिजल्ट आया वो सभी ने देखा।

हरियाणा में भी कांग्रेस का पूरा माहौल था। लेकिन यहां ने जातीय जनगणना और आरक्षण लिमिट पर पूरा मुद्दा आकर रुक गया।

यही नैरेटिव कांग्रेस को बैकफायर कर गया। हरियाणा ने जातिवाद की राजनीति को नकार दिया है।

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मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में तीनों जगह कांग्रेस के पक्ष में माहौल था। लेकिन उसके बाद राहुल गांधी आरक्षण, जातिवाद, सचिवों की जाति और पता नहीं क्या क्या नैरेटिव करने लगे। फिर जो रिजल्ट आया वो सभी ने देखा।

हरियाणा में भी कांग्रेस का पूरा माहौल था। लेकिन यहां ने जातीय जनगणना और आरक्षण लिमिट पर पूरा मुद्दा आकर रुक गया।

यही नैरेटिव कांग्रेस को बैकफायर कर गया। हरियाणा ने जातिवाद की राजनीति को नकार दिया है।

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