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भारत में इतनी सारी हेल्थ प्रॉब्लम्स का एक सीधा और कड़वा कारण घर की मम्मी या हाउसवाइफ़ भी होती हैं, क्योंकि उन्हें यह बेसिक समझ ही नहीं होती कि बच्चों को क्या खिलाना चाहिए और क्या नहीं; बच्चा पूरा दिन कार्ब्स और तेल पर पल रहा है, प्रोटीन का नाम तक नहीं, पति का BP हाई है फिर भी नमक खाने में भरपूर दिया जा रहा है क्योंकि उनको पता ही नहीं आप जो खाने में एक्स्ट्रा नमक डाल रही है उसको खाकर आपके पति को निकट भविष्य में अटैक आ सकता है।

सुबह उठते ही चाय-पराठा न प्रोटीन, न फाइबर बस फैट ही फैट, पुरुष तो एक बार एक्सरसाइज भी कर लेते है लेकिन महिलाओं का तो बुरा हाल है ज़िंदगी में कभी एक्सरसाइज नहीं करती है 90% महिलाएं।

भारत में यह कड़वा सच है कि आप बाहर का खाकर भी मरोगे और घर का खाकर भी, क्योंकि यहाँ घर का खाना भी सेहत के लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं है।

न भारतीय खाने में प्रोटीन है, न न्यूट्रिशियन, ऊपर से मिलावटी खाना, आने वाले भविष्य में सबकी फील्डिंग सेट होने वाली है क्योंकि जिनको लग रहा है हम तो घर का खाते है उनको बहुत सारी डिफिशिएंसी होने वाली है या हो चुकी है।

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पहली कोशिश में UPSC पहला दिन ड्यूटी का मंज़िल से बस 20 km दूर और ज़िंदगी ने फ़ाइल क्लोज़ कर दी।

कहते हैं कुछ लोग बहुत जल्दी कामयाब नहीं होते पर कुछ लोग इतने जल्दी चले जाते हैं कि कामयाबी को जी ही नहीं पाते सालों की मेहनत थी जो खत्म हो गई।

हम बात कर रहे है IPS हर्षवर्धन की जिनका ड्यूटी के पहले दिन ही कार दुर्घटना में मौत हो गई और इनकी मौत ने उनका सपना खत्म कर दिया ।

रातें जागकर पढ़ना दोस्तों से दूर रहना एक ही सपना UPSC clear करना और वर्दी पहनना पहली ही कोशिश में सपना पूरा हुआ।

IPS बना घर में जश्न मां बाप की आंखों में आंसू और खुद की आंखों में देश के लिए कुछ करने का जुनून पहला दिन था ड्यूटी का।

मंज़िल से बस 20 किलोमीटर दूर लेकिन रास्ते में ज़िंदगी ने आख़िरी मोड़ ले लिया जिस वर्दी को पहनकर सिस्टम बदलना था उसी वर्दी में दुनिया से विदा हो गया।

सबक बस इतना है ज़िंदगी कितनी भी बड़ी तैयारी क्यों न हो UPSC clear करना मुश्किल है पर सपने जीने का मौका मिलना उससे भी मुश्किल।

RIP. ज़िंदगी बहुत अनप्रेडिक्टेबल है।

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‘चौरी चौरा घटना’ की 104वीं वर्षगांठ पर माँ भारती के अमर बलिदानियों को विनम्र श्रद्धांजलि।

आज ही के दिन हमारे महान क्रांतिकारियों ने अपने प्राणों का उत्सर्ग कर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को नई चेतना, नई ऊर्जा और निर्णायक दिशा प्रदान की थी।

देश की एकता, अखंडता और स्वाभिमान हेतु अपना सर्वस्व अर्पित करने वाले वीर सपूतों का संघर्ष युगों-युगों तक प्रत्येक भारतीय के हृदय में देशभक्ति की ज्वाला प्रज्वलित करता रहेगा।

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जीजा-साली रिश्ता को कितना लोग बदनाम करते हैं, कहते हैं कि मज़ाकिया रिश्ता है ,

लेकिन यहां एक जीजा ससुराल में सास ससुर के मरने के बाद जीजा ने साली को अपने पास लाया आने के बाद पढ़ाई जारी रखा अपने बेटी की तरह रखा आज साली का नौकरी लग गई,

CRPF में जीजा साली लिपट कर रो रहे थे,
वो आंसु समाज में व्याप्त बुराई को कुचल के ऊपर उठने की थीं,

ऐसे व्यक्तिव को भी धन्यवाद!

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जीजा-साली रिश्ता को कितना लोग बदनाम करते हैं, कहते हैं कि मज़ाकिया रिश्ता है ,

लेकिन यहां एक जीजा ससुराल में सास ससुर के मरने के बाद जीजा ने साली को अपने पास लाया आने के बाद पढ़ाई जारी रखा अपने बेटी की तरह रखा आज साली का नौकरी लग गई,

CRPF में जीजा साली लिपट कर रो रहे थे,
वो आंसु समाज में व्याप्त बुराई को कुचल के ऊपर उठने की थीं,

ऐसे व्यक्तिव को भी धन्यवाद!

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