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हर हर महादेव 🙏🙏

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भगवान श्री हनुमान जी के परम भक्त, पूज्य संत श्री नीम करौली जी महाराज द्वारा भवाली, नैनीताल में स्थापित विश्वविख्यात पावन श्री कैंची धाम के प्रतिष्ठा दिवस की सभी श्रद्धालुओं को हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं।

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जहाँ आस्था पर्वतों से भी ऊँची है,
जहाँ हर "हर हर महादेव" में भक्ति का सागर है,
वहीं विराजमान हैं बाबा केदारनाथ। ❤️

जो भी श्रद्धा से उनके द्वार पहुँचता है,
बाबा उसकी हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। 🚩

जय बाबा केदारनाथ!🌿
हर हर महादेव! 🔱

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देहरादून में रहने वाला कुकरेती परिवार के एक नहीं बल्कि पाँच-पांच भाइयों ने एक साथ 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध में मोर्चा संभाला था. जो शायद भारतीय सैन्य इतिहास के सबसे दुर्लभ उदाहरणों में से एक है।पाँच भाइयों में से तीन राजपूत रेजिमेंट और दो ईएमई कोर में थे। अलग-अलग मोर्चों पर वीरता दिखाते हुए, उन्होंने भारत की विजय में योगदान दिया। लेफ्टिनेंट कर्नल राकेश कुकरेती, शौर्य चक्र विजेता, उन साहसी सैनिकों में से थे।
ये परिवार देहरादून के डिफेंस कॉलोनी इलाके में रहता है. इन पांच भाईयों में से तीन भाई राजपूत रेजिमेंट में और दो भाई ईएमई कोर में तैनात थे. इन सभी को अलग-अलग मोर्चों पर तैनात किया गया था, उनकी यूनिट अलग थीं लेकिन, सबका संकल्प केवल एक ही था- भारत माता की विजय।
एक परिवार के पांच भाइयों ने संभाला था मोर्चा:
इन पांच वीरों में सबसे प्रमुख नाम है शौर्य चक्र विजेता रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल राकेश कुकरेती. वे बताते हैं कि नवंबर 1971 के अंतिम सप्ताह में ही युद्ध की आहट साफ सुनाई देने लगी थी. सीमाओं पर तनाव बढ़ रहा था, पाकिस्तानी सेना भारतीय फौज की सप्लाई लाइनों को तोड़ने की साजिश रच रही थी. लेकिन, भारतीय जवान हर चुनौती के लिए तैयार थे.
युद्ध के दौरान धर्मनगर से गाजीपुर तक दुश्मन के इलाके में घुसकर की गई रेकी ने रणनीति की दिशा बदल दी. लेफ्टिनेंट कर्नल कुकरेती याद करते हैं जब उन्होंने तीन दिन तक बिना खाने और पानी के करीब 93 किलोमीटर तक पैदल चलते रहे. चारों तरफ गोलों की बारिश लेकिन, हौसला जरा भी डगमगाया नहीं. उनकी आंखों में आज भी वह दृश्य जिंदा है, जब मौत बेहद करीब थी लेकिन, देश से बड़ा कुछ भी नहीं था।
कुकरेती परिवार की यह वीरगाथा केवल स्मृतियों तक सीमित नहीं रही. इसे ‘कहानी 1971 युद्ध की’ नामक पुस्तक में सहेजा गया है ताकि आने वाली पीढ़ियां जान सकें कि आज़ादी और विजय के पीछे कितनी कुर्बानियां छिपी होती हैं।💐💐🇮🇳🇮🇳
#indianarmy

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अमावस्या और सोमवार के शुभ संयोग में आने वाले पर्व "सोमवती अमावस्या" की आप सभी को आत्मीय बधाई व शुभकामनाएं।

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महाभारत के अंत के बाद…
जब श्री कृष्ण इस धरती से चले गए,
तब सब कुछ बदल गया।
अर्जुन, जो कभी कुरुक्षेत्र में अजेय था,
जिसके गांडीव के सामने महारथी भी टिक नहीं पाए…
वही अर्जुन द्वारिका की यदुवंशी स्त्रियों और बच्चों को
सुरक्षित हस्तिनापुर ले जा रहा था।
लेकिन रास्ते में…
कुछ साधारण लुटेरों ने हमला कर दिया।
अर्जुन ने गांडीव उठाया…
पर इस बार वह पहले जैसा नहीं था।
दिव्य अस्त्र शांत हो चुके थे,
तरकश के बाण भी जैसे साथ छोड़ चुके थे।
और वो महान धनुर्धर…
एक साधारण काबा के सामने हार गया।
क्योंकि इस बार न समय साथ था…
न श्री कृष्ण।
बाद में महर्षि वेद व्यास ने समझाया—
यह सब नियति थी, समय का खेल था…
ताकि अर्जुन समझ सके कि
शक्ति, ज्ञान और विजय भी
समय के आगे कुछ नहीं।
समय सबसे बलवान है।
#mahabharat
#krishnakatha
#realtalk
#storytelling

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आज से 6 साल पहले आज ही के दिन जब अचानक से खबर फैली कि सुशांत सिंह ने आत्महत्या कर ली है तब उनके फैन्स के साथ ही क्रिकेट जगत में भी शोक और मातम फैल गया उस वक्त हर आंख नम थी सबके जेहन में एक ही सवाल था इतना हँसमुख और जिंदादिल इंसान आखिर जिंदगी से कैसे हार सकता है कौन भूल पाया था सुशांत सिंह राजपूत का वो शानदार अभिनय जिसने "एमएस धोनी द अनटोल्ड स्टोरी" मूवी में निभाये महेंद्र सिंह धोनी के किरदार में न सिर्फ जान फूंक दी थी बल्कि रील और रियल के फर्क को भी खत्म कर दिया था धोनी की जिंदगी को आज हम अगर इतना करीब से जान पाए हैं तो इसमें सुशांत सिंह राजपूत की बहुत बड़ी भूमिका है धोनी की कहानी को जिस संजीदगी के साथ उन्होंने वड़े पर्दे पर जिया वह आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है जब - जब धोनी का जिक्र होता है सुशांत सिंह राजपूत अनायास याद आ ही जाते है शायद सुशांत सिंह राजपूत के अलावा कोई दूसरा अभिनेता इतने अच्छे से धोनी को बड़े पर्दे पर नहीं उकेर पाता, सुशांत सिंह राजपूत दुनिया से भले चले गए हो लेकिन लोगों के दिलों में वह हमेशा रहेंगे
#msd

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भारत सरकार में मा० केंद्रीय मंत्री श्री जी० किशन रेड्डी जी आपको जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकानाएं।

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बिहार में मध निषेध भर्ती परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों की भारी भीड़ ने रेलवे व्यवस्था पर बड़ा दबाव डाल दिया। कई जगहों पर ट्रेनों में इतनी भीड़ उमड़ी कि आम यात्रियों को भी सफर करने में गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ा। स्थिति तब और बिगड़ गई जब ट्रेनों के देरी से पहुंचने पर हजारों अभ्यर्थियों का गुस्सा फूट पड़ा।
पटना समेत कई इलाकों में अभ्यर्थियों ने रेलवे ट्रैक पर प्रदर्शन किया। रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ स्थानों पर ट्रैक जाम किए गए, पथराव और तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आईं। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और रेलवे प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। भारी भीड़ के कारण कई ट्रेनें प्रभावित हुईं, जिससे परीक्षा देने जा रहे छात्रों के साथ-साथ आम यात्रियों की भी मुश्किलें बढ़ गईं।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों में रेलवे स्टेशनों तथा ट्रेनों में भारी भीड़ देखी जा सकती है। इस घटना ने एक बार फिर बड़े स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान परिवहन और भीड़ प्रबंधन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रशासन का कहना है कि स्थिति को सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जबकि यात्रियों और अभ्यर्थियों दोनों ने बेहतर व्यवस्था की मांग उठाई है।
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UPSC क्रैक करना लोगों के लिए किसी सपने.

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