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मने क्या करोगे आप !!
अगर अंटी में साढ़े चार हजार करोड़ हों???
●●
मैं तो एक आइलैंड खरीदूंगा।
एक बढ़िया रिजॉर्ट टाइप बंगला बनाऊंगा। मने प्राइवेट बीच, पूल, कॉटेज, गार्डन। घर, परिवार, दोस्तो सहित- छप्पक छप्पक छप्प!!
फिर एक ठो हवाई पट्टी और एक छोटुक से 8 सीटर जेट प्लेन। कतहूँ आना जाना हो, ऑफिस, धंधा-एपोइंटमेंट- घूमा घूमी.. ओहि में चले जायँगे।
लेकिन इसके बाद भी हजार पन्द्रह सौ करोड़ बच जाएंगे। उसमे से सौ करोड़ रख के, बाकी इस पोस्ट को पढ़ने वालों में बांट दूंगा।
छोटा आदमी, छोटी सोच।
●●
अल्फ्रेड नोबेल को इत्ते पैसे मिलते, तो वो एक इंटरनेशनल प्राइज रखते।
मने सारे पैसे एक फंड बनाकर एक ट्रस्ट के मैनेजमेंट में छोड़ देते।
एंडोमेंट फंड, याने मूल कभी नही छुवा जाएगा। लेकिन ब्याज की इफरात राशि से पूरी दुनिया मे साइंस, टेक्नॉलजी, इकनामिक्स और शांति के लिए काम करने वालो को प्रोत्साहित पुरुस्कृत और सम्मानित किया जाए।
आने वाले सौ से ज्यादा साल दुनिया के टॉप ब्रेन का सिर्फ एक सपना हो- एल्फ्रेड नोबल की शक्ल लगा वो पदक पाना।
●●
सोचिये- एक मनुष्य के नाम की अमर स्मृति, उसके जाने के 100 साल बाद भी,
हर साल.. !! साल दर साल.. इं
सानी रेस में पैदा होने वाले हर एक बेस्ट टैलेंट का यही ख्वाब !!! काश.. कि अल्फ्रेड नोबेल की शक्ल लगा वो पदक मिल जाये।
दुनिया में सर्वश्रेष्ठ होने का सबूत मिल जाये। नोबेल साधारण आदमी, मामूली इन्वेंटर था। थोड़ा पैसा ही था न उसके पास।
उसी से अमर हो गया, अपने से बेहतर लोगो के लिए भी ख़्वाब हो गया।
शानदार आदमी, शानदार सोच।
●●
मगर किसी मानसिक रूप बीमार, प्रदर्शनप्रिय, हाही, भुक्खड़, छुटकी सोच के आदमी को इतना पैसा मिल जाये तो क्या करेगा।
अजी, तंग गली के बाजू में 4000 स्क्वेयर फुट जमीन लेगा।
उसके ऊपर ऐड़ेंग बेड़ेग डिजाइन का मकान बनाएगा।
जिसमे 26 मंजिल हो, लेकिन हाइट 40 मंजिल बराबर हो।
जिसमे चार मंजिल में तो 100 ठो कार रखने का स्पेस हो।
छत पे तीन हैलीपेड हों,
सिनेमा हॉल हो,गेस्ट रूम हो, अपना एयर ट्राफिक कंट्रोल हो। ओपन टेरेस गार्डन हो, और एक स्विमिंग पूल हो।
जिसमे गंदे दांतो वाला दाढ़ीवान, और एक थुलथुल गंजा गुज्जू, रोज सुबह छप छप खेलने आते हों।
(उनको बुलाकर अपने पूल में नहलवाने की कास्ट एक्स्ट्रा है)
●●
सबै चीज घर मे है।
तो कहीं निकलना नही। मने पिक्चर देखने जाना नही। पार्क में घूमने जाना नही। दौड़ा दौड़ी ट्रेडमिल में कर लेते हो।
सब तो घरे में बनाए हो ससुर।
सामान ,राशन, कपड़े, लत्ते, सब तुम्हारे घर मे दुकानदार दे जाते होंगे। कंजस्टेड शहर है, तो फरारी दौड़ा सकते नही।
तो कहां जाओगे बे ...
70 ठो कार लेकर।
●●
और कहाँ उड़ोगे एक साथ तीन हेलीकॉप्टर में, मने अजय देवगन की तरह एक एक चोपर पे एक एक टांग रखके उड़ोगे तो भी एक चौपर एक्स्ट्रा बच जाएगा।
कित्ता बड़ा बैडरूम होगा, कित्ती बड़ी बेड होगी, की लोट लोट के, दौड़ दौड़ के सब तरफ सोते होंगे।
मने ई का बवासीर बनाये हो यार ?
●●
पर इसमे एक कमी है।
प्राइवेट श्मशान नही है।
फिर भी, दुनिया मे सबसे बड़े पगलैटि अगर कहीं है, तो यही है, यहीं है यहीं है।
नकली आदमी,
नकली सोच...
मने क्या करोगे आप !!
अगर अंटी में साढ़े चार हजार करोड़ हों???
●●
मैं तो एक आइलैंड खरीदूंगा।
एक बढ़िया रिजॉर्ट टाइप बंगला बनाऊंगा। मने प्राइवेट बीच, पूल, कॉटेज, गार्डन। घर, परिवार, दोस्तो सहित- छप्पक छप्पक छप्प!!
फिर एक ठो हवाई पट्टी और एक छोटुक से 8 सीटर जेट प्लेन। कतहूँ आना जाना हो, ऑफिस, धंधा-एपोइंटमेंट- घूमा घूमी.. ओहि में चले जायँगे।
लेकिन इसके बाद भी हजार पन्द्रह सौ करोड़ बच जाएंगे। उसमे से सौ करोड़ रख के, बाकी इस पोस्ट को पढ़ने वालों में बांट दूंगा।
छोटा आदमी, छोटी सोच।
●●
अल्फ्रेड नोबेल को इत्ते पैसे मिलते, तो वो एक इंटरनेशनल प्राइज रखते।
मने सारे पैसे एक फंड बनाकर एक ट्रस्ट के मैनेजमेंट में छोड़ देते।
एंडोमेंट फंड, याने मूल कभी नही छुवा जाएगा। लेकिन ब्याज की इफरात राशि से पूरी दुनिया मे साइंस, टेक्नॉलजी, इकनामिक्स और शांति के लिए काम करने वालो को प्रोत्साहित पुरुस्कृत और सम्मानित किया जाए।
आने वाले सौ से ज्यादा साल दुनिया के टॉप ब्रेन का सिर्फ एक सपना हो- एल्फ्रेड नोबल की शक्ल लगा वो पदक पाना।
●●
सोचिये- एक मनुष्य के नाम की अमर स्मृति, उसके जाने के 100 साल बाद भी,
हर साल.. !! साल दर साल.. इं
सानी रेस में पैदा होने वाले हर एक बेस्ट टैलेंट का यही ख्वाब !!! काश.. कि अल्फ्रेड नोबेल की शक्ल लगा वो पदक मिल जाये।
दुनिया में सर्वश्रेष्ठ होने का सबूत मिल जाये। नोबेल साधारण आदमी, मामूली इन्वेंटर था। थोड़ा पैसा ही था न उसके पास।
उसी से अमर हो गया, अपने से बेहतर लोगो के लिए भी ख़्वाब हो गया।
शानदार आदमी, शानदार सोच।
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मगर किसी मानसिक रूप बीमार, प्रदर्शनप्रिय, हाही, भुक्खड़, छुटकी सोच के आदमी को इतना पैसा मिल जाये तो क्या करेगा।
अजी, तंग गली के बाजू में 4000 स्क्वेयर फुट जमीन लेगा।
उसके ऊपर ऐड़ेंग बेड़ेग डिजाइन का मकान बनाएगा।
जिसमे 26 मंजिल हो, लेकिन हाइट 40 मंजिल बराबर हो।
जिसमे चार मंजिल में तो 100 ठो कार रखने का स्पेस हो।
छत पे तीन हैलीपेड हों,
सिनेमा हॉल हो,गेस्ट रूम हो, अपना एयर ट्राफिक कंट्रोल हो। ओपन टेरेस गार्डन हो, और एक स्विमिंग पूल हो।
जिसमे गंदे दांतो वाला दाढ़ीवान, और एक थुलथुल गंजा गुज्जू, रोज सुबह छप छप खेलने आते हों।
(उनको बुलाकर अपने पूल में नहलवाने की कास्ट एक्स्ट्रा है)
●●
सबै चीज घर मे है।
तो कहीं निकलना नही। मने पिक्चर देखने जाना नही। पार्क में घूमने जाना नही। दौड़ा दौड़ी ट्रेडमिल में कर लेते हो।
सब तो घरे में बनाए हो ससुर।
सामान ,राशन, कपड़े, लत्ते, सब तुम्हारे घर मे दुकानदार दे जाते होंगे। कंजस्टेड शहर है, तो फरारी दौड़ा सकते नही।
तो कहां जाओगे बे ...
70 ठो कार लेकर।
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और कहाँ उड़ोगे एक साथ तीन हेलीकॉप्टर में, मने अजय देवगन की तरह एक एक चोपर पे एक एक टांग रखके उड़ोगे तो भी एक चौपर एक्स्ट्रा बच जाएगा।
कित्ता बड़ा बैडरूम होगा, कित्ती बड़ी बेड होगी, की लोट लोट के, दौड़ दौड़ के सब तरफ सोते होंगे।
मने ई का बवासीर बनाये हो यार ?
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पर इसमे एक कमी है।
प्राइवेट श्मशान नही है।
फिर भी, दुनिया मे सबसे बड़े पगलैटि अगर कहीं है, तो यही है, यहीं है यहीं है।
नकली आदमी,
नकली सोच...
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आने वाले सौ से ज्यादा साल दुनिया के टॉप ब्रेन का सिर्फ एक सपना हो- एल्फ्रेड नोबल की शक्ल लगा वो पदक पाना।
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सोचिये- एक मनुष्य के नाम की अमर स्मृति, उसके जाने के 100 साल बाद भी,
हर साल.. !! साल दर साल.. इं
सानी रेस में पैदा होने वाले हर एक बेस्ट टैलेंट का यही ख्वाब !!! काश.. कि अल्फ्रेड नोबेल की शक्ल लगा वो पदक मिल जाये।
दुनिया में सर्वश्रेष्ठ होने का सबूत मिल जाये। नोबेल साधारण आदमी, मामूली इन्वेंटर था। थोड़ा पैसा ही था न उसके पास।
उसी से अमर हो गया, अपने से बेहतर लोगो के लिए भी ख़्वाब हो गया।
शानदार आदमी, शानदार सोच।
●●
मगर किसी मानसिक रूप बीमार, प्रदर्शनप्रिय, हाही, भुक्खड़, छुटकी सोच के आदमी को इतना पैसा मिल जाये तो क्या करेगा।
अजी, तंग गली के बाजू में 4000 स्क्वेयर फुट जमीन लेगा।
उसके ऊपर ऐड़ेंग बेड़ेग डिजाइन का मकान बनाएगा।
जिसमे 26 मंजिल हो, लेकिन हाइट 40 मंजिल बराबर हो।
जिसमे चार मंजिल में तो 100 ठो कार रखने का स्पेस हो।
छत पे तीन हैलीपेड हों,
सिनेमा हॉल हो,गेस्ट रूम हो, अपना एयर ट्राफिक कंट्रोल हो। ओपन टेरेस गार्डन हो, और एक स्विमिंग पूल हो।
जिसमे गंदे दांतो वाला दाढ़ीवान, और एक थुलथुल गंजा गुज्जू, रोज सुबह छप छप खेलने आते हों।
(उनको बुलाकर अपने पूल में नहलवाने की कास्ट एक्स्ट्रा है)
●●
सबै चीज घर मे है।
तो कहीं निकलना नही। मने पिक्चर देखने जाना नही। पार्क में घूमने जाना नही। दौड़ा दौड़ी ट्रेडमिल में कर लेते हो।
सब तो घरे में बनाए हो ससुर।
सामान ,राशन, कपड़े, लत्ते, सब तुम्हारे घर मे दुकानदार दे जाते होंगे। कंजस्टेड शहर है, तो फरारी दौड़ा सकते नही।
तो कहां जाओगे बे ...
70 ठो कार लेकर।
●●
और कहाँ उड़ोगे एक साथ तीन हेलीकॉप्टर में, मने अजय देवगन की तरह एक एक चोपर पे एक एक टांग रखके उड़ोगे तो भी एक चौपर एक्स्ट्रा बच जाएगा।
कित्ता बड़ा बैडरूम होगा, कित्ती बड़ी बेड होगी, की लोट लोट के, दौड़ दौड़ के सब तरफ सोते होंगे।
मने ई का बवासीर बनाये हो यार ?
●●
पर इसमे एक कमी है।
प्राइवेट श्मशान नही है।
फिर भी, दुनिया मे सबसे बड़े पगलैटि अगर कहीं है, तो यही है, यहीं है यहीं है।
नकली आदमी,
नकली सोच...

बीजेपी के पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वामी चिन्मयानंद को रेप के केस से बरी कर दिया गया। उनपर उनके कॉलेज की लॉ स्टूडेंट ने रेप का आरोप लगाया था। नंगे होकर मालिश करवाने का उनका वीडियो हर किसी ने देखा ही था।
इसके बाद चिन्मयानंद फरार हो गए थे। कोर्ट ने उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया था। कुछ वक्त बाद पीड़िता अपने बयान से मुकर गई। कहा कि उनके साथ कोई रेप नहीं हुआ। इसके बाद चिन्मयानंद प्रकट हो गए।
2011 के रेप केस का 2024 में फैसला आया है। माननीयों के मामले में न्याय की यह रफ्तार उनके हनक को दिखाती है। कई बार तो लगता है कि जज साहब संविधान से बंधे हैं वरना केस सुनने से पहले ही बरी कर चुके होते।