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Sandeep Nangal Ambian

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जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई पतिदेव। बच्चों ने गुलाबजामुन, रबड़ी एवं पेस्टी (केक के स्थान पे) भिजवा दिया, और हम और जोजो ने मिलकर केक कटवा दिया😄

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जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई पतिदेव। बच्चों ने गुलाबजामुन, रबड़ी एवं पेस्टी (केक के स्थान पे) भिजवा दिया, और हम और जोजो ने मिलकर केक कटवा दिया😄

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जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई पतिदेव। बच्चों ने गुलाबजामुन, रबड़ी एवं पेस्टी (केक के स्थान पे) भिजवा दिया, और हम और जोजो ने मिलकर केक कटवा दिया😄

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वार्ड भगवानपुर एक समय सिर्फ और सिर्फ कच्ची गलियों के लिए जाना जाता था बीते कुछ वर्षों में आदरणीय प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी की प्रेरणा से वह आदरणीय मुख्यमंत्री श्री MYogiAdityanath जी महाराज के मार्गदर्शन में भगवानपुर में गिनी चुनी कच्ची गलियां ही बची है।
गढ़वा घाट रोड पर परमहंस आश्रम के गेट से उत्तर तरफ पटेल नगर कॉलोनी में रु 16.40 लाख की लागत से 233.80 मीटर इंटरलाकिंग मार्ग निर्माण कार्य का शिलान्यास संपन्न हुआ।
शिलान्यास का पूजन श्री मिथिलेश श्रीवास्तव जी एवं डॉ. अजीत सिंह जी से कराया। मा. पार्षद श्री अमित सिंह "चिंटू" जी ने नारियल फोड़ कर पूजन सम्पन्न कराया।
#विकास #kashibolenamonamo #abkibaarphirmodisarkar #modihaintohmumkinhain #modihaitomumkinhai #abkibar400par
Amit Shah J.P.Nadda Sunil Bansal Dharmendra Pradhan Bhupendra Singh Dharampal Singh Keshav Prasad Maurya Brajesh Pathak Satish Mahana Ashwini Tyagi Dileep Patel Bharatiya Janata Party (BJP) BJP Uttar Pradesh

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पहलवान जस्सा पट्टी का जन्म 15 जुलाई 1993 को अमृतसर के चुसलेवार पट्टी गाँव में हुआ
Jassa patti father name
पिता का नाम सरदार सलविंदर सिंह (शिंदा)
परिवार ने jassa patti का नाम जस्सा जसकंवर सिंह रखा था।

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1544 ई. में अफगान बादशाह शेरशाह सूरी और मारवाड़ के राव मालदेव राठौड़ के बीच गिरी सुमेल की लड़ाई हुई।
इस लड़ाई से पहले शेरशाह ने कूटनीति से राव मालदेव और उनके सामंतों के बीच अविश्वास पैदा कर दिया, जिससे राव मालदेव ने अपनी फौज पीछे हटाने का आदेश दिया।
जब इस षड्यंत्र का पता वीर योद्धा कूंपा जी को लगा, तो उन्होंने राव जी को समझाने का प्रयास किया, फिर भी राव जी न माने।
तब कूंपा जी ने कहा कि "सच्चे राजपूतों में ऐसा विश्वासघात पहले तो कभी न हुआ। मैं राजपूतों की प्रतिष्ठा पर लगाए गए इस कलंक को अपने रक्त से धोऊंगा या शेरशाह को अपने थोड़े से सिपाहियों के साथ पराजित करूँगा"
फिर 8-9 हजार राठौड़ों ने शेरशाह की 80 हजार की फौज पर ऐसा पुरज़ोर आक्रमण किया, कि लड़ाई के बाद शेरशाह सूरी को भी कहना पड़ा कि "मुट्ठी भर बाजरे के लिए मैं हिंदुस्तान की बादशाहत खो देता"
पोस्ट लेखक :- तनवीर सिंह सारंगदेवोत

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